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Jhansi News: स्नातक निर्वाचन को लेकर प्रशासन सख्त, प्रचार सामग्री और चुनावी आचरण पर जारी हुए निर्देश
Jhansi News: झांसी में 23 अक्टूबर को होगा मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना। प्रचार सामग्री पर प्रिंटर-प्रकाशक का नाम-पता अनिवार्य, नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी।
स्नातक निर्वाचन को लेकर प्रशासन सख्त, प्रचार सामग्री और चुनावी आचरण पर जारी हुए निर्देश (Photo- Social Media)
Jhansi News: इलाहाबाद-झांसी खण्ड स्नातक निर्वाचन को लेकर जिला प्रशासन ने चुनाव प्रचार सामग्री के मुद्रण और प्रकाशन के साथ ही चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के आचरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने सभी प्रिंटिंग प्रेस संचालकों, मुद्रकों, राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को निर्वाचन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में जनपद में मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को संपन्न कराई जाएगी। जिले में 22 सितंबर 2026 से आदर्श आचार संहिता प्रभावी है।
प्रचार सामग्री पर प्रिंटर और प्रकाशक का नाम-पता जरूरी
अपर जिलाधिकारी प्रशासन एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि निर्वाचन के दौरान प्रत्याशियों की ओर से पैम्पलेट, पोस्टर, हैंडबिल और प्लेकार्ड जैसी प्रचार सामग्री छपवाई जाती है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क के तहत प्रत्येक ऐसी सामग्री के आगे प्रिंटर और प्रकाशक का नाम व पता दर्ज होना अनिवार्य है।
प्रिंटर को प्रकाशक से पहचान संबंधी घोषणा दो प्रतियों में प्राप्त करनी होगी। इस घोषणा पर प्रकाशक के हस्ताक्षर होने के साथ उसे ऐसे दो व्यक्तियों से प्रमाणित कराना जरूरी है, जो प्रकाशक को व्यक्तिगत रूप से जानते हों। सामग्री छपने के बाद घोषणा और मुद्रित दस्तावेज की एक-एक प्रति उपलब्ध कराना भी अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद, दो हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
चुनावी नियम तोड़ने पर होगी दंडात्मक कार्रवाई
रिटर्निंग ऑफिसर एवं मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने उम्मीदवारों को निर्वाचन कानूनों का अध्ययन करने और उनका पालन करने की हिदायत दी है। उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत रिश्वत देना, मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालना, धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना, झूठे विवरण प्रकाशित करना, निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करना और सरकारी कर्मचारियों से अनुचित सहायता लेना भ्रष्ट आचरण में शामिल है।
इसके अलावा प्रतिबंधित अवधि में जनसभाएं करना, चुनावी बैठकों में बाधा डालना, मतदान की गोपनीयता भंग करना, मतदान केंद्र के आसपास प्रचार करना, अवैध रूप से वाहनों का इस्तेमाल करना, मतपत्रों को हटाना और बूथ कैप्चरिंग जैसे कृत्य भी निर्वाचन संबंधी अपराध हैं।
कानून के उल्लंघन पर रद्द हो सकता है निर्वाचन
प्रशासन ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 171-ख, 171-ग, 171-घ, 171-छ, 171-ज और 171-झ के तहत रिश्वत, अनुचित प्रभाव, प्रतिरूपण, गलत विवरण, अवैध भुगतान और चुनावी खर्च का हिसाब रखने में विफलता जैसे मामलों का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भ्रष्ट आचरण और निर्वाचन संबंधी अपराध सामने आने पर कानून के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित प्रावधानों के तहत आवश्यक मामलों में निर्वाचन निरस्त भी किया जा सकता है।


