Jhansi News: झांसी के स्टार्टअप ने बढ़ाया यूपी का मान, NABARD के राष्ट्रीय मंच पर दिखाया कमाल

Jhansi News: उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित स्टार्टअप 'बेकार को आकार' को नाबार्ड के राष्ट्रीय मंच पर अपनी नवाचार तकनीक प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।

Gaurav kushwaha
Published on: 19 Jun 2026 7:21 PM IST
Jhansi News: झांसी के स्टार्टअप ने बढ़ाया यूपी का मान, NABARD के राष्ट्रीय मंच पर दिखाया कमाल
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Jhansi News: स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने की योगी सरकार की नीति से उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम कर रहे हैं। झांसी के स्टार्टअप 'बेकार को आकार' को नाबार्ड के राष्ट्रीय मंच पर अपनी उपलब्धि बताने का अवसर हासिल हुआ है। 'बेकार को आकार – वेस्ट टू वर्थ सर्कुलर इकोनॉमी अपसाइक्लिंग मॉडल' को नाबार्ड मुख्यालय में प्रौद्योगिकियों पर वेबिनार श्रृंखला में अपनी नवाचार तकनीक प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया। यह अवसर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के 'मंथन कार्यक्रम' के अंतर्गत प्रदान किया गया है।

'बेकार को आकार' एक सामाजिक उद्यम है, जो कपड़े के अवशेष, प्लास्टिक की बोतलें, टायर एवं अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को रिसाइकिल करके उन्हें आकर्षक हस्तनिर्मित जीवनशैली, उपहार एवं सजावटी उत्पादों में परिवर्तित करता है। इस स्टार्टअप को स्टार्ट इन यूपी से कुछ समय पहले ग्रांट मिला है। यह स्टार्टअप झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय स्थित इनक्यूबेशन काउंसिल में रजिस्टर्ड है। उत्तर प्रदेश सरकार इस स्टार्टअप को सम्मानित कर चुकी है। वर्तमान समय में इस स्टार्टअप के साथ बुंदेलखंड की पारंपरिक चितेरी लोक कला का प्रयोग किया जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार सृजन भी हो रहा है।

नाबार्ड के मंच पर वेबिनार में उपलब्धि बताने का यह अवसर 'मंथन कार्यक्रम' के अंतर्गत प्रदान किया गया है जो भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। मंथन का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में कार्य कर रहे शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करना है। यह कार्यक्रम सामाजिक एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचारों को बढ़ावा देने और उन्हें व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य करता है।

स्टार्टअप 'बेकार को आकार' की फाउंडर नीलम सारंगी ने बताया कि इस उपलब्धि से पर्यावरण संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी, महिला सशक्तिकरण एवं बुंदेलखंड की लोक कला के संरक्षण के अपने मिशन को और अधिक व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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