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मेडिकल स्टोर के मालिक से संचालित करवा रहा है प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
Jhansi News: झांसी जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र के संचालन और दवा वितरण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय दवा व्यापारियों ने शिकायत पत्र देकर कथित अनियमितताओं और दवा सिंडिकेट की जांच की मांग की है।
Jhansi News: जिला अस्पताल में चल रहे काले कारनामों और 'अवैध दवा सिंडिकेट' की परतें अब एक-एक कर उखड़ने लगी हैं। कल तक जिस बदहाली पर सत्ताधारी दल बीजेपी के महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह ने डीएम को चिट्ठी लिखी थी, आज उसी अस्पताल के भीतर चल रहे 'दवा माफिया खेल' का नामजद सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है।
स्थानीय दवा व्यापारियों ने एकजुट होकर जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल के मुख्य द्वार पर स्थित 'प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र' का असली आवंटनकर्ता खुद दुकान न चलाकर, उसे ' मेडिकल स्टोर' के मालिक से अवैध रूप से संचालित करवा रहा है।
आरोप है कि उक्त व्यक्ति बिना किसी डिग्री और बिना फार्मासिस्ट के गैर-अनुभवी लड़कियों को वहां रखकर न सिर्फ दवाइयां बिकवा रहा है, बल्कि डॉक्टरों पर दबाव बनाकर मरीजों को अस्पताल से बाहर की महंगी दवाइयां लेने पर मजबूर कर रहा है। यही वो कड़ियां हैं जो ठीक एक हफ्ते पहले डॉक्टरों की कुर्सियों पर बैठी उन अज्ञात युवतियों के वायरल सच को जोड़ती हैं।
झांसी जिला अस्पताल का 'दवा सिंडिकेट' अब पूरी तरह से बेनकाब होने की कगार पर है। आज स्थानीय दवा व्यापारियों ने सीएमएस को बकायदा लिखित शिकायत देकर इस पूरे सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शिकायती पत्र में सीधा और गंभीर आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी डिग्री या फार्मासिस्ट के, जन औषधि केंद्र के भीतर कई लड़कियों को रखा गया है। यह वही लड़कियां हैं जो डॉक्टरों की अनुपस्थिति में ओपीडी के केबिनों में डॉक्टरों की मुख्य कुर्सियों पर बैठकर बाहर की महंगी दवाइयां लिख रही थीं। व्यापारियों का आरोप है कि आरोपी डॉक्टरों पर दबाव बनाकर अपने मनमाफिक पर्चे लिखवाता है और जन औषधि की सस्ती दवाइयां न देकर मरीजों को अपने निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर करता है। विरोध करने पर अस्पताल परिसर के भीतर ही अभद्रता और झगड़े की नौबत आ जाती है।
मालूम हो कि 30 मई को ही भाजपा के महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह ने भी डीएम को पत्र लिखकर साफ कहा था कि मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। आज दवा व्यापारियों द्वारा साक्ष्यों और वीडियो पेन ड्राइव के साथ दी गई थी। इस नई शिकायत ने बीजेपी जिलाध्यक्ष के आरोपों और एक हफ्ते पुराने उस 'दवा सिंडिकेट' के सच पर अंतिम मुहर लगा दी है।
झांसी जिला अस्पताल में पहले बदहाली, फिर डॉक्टरों की कुर्सियों पर बाहरी युवतियों का कब्जा, उसके बाद बीजेपी जिलाध्यक्ष की तल्ख चिट्ठी और अब... अब स्थानीय दवा व्यापारियों द्वारा एक व्यक्ति पर जन औषधि केंद्र के दुरुपयोग और 'दवा सिंडिकेट' चलाने का यह नामजद महा-खुलासा। ये तमाम कड़ियां साफ इशारा करती हैं कि अस्पताल के भीतर एक बहुत बड़ा नेक्सस काम कर रहा है, जो गरीब मरीजों की जेब पर डाका डाल रहा है। दवा व्यापारियों ने इस पत्र की कॉपियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, स्वास्थ्य मंत्री और ड्रग कंट्रोलर को भी भेज दी हैं। अब देखना यह होगा कि इस नामजद खुलासे के बाद प्रशासन इस सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करता है या फिर रसूख के आगे घुटने टेक देता है।


