Jhansi News: विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति पदक बने विशेष आकर्षण का केंद्र

Jhansi News: झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को कुलाधिपति पदक से सम्मानित किया गया, जो समारोह का विशेष आकर्षण रहे।

Gaurav kushwaha
Published on: 13 Aug 2026 6:30 PM IST (Updated on: 13 Aug 2026 9:24 PM IST)
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Jhansi News(Photo-Social Media)

Jhansi News: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के 31वें दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए कुलाधिपति पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह में विभिन्न संकायों और पाठ्यक्रमों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, एआई ट्यूटर ‘द्रोणा’ का शुभारंभ, पत्रिकाओं का विमोचन और विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान भी किया गया।


आकांक्षा रावत ने हासिल किया सर्वोच्च स्थान

समारोह में एम.एससी. कृषि-उद्यान विज्ञान की छात्रा आकांक्षा रावत ने 94.20 प्रतिशत अंक हासिल कर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। आकांक्षा रावत नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर की छात्रा हैं। उन्हें समस्त परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। छात्राओं में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर उन्हें कुलाधिपति रजत पदक से भी सम्मानित किया गया।


विभिन्न परास्नातक पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कल्पना शर्मा, दीक्षा, शोभा तोमर, सोनम यादव, रूपा यादव, छवि द्विवेदी, प्रिन्सी गुप्ता, श्वेता यादव, खुशी अग्रवाल और प्रकांक्षा गुप्ता को भी कुलाधिपति रजत पदक प्रदान किए गए। सत्र 2024-25 के अन्य उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों में अन्नपूर्णा सिंह ने एम.एड. में 85 प्रतिशत, कुमारी अंजू ने एम.सी.ए. में 81.21 प्रतिशत और यामिनी यादव ने एलएल.एम. में 66.92 प्रतिशत अंक हासिल कर कुलाधिपति रजत पदक प्राप्त किए।


स्नातक स्तर के मेधावियों को कांस्य पदक

स्नातक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुलाधिपति कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। इनमें आस्था दीक्षित, साक्षी श्रीवास्तव, पारस, आयुष खरे, काजल गुप्ता, कल्पना तिवारी, अनामिका राजपूत, राहुल कुमार, प्रियांशी, सूर्यकांत पाण्डेय, निशा यादव, रिषम यादव और साक्षी गोविन्दानी शामिल रहे।


विधि, चिकित्सा, शिक्षा और प्रबंधन के पाठ्यक्रमों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। एलएल.बी. में सोनू मंगल, एमबीबीएस में हनी मन, बीएड में श्रृष्टि सिंह और बीबीए में हरगुन कौर को कुलाधिपति कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।


विकास परियोजनाओं का हुआ लोकार्पण

31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली ‘वॉल ऑफ फेम’, नारायण बाग कृषि फार्म स्थित पॉली हाउस और फूड टेक्नोलॉजी भवन के विस्तारीकरण कार्य का लोकार्पण किया। इसके बाद उन्होंने गांधी सभागार में आयोजित बुंदेलखंड गौरव कला दीर्घा, स्टार्टअप प्रदर्शनी, चित्रकला स्टॉल और आंगनबाड़ी वीथिका का निरीक्षण किया। राज्यपाल ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों के नवाचारी एवं रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।


आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट, अधिकारियों को प्रमाण पत्र

छोटे बच्चों के सर्वांगीण विकास में योगदान के लिए 10 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आंगनबाड़ी किट प्रदान की गई। वहीं स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान के तहत एचपीवी वैक्सीन अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जिलाधिकारी, सीडीओ और पुलिस अधिकारियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की विभिन्न अकादमिक, शोध एवं छात्र-केंद्रित पत्रिकाओं का भी विमोचन किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई नई पहल और सुविधाओं को भी सामने रखा गया।


दीक्षोत्सव में संस्कार और संस्कृति का संगम

31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर और उन्नत भारत अभियान के तहत गोद लिए गए गांवों में 15 दिवसीय ‘दीक्षोत्सव पखवाड़ा’ आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और ग्रामीण युवाओं को भारतीय संस्कार, संस्कृति, कला और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना रहा। पखवाड़े के दौरान विश्वविद्यालय परिसर और गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सामाजिक अभियानों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों में उत्साह के साथ भाग लिया।


क्या है पिचवाई चित्रकला?

समारोह में राजस्थान के भीलवाड़ा की प्रसिद्ध पिचवाई चित्रकला का भी विशेष उल्लेख रहा। पिचवाई राजस्थान की पारंपरिक धार्मिक चित्रकला और वस्त्र-कला है, जिसका प्रमुख संबंध नाथद्वारा से माना जाता है। इसमें कपड़े पर हाथ से धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों से जुड़े चित्र बनाए जाते हैं। पिचवाई चित्रों में श्रीनाथजी, भगवान कृष्ण, रासलीला, गोपियां, कमल, गायों, उत्सव और ऋतुओं से जुड़े दृश्य प्रमुखता से दिखाई देते हैं। पारंपरिक चित्रों में प्राकृतिक एवं खनिज रंगों के साथ सोने का प्रयोग भी किया जाता है।


दिनेश सोनी को डी.लिट. की मानद उपाधि

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में राजस्थान के भीलवाड़ा की प्रसिद्ध पिचवाई चित्रकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुप्रसिद्ध कलाकार दिनेश सोनी को डी.लिट. की मानद उपाधि प्रदान की गई।


मानद उपाधि मिलने पर दिनेश सोनी ने कहा कि वीरभूमि झांसी में इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करना उनके लिए गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से कलाकारों को नई पहचान और अवसर मिल रहे हैं।


उन्होंने पारंपरिक कला और कलाकारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए आभार भी व्यक्त किया। इस तरह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का 31वां दीक्षांत समारोह शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचार, संस्कृति, कला और सामाजिक सरोकारों के संगम के रूप में सामने आया।

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