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Jhansi News: "कान्हा गौ-वन" नीति लागू करने का रखा प्रस्ताव, मुख्यमंत्री से मुलाकात की समय की मांग
Jhansi News: झांसी में "कान्हा गौ-वन" नीति लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय की मांग की गई है। प्रस्ताव का उद्देश्य गौ संरक्षण के साथ पर्यावरण और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।
Jhansi News(Photo-Social Media)
Jhansi News: उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद में पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यकर्ता नरेन्द्र कुशवाहा (Narendra Kushwaha) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रस्तावित दौरे के दौरान एक महत्वपूर्ण जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषय पर मुलाकात का समय मांगा है। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी (District Magistrate) को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री से भेंट कराने का अनुरोध किया है। नरेन्द्र कुशवाहा का कहना है कि वह मुख्यमंत्री के समक्ष एक नीतिगत प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहते हैं, जो जलस्रोत संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और गौसंरक्षण को एक साथ बढ़ावा देने का कार्य कर सकता है।
"कान्हा गौ-वन" विकसित करने का रखा प्रस्ताव
नरेन्द्र कुशवाहा द्वारा तैयार किए गए ज्ञापन में प्रदेश के नगरीय और अर्द्ध-नगरीय क्षेत्रों में स्थित नदियों, झीलों, तालाबों और उनके फीडर चैनलों के संरक्षण के लिए निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र (No-Construction Zone) निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन संरक्षित क्षेत्रों में "कान्हा गौ-वन" (Kanha Gau-Van) विकसित किए जाएं, जहां बेसहारा गौवंश को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक चारा और स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सके।
अतिक्रमण और शहरीकरण से घट रहे प्राकृतिक क्षेत्र
ज्ञापन में कहा गया है कि अनियोजित शहरीकरण और लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण जलस्रोतों के आसपास मौजूद प्राकृतिक हरित क्षेत्र और चारागाह भूमि तेजी से समाप्त हो रही है। इसके चलते बड़ी संख्या में बेसहारा गौवंश भोजन और पानी की तलाश में सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि पर्याप्त चारे और स्वच्छ पानी की उपलब्धता न होने के कारण गौवंश घरेलू कचरा, खाद्य अवशेष, पॉलीथीन, प्लास्टिक और अन्य हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। इससे हर वर्ष बड़ी संख्या में गौवंश असमय मृत्यु का शिकार हो रहे हैं।
जलस्रोतों के आसपास निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने का सुझाव
प्रस्ताव के अनुसार नदियों के दोनों किनारों से 200 मीटर क्षेत्र, झीलों के चारों ओर 100 मीटर क्षेत्र तथा तालाबों एवं अन्य छोटे जलस्रोतों के चारों ओर 50 मीटर क्षेत्र को निर्माण प्रतिबंधित घोषित किया जाए। इन क्षेत्रों में स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएं, नेपियर घास (Napier Grass) और अन्य पौष्टिक चारा घासों का विकास किया जाए। साथ ही प्राकृतिक जलभराव क्षेत्रों को संरक्षित कर वहां पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की व्यवस्था की जाए।
गौसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
नरेन्द्र कुशवाहा का कहना है कि यदि इन संरक्षित क्षेत्रों को "कान्हा गौ-वन" के रूप में विकसित किया जाता है तो बेसहारा गौवंश को स्वच्छ जल, पर्याप्त चारा और सुरक्षित प्राकृतिक आश्रय उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह मॉडल केवल गौसंरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जलस्रोत संरक्षण, भूजल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और अतिक्रमण रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री के समक्ष सीधे प्रस्ताव रखने की इच्छा
नरेन्द्र कुशवाहा ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री के झांसी आगमन के दौरान उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेंट करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह इस जनहितकारी प्रस्ताव को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रख सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इस मॉडल को प्रदेश स्तर पर लागू किया जाता है तो यह पर्यावरण संरक्षण और गौसंरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।


