बच्ची से लगे छेड़छाड़ के आरोप तो थाने में ही फांसी पर झूल गया पुजारी, SSP ने दिए जांच के आदेश

Jhansi Priest Custodial Suicide: झांसी के गुरसरांय थाने में पॉक्सो और छेड़छाड़ के आरोपी 62 वर्षीय पुजारी राजेंद्र प्रसाद दुबे की मौत हो गई। बेटे ने झूठे मुकदमे में फंसाने और दो लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 11 Aug 2026 9:08 AM IST
Jhansi Priest Custodial Suicide
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Jhansi Priest Custodial Suicide: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झांसी (Jhansi) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पॉक्सो (POCSO) और छेड़छाड़ के आरोपी 62 साल के पुजारी राजेंद्र प्रसाद दुबे ने सोमवार को गुरसरांय थाने (Gursarai Police Station) में आत्महत्या कर ली।

उन्हें 9 साल की बच्ची से छेड़खानी के आरोप में रविवार को पुलिस हिरासत में लेकर थाने लाया गया था। रातभर पूछताछ के बाद सोमवार सुबह वह बाथरूम गए, जहां पुलिसकर्मियों ने उन्हें गंभीर हालत में देखा। उन्हें इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज (Jhansi Medical College) ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी ग्रामीण डॉक्टर अरविंद कुमार और सीओ पीयूष पांडेय गुरसरांय थाने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। वहीं, एसएसपी ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं।

9 साल की बच्ची से छेड़खानी का था आरोप

पुलिस के मुताबिक, गुरसरांय थाना क्षेत्र के सिंगार गांव के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद दुबे मंदिर के पुजारी थे। उनके खिलाफ 9 साल की बच्ची से छेड़खानी का मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में पुलिस ने रविवार को उन्हें हिरासत में लिया था और थाने लाकर रातभर पूछताछ की गई थी।

सोमवार सुबह करीब छह बजे राजेंद्र प्रसाद बाथरूम गए थे। काफी देर तक जब वह बाहर नहीं आए तो पुलिसकर्मियों को शक हुआ। इसके बाद अंदर देखा गया तो वह बाथरूम में लुंगी के सहारे फंदे पर लटके मिले। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की।

मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई मौत

झांसी मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉक्टर सचिन माहुर ने बताया कि सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे पुलिस राजेंद्र नाम के व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज लेकर आई थी। डॉक्टर के मुताबिक, जानकारी मिली थी कि उन्होंने थाने में आत्महत्या की कोशिश की थी और उनके गले पर फंदे के निशान मिले थे।

राजेंद्र प्रसाद का इलाज शुरू किया गया, लेकिन करीब साढ़े दस बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

वहीं, एसएसपी ने बताया कि थाना परिसर के टॉयलेट में पॉक्सो और छेड़छाड़ के आरोपी ने आत्महत्या की थी। पुलिस उसे इलाज के लिए झांसी लेकर आई थी, जहां उसकी मौत हो गई। मामले की जांच के लिए एसपी ग्रामीण को निर्देश दिए गए हैं और उनसे रिपोर्ट मांगी गई है।

बेटे ने लगाया झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप

राजेंद्र प्रसाद के बेटे विनय दुबे ने पिता को झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। विनय का कहना है कि गांव के कुछ लोग उनके परिवार को वहां से हटाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को झूठे मामले में फंसाया गया था और वह इस दबाव को सहन नहीं कर सके।

विनय ने इस मामले में दो लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराया है। पुलिस अब इन आरोपों की भी जांच कर रही है।

विनय का कहना है कि गांव के कुछ लोग उनके परिवार को मंदिर से हटाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के दो घर हैं। एक घर में परिवार के लोग रहते हैं, जबकि दूसरे घर में जानवर बांधे जाते हैं।

गांव में तनाव, पीएसी तैनात

थाने में पुजारी की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद गांव में भी तनाव की स्थिति बन गई, जिसके चलते आनन-फानन में पीएसी (PAC) को बुलाया गया। हालांकि, दिन में गांव की स्थिति सामान्य बताई गई। पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले पर नजर रखी जा रही है।

एसएसपी ने दिए जांच के निर्देश

थाने के अंदर आरोपी की मौत के मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। एसएसपी ने एसपी ग्रामीण डॉक्टर अरविंद कुमार को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में थाने में राजेंद्र प्रसाद के रहने से लेकर उनकी मौत तक की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।

वहीं, मृतक के बेटे की ओर से लगाए गए झूठे मुकदमे में फंसाने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। अब पुलिस की जांच से ही यह साफ होगा कि घटना के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और विनय दुबे की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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