Jhansi News: पुलिस कॉलोनी: गंदगी के बीच रहने को मजबूर पुलिस परिवार

Jhansi News: झांसी की सिविल लाइंस पुलिस कॉलोनी में पुलिसकर्मी और उनके परिवार गंदगी, जर्जर भवनों, खराब सड़क और नालियों जैसी बुनियादी समस्याओं के बीच रहने को मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है, जिससे लोगों में नाराजगी है।

Gaurav kushwaha
Published on: 27 Jun 2026 9:33 PM IST
Jhansi News: पुलिस कॉलोनी: गंदगी के बीच रहने को मजबूर पुलिस परिवार
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Jhansi News: आम लोगों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी और उनके परिवार किन हालात में जीवनयापन कर रहे हैं, इस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। यदि कोई सिविल लाइंस स्थित पुलिस कॉलोनी का दौरा करे, तो वहां की स्थिति देखकर यही कहा जाएगा—आखिर पुलिसकर्मी ऐसे हालात में कैसे रह रहे हैं?कॉलोनी में रहने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार, समस्याओं की शिकायत करने के बावजूद कई बार अधिकारी नाराज हो जाते हैं, जिसके चलते लोग खुलकर अपनी परेशानियां नहीं बता पाते। नतीजतन, कॉलोनी की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। वहीं, जांच के नाम पर कर्मचारियों को परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है, जिससे पुलिस महकमे में आक्रोश देखा जा रहा है।

जर्जर हालत में पुलिस कॉलोनी

झांसी पुलिस कॉलोनी की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। यहां वर्षों से न सड़क बनी है और न ही नालियों की उचित व्यवस्था है। सरकारी आवासों की हालत भी जर्जर है। सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है, जिससे यहां रहने वाले पुलिस परिवार परेशान हैं। कई बार नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।विभिन्न थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए इस कॉलोनी और थानों के पीछे सरकारी आवास बनाए गए हैं, जहां सैकड़ों परिवार रहते हैं। बच्चों के लिए पार्क और खेल सुविधाएं भी नहीं हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

गंदगी और अव्यवस्था का माहौल

कॉलोनी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। आवासों के आसपास और बीच में भारी मात्रा में गंदगी फैली रहती है, जिससे लोग खिड़कियां तक खोलने से बचते हैं। आम रास्तों पर गंदा पानी जमा होने के कारण बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।सीवर लाइन के चैंबर भी ओवरफ्लो होकर बह रहे हैं, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवासों में किचन तक की उचित व्यवस्था नहीं है। कई लोग टिन, तिरपाल या पन्नी लगाकर बालकनी में खाना बनाने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में उनका सामान खराब हो जाता है।

किरन के अनुसार, “कॉलोनी में रहते हुए चार साल हो गए हैं, लेकिन गंदगी बहुत रहती है। कई आवासों में किचन नहीं है, इसलिए बालकनी में खाना बनाना पड़ता है।”मंजू ने बताया, “नालियां करीब दो साल से चोक हैं। लोग खुद ही निजी सफाई कर्मियों को बुलाकर सफाई कराते हैं, लेकिन गंदगी फिर फैल जाती है।”ममता के अनुसार, “कॉलोनी के बाहर गंदा पानी जमा रहता है, जिससे बच्चों के गिरने का डर बना रहता है। बुजुर्ग बाहर निकलने से बचते हैं।”निशा का कहना है, “किचन की सुविधा नहीं है। कई बार कमरे या बालकनी में ही खाना बनाना पड़ता है। बारिश में काफी परेशानी होती है।”प्राची ने कहा, “बाहरी दीवारों पर पेड़ उग आए हैं और कॉलोनी जर्जर हालत में है। लोग मेहमान बुलाने से भी कतराते हैं।”स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कॉलोनी में मेंटेनेंस के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। जांच और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

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