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Jhansi : कृषि विश्वविद्यालय में सीहोर के किसानों को वैज्ञानिक दुग्ध उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण मिला
Jhansi News: तीन दिवसीय प्रशिक्षण में वैज्ञानिक पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, चारा प्रबंधन और एकीकृत कृषि प्रणाली की जानकारी दी गई।
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Jhansi News: रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के विभिन्न ग्रामों से आए 25 किसानों के लिए आयोजित तीन दिवसीय “सतत् आजीविका हेतु वैज्ञानिक दुग्ध उत्पादन” प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।समापन समारोह में वर्चुअल माध्यम से जुड़े केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन को भी आजीविका का मजबूत आधार बनाना होगा। वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का पालन, बेहतर पोषण और उन्नत नस्लों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
श्रीचौहान ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय झांसी शिक्षा के साथ किसानों को प्रशिक्षण देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रशिक्षण के आयोजन के लिए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। किसान प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अपने पशुपालन में लागू करें और दूसरे किसानों तक भी इसकी जानकारी पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि पशुपालन को व्यवसाय के रूप में विकसित कर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
किसानों को बेहतर से बेहतर वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण निश्चित रूप से किसानों की सतत् आजीविका और आय बढ़ाने में उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने प्रशिक्षण से जुड़े 17 संस्थानों एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए किसानों से देश में दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
वर्चुअल माध्यम से जुड़े कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल तीन दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। किसान विश्वविद्यालय से निरंतर जुड़े रहें और वैज्ञानिकों से नई-नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करते रहें। उन्होंने किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली और कृषि वानिकी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डेयरी के साथ कृषि की अन्य गतिविधियों को जोड़कर किसान अपनी लागत कम करने और आय के नए स्रोत विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं।
सीहोर के किसानों और विश्वविद्यालय के बीच शुरू हुआ नया संबंधः कुलपति
कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि सीहोर के किसानों और विश्वविद्यालय के बीच यह एक नए संबंध की शुरुआत है। प्रशिक्षण समाप्त हुआ है, लेकिन किसानों के साथ विश्वविद्यालय का जुड़ाव आगे भी निरंतर बना रहेगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, उन्नत पशु नस्लों, पशु स्वास्थ्य एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी देने के साथ विश्वविद्यालय की एकीकृत कृषि प्रणाली और शहद उत्पादन इकाई का भ्रमण कराया गया। किसान एक एकड़ क्षेत्र में एकीकृत कृषि प्रणाली विकसित कर विभिन्न कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़कर 5 से 6 लाख रुपये तक वार्षिक आय प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। कुलपति ने किसानों से प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को अपने गांवों में लागू करने तथा अन्य किसानों तक भी पहुंचाने का आह्वान किया।
वैज्ञानिक पशुपालन की दी गई व्यावहारिक जानकारी
प्रशिक्षण संयोजक एवं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बताया कि तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में किसानों को भारत की प्रमुख दुधारू पशु नस्लों, वैज्ञानिक प्रजनन प्रबंधन, पशु आवास एवं स्वच्छता, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, संतुलित आहार एवं पोषण प्रबंधन, टीकाकरण, कृमिनाशन, संक्रामक एवं वाहक-जनित रोगों की पहचान एवं नियंत्रण तथा नवजात बछड़ों की वैज्ञानिक देखभाल की जानकारी दी गई। किसानों को पशुधन प्रक्षेत्र का भ्रमण कराकर विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया। अंतिम तकनीकी सत्र में भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी के प्रक्षेत्र में चारा उत्पादन तथा विश्वविद्यालय की एकीकृत कृषि प्रणाली का भ्रमण कराया गया।
प्रशिक्षण से मिला उपयोगी ज्ञान, किसानों ने साझा किया अनुभव
प्रशिक्षणार्थी किसान दिनेश पेठा, विशाल मेहरा, सीताराम चौधरी एवं कैलाश धावरे ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया प्रशिक्षण किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्हें उन्नत पशु नस्लों, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुओं के वैज्ञानिक रखरखाव और स्वच्छ दूध उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। किसानों ने कहा कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने पशुपालन कार्य में लागू करेंगे। समापन अवसर पर कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने प्रशिक्षणार्थी किसानों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में निदेशक शिक्षा डॉ अनिल कुमार, कृषि अधिष्ठाता डॉ आरके सिंह, अधिष्ठाता उद्यानिकी एवं वानिकी की डॉ मनीष श्रीवास्तव, कुलसचिव डॉ एसएस कुशवाहा सहित वैज्ञानिक, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकिता रौतेला ने किया। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय एवं मात्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. प्रमोद कुमार पाण्डेय ने अतिथियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं किसानों का आभार व्यक्त किया।


