Jhansi News: 10 जुलाई से शुरू होगा मशरूम सर्टिफिकेट कोर्स का पांचवां बैच

Jhansi News: 6 जुलाई को होगा पंजीकरण। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में विशेषज्ञ देंगे वैज्ञानिक प्रशिक्षण, जिससे किसान, युवा और महिलाएं मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक कौशल सीख सकेंगे।

Gaurav kushwaha
Published on: 3 July 2026 10:35 PM IST
Fifth batch of mushroom certificate course to start from 10 July
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10 जुलाई से शुरू होगा मशरूम सर्टिफिकेट कोर्स का पांचवां बैच (Photo- Newstrack)

Jhansi News: रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने एवं किसानों, युवाओं, महिलाओं तथा इच्छुक उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मशरूम सर्टिफिकेट कोर्स का पाँचवाँ बैच 10 जुलाई 2026 से प्रारंभ किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी 6 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में उपस्थित होकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

मशरूम उत्पादन आय बढ़ाने का एक प्रभावी एवं लाभकारी कृषि-उद्यम

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में मशरूम उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी एवं लाभकारी कृषि-उद्यम बनकर उभरा है। कम भूमि, सीमित पानी और कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय विशेष रूप से बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। कृषि अपशिष्टों के उपयोग से होने वाला मशरूम उत्पादन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की संपूर्ण वैज्ञानिक तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें शुद्ध कल्चर एवं स्पॉन उत्पादन, सब्सट्रेट की तैयारी, बैग भरने की तकनीक, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन, रोग एवं संक्रमण नियंत्रण, फसल की कटाई, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन की आधुनिक जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही प्रतिभागियों को सफल उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक व्यावसायिक मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय बढ़ाने वाले वैकल्पिक कृषि उद्यम अपनाने की आवश्यकता है। मशरूम उत्पादन कम संसाधनों में अधिक लाभ देने वाला मॉडल है, जो ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

शिक्षा निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित प्रशिक्षण ही सफलता की कुंजी है। विश्वविद्यालय का यह सर्टिफिकेट कोर्स प्रतिभागियों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान करेगा, इससे वे सफल मशरूम उद्यमी बन सकें।

प्रशिक्षण की उपयोगिता किसानों की सफलता

मशरूम वैज्ञानिक डॉ. शुभा त्रिवेदी ने बताया कि मशरूम उत्पादन में गुणवत्ता युक्त स्पॉन, स्वच्छता, नियंत्रित तापमान तथा उचित आर्द्रता का विशेष महत्व होता है। यदि वैज्ञानिक तकनीकों का पालन किया जाए तो कम निवेश में अच्छा उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। विश्वविद्यालय द्वारा प्रशिक्षित किसानों की सफलता इस प्रशिक्षण की उपयोगिता को प्रमाणित करती है।

ग्राम नगरा के किसान नीरज श्रीवास, निखिल चक्रवर्ती तथा भान सिंह कुशवाहा जैसे अनेक किसानों ने मशरूम उत्पादन अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और आज वे अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं स्वरोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे 6 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय पहुँचकर अपना पंजीकरण कराएं तथा 10 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने वाले मशरूम सर्टिफिकेट कोर्स का लाभ उठाकर आधुनिक कृषि उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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