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Jhansi News: जिले में स्मार्ट सिटी विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई
Jhansi News: झांसी में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विकास कार्यों, सुविधाओं और नागरिकों की समस्याओं पर एक नजर।
Jhansi News(Photo-Social Media)
Jhansi News: उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद के नरेन्द्र कुशवाहा (पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यकर्ता) ने नागरिकों से लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों के आधार पर झांसी शहर के कई वार्डों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अनेक स्थानों पर जाम नालियाँ, सड़कों पर बहता गंदा पानी, गंदगी के ढेर, बदबू, बड़े-बड़े गड्ढे तथा अधूरे विकास कार्य देखने को मिले। जमीनी हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि झांसी स्मार्ट सिटी और नगर निगम के दावों तथा वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है। बरसात हो या सामान्य दिन, सड़कों पर बहता नालियों का पानी और जगह-जगह जमा गंदगी राहगीरों, वाहन चालकों एवं स्थानीय निवासियों के लिए दुर्घटनाओं और बीमारियों का कारण बन रही है। जनता परेशान है, रास्ते बदहाल हैं, लेकिन शिकायतों और आश्वासनों के बीच समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं।
इसका पहला उदाहरण वार्ड संख्या 39, दतिया गेट बाहर स्थित नाले का बाग क्षेत्र में अजयपार बाबा मंदिर के पास की मुख्य नाली है, जो लंबे समय से चोक पड़ी हुई है। नाली का गंदा पानी और कीचड़ सड़क पर बह रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों एवं मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में शिकायत संख्या 13561350 दर्ज कराई गई थी। शिकायत संबंधित विभाग को भेजे जाने की सूचना भी दी गई, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार आज तक मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
दूसरा उदाहरण वार्ड संख्या 31, मकान संख्या 261, लहर गिर्द (खोड़न) का है, जहाँ घर के सामने नाली में भरी गंदगी और उगी हुई घास हटाने के लिए शिकायत संख्या 13562175 दर्ज की गई थी। शिकायत दर्ज होने के अगले ही दिन बिना कार्य कराए उसका निस्तारण दिखाकर बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा वास्तविक स्थिति के फोटो भेजने के बाद शिकायत पुनः खोली गई, लेकिन आज भी नाली की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता के अनुसार न तो कोई कर्मचारी मौके पर पहुँचा और न ही सफाई कार्य कराया गया।
इन दोनों मामलों से यह गंभीर प्रश्न उठता है कि क्या नगर निगम की शिकायतों का निस्तारण वास्तव में धरातल पर हो रहा है या केवल कंप्यूटर और कागजों में? यदि शिकायतों का समाधान केवल रिकॉर्ड में दिखाया जाएगा और मौके पर सत्यापन नहीं होगा, तो स्मार्ट सिटी की शिकायत व्यवस्था जनता का विश्वास खो देगी।
शहर में विकास कार्यों के नाम पर सड़कें बार-बार खोदी जाती हैं, फिर बनाई जाती हैं और कुछ समय बाद दोबारा खोद दी जाती हैं। कहीं नालियाँ जाम हैं, कहीं गंदगी का अंबार है और कहीं शिकायतों का निस्तारण केवल फाइलों में हो रहा है। ऐसा लगता है मानो स्मार्ट सिटी का अर्थ ही बदल गया हो "सुंदर को बदसूरत बनाना और बदसूरत को विकास बताना।"
झांसी के नागरिकों से अपील है कि वे अपने वार्ड, मोहल्ले और शहर की समस्याओं के प्रति जागरूक रहें तथा जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही सुनिश्चित कराएँ। अन्यथा माशाल्लाह... बदबू सहिए, गड्ढों में हिचकोले खाइए, जाम नालियों का पानी झेलिए, कागजी निस्तारण देखिए और मुस्कराते हुए गुनगुनाइए


