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Jhansi News: समय पर खरपतवार प्रबंधन से मूंगफली की उपज में होगी उल्लेखनीय वृद्धि: कृषि वैज्ञानिक
Jhansi News: झांसी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुमार तिवारी ने मूंगफली किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। इससे उपज और गुणवत्ता में बढ़ोतरी हो सकती है।
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Jhansi News: रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुमार तिवारी ने बुंदेलखंड क्षेत्र के मूंगफली उत्पादक किसानों को फसल में समय पर खरपतवार नियंत्रण एवं समुचित फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में क्षेत्र में बोई गई मूंगफली की फसल लगभग 20 से 25 दिन की अवस्था में है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में वर्षा के बीच लंबा शुष्क अंतराल रहने की संभावना है। ऐसे समय में खरपतवारों की वृद्धि तेजी से होती है, जिससे वे फसल के साथ पोषक तत्वों, नमी, आर्द्रता तथा प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
डॉ. तिवारी ने बताया कि मूंगफली की फसल में 25 से 30 दिन की अवस्था खरपतवार प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस अवस्था में किसानों को खरपतवार प्रबंधन हेतु इमाज़ेथापायर 10 प्रतिशत घोल का डेढ़ मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। प्रति हेक्टेयर 500 से 750 लीटर पानी का उपयोग करें, जिससे खरपतवारों पर दवा का समान रूप से आवरण हो सके।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि दवा का छिड़काव धूप वाले दिन दोपहर बाद तीन बजे से शाम पाँच बजे के बीच करें। छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी एवं अनुकूल आर्द्रता बनी हो तथा अगले कुछ घंटों तक वर्षा की संभावना न हो। अत्यधिक शुष्क अथवा अत्यधिक आर्द्र मौसम में छिड़काव से बचें, ताकि खरपतवारनाशी का प्रभाव अधिकतम हो सके।
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि फसल की 40 दिन की अवस्था पर एक बार गुड़ाई कर पौधों के चारों ओर मिट्टी अवश्य चढ़ाएं। इससे मिट्टी का वायु संचार बेहतर होगा, पौधों की फलियाँ बनने की प्रक्रिया सुचारु रहेगी, नमी का संरक्षण होगा, मिट्टी में उपयुक्त आर्द्रता बनाए रखने में सहायता मिलेगी तथा खरपतवार नियंत्रण में भी लाभ मिलेगा। डॉ. तिवारी ने कहा कि यदि किसान समय पर खरपतवार नियंत्रण एवं वैज्ञानिक फसल प्रबंधन अपनाते हैं तो मूंगफली की उपज के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती हैं।


