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Jhansi News: रोनिजा बनेगा कृषि वानिकी मॉडल ग्राम, उन्नत तकनीक और संसाधनों से जोड़ेगा विश्वविद्यालय
Jhansi News: झांसी के रोनिजा गांव को कृषि वानिकी मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। विश्वविद्यालय किसानों को उन्नत तकनीक, आधुनिक संसाधन और वैज्ञानिक खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।
Jhansi News(Photo-Social Media)
Jhansi News: रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह के निर्देशन में खरीफ सीजन-2026 के अंतर्गत प्रथम पंक्ति प्रदर्शन (एफएलडी), किसान प्रशिक्षण एवं कृषक सामग्री मुहैया कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी है। इसी क्रम में जनपद झाँसी के बड़ागांव विकासखंड के ग्राम रोनिजा में "कृषि वानिकी की उन्नत तकनीक" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया।
कार्यक्रम में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष श्रीवास्तव, वानिकी विभागाध्यक्ष एवं सह-अधिष्ठाता डॉ. एमजे डोबरियाल तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रभात तिवारी ने चयनित किसानों को उन्नत कृषि वानिकी उपकरण एवं शेडनेट मुहैया कराये। वैज्ञानिकों ने ग्राम में स्थापित मीलिया एवं कदम्ब आधारित कृषि वानिकी मॉडलों का भी अवलोकन किया।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से रोनिजा को एक आदर्श "कृषि वानिकी मॉडल ग्राम" के रूप में विकसित करना है। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने कहा कि "विश्वविद्यालय पिछले तीन वर्षों से इस गांव में किसानों को नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक कृषि सामग्री मुहैया करा रहा है। आज यहां लगाए गए कृषि वानिकी पौधे अच्छी तरह विकसित हो चुके हैं, जो इस प्रयास की सफलता का प्रमाण हैं। अब समय आ गया है कि इस मॉडल को अन्य विकासखंडों के नए गांवों तक भी पहुंचाया जाए।"
उन्होंने वैज्ञानिकों से इस मॉडल की सफलता के आधार पर दूसरे ब्लॉकों में नए गांवों का चयन करने का आह्वान किया। किसानों से संवाद करते हुए उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान भी सुझाए। उपस्थित किसानों ने बताया कि लगभग 20 वर्ष पूर्व गांव में अरहर की खेती व्यापक स्तर पर होती थी, लेकिन अन्ना पशुओं, पानी की कमी एवं अन्य कारणों से इसकी खेती लगभग बंद हो गई। इस पर डॉ. सिंह ने किसानों को सलाह दी कि वर्तमान में उपलब्ध लगभग 135 दिन में तैयार होने वाली उन्नत अरहर किस्मों को अपनाकर वर्षा ऋतु में बुवाई करें। इससे समय पर अरहर की फसल लेने के बाद उसी खेत में गेहूं की खेती भी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि "एक ही खेत से दलहन और गेहूं दोनों का उत्पादन लेकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। साथ ही कृषि वानिकी एवं दुग्ध उत्पादन को अपनाकर सतत् एवं स्थायी आय सुनिश्चित की जा सकती है।" उन्होंने यह भी बताया कि रोनिजा की पथरीली, ढालदार एवं कम उपजाऊ भूमि कृषि वानिकी के लिए अत्यंत उपयुक्त है। ऐसी भूमि पर वानिकी, फलदार वृक्ष तथा अन्य फसलों के समन्वित मॉडल अपनाकर किसान अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।
उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने कहा, "कृषि वानिकी केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि खेती, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय वृद्धि का वैज्ञानिक मॉडल है। वृक्षों के साथ फसलों का समन्वय प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करता है तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार सिद्ध होता है। विश्वविद्यालय किसानों को नवीन तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।"
वानिकी विभागाध्यक्ष एवं सह-अधिष्ठाता डॉ. एमजे डोबरियाल ने कहा, "रोनिजा में विकसित कृषि वानिकी मॉडल आने वाले समय में पूरे बुंदेलखंड के किसानों के लिए प्रेरणा बनेगा। मीलिया, कदम्ब एवं अन्य बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों के साथ कृषि फसलों का समन्वय किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा। वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान कम उपजाऊ भूमि से भी बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त कर सकते हैं।"
कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रभात तिवारी ने बताया, "इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों को कृषि वानिकी की उन्नत तकनीकों, पौध प्रबंधन, वैज्ञानिक रोपण, संरक्षण उपायों तथा आय बढ़ाने वाले मॉडल की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि वैज्ञानिक तकनीकें सीधे किसानों के खेत तक पहुंचें और उनका लाभ प्रत्येक किसान को मिले।" प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। किसानों ने विश्वविद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र की कृषि को नई दिशा देने वाला कदम बताया।


