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Jhansi News : संजय वर्मा फायरिंग कांड: ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष पर लगे आरोप फिर चर्चा में
Jhansi News : संजय वर्मा फायरिंग कांड में उम्रकैद के फैसले के बाद ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष पर लगे आरोप फिर चर्चा में आए।
Jhansi Sanjay Verma Firing Case
Jhansi News : वर्ष 2018 के चर्चित संजय वर्मा फायरिंग प्रकरण में विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत द्वारा आठ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मुकदमे की पैरवी को लेकर एक पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया है। मामले में वादी पक्ष का दावा है कि ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर शिकायतें की गई थीं, जिसके बाद तत्कालीन डीजीसी क्राइम और सहायक शासकीय अधिवक्ता को मुकदमे की पैरवी से हटा दिया गया था।
जानकारी के अनुसार, संजय वर्मा के पुत्र एवं मुकदमे के वादी संचित वर्मा ने 5 मई 2023 को जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि डीजीसी क्राइम और सहायक शासकीय अधिवक्ता अभियोजन पक्ष को अपेक्षित सहयोग नहीं दे रहे हैं तथा उनके आचरण और कार्यशैली से आरोपियों को लाभ पहुंचने की आशंका है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि कुछ निजी लाभ की मांग की गई और मुकदमे में प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है। संचित वर्मा ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली से अभियुक्तों को फायदा पहुंच रहा है और इससे मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
बताया जाता है कि शिकायत के बाद प्रशासन स्तर पर मामले का संज्ञान लिया गया और संबंधित डीजीसी क्राइम तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता को इस मुकदमे की पैरवी से अलग कर दिया गया। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पंचाल को मुकदमे की पैरवी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
वादी पक्ष का यह भी कहना है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने स्तर पर एक निजी अधिवक्ता को भी खड़ा किया था, जिसने मामले की प्रभावी पैरवी की। वादी पक्ष का दावा है कि इसी संयुक्त प्रयास के चलते अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
हालांकि, हाल ही में फैसला आने के बाद मीडिया में दिए गए कुछ बयानों को लेकर वादी पक्ष ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि मुकदमे की वास्तविक पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया में योगदान देने वाले पक्षों को उचित श्रेय मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हुए इस बहुचर्चित फायरिंग कांड में संजय वर्मा पर जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें उनके अंगरक्षक की मृत्यु हो गई थी। लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने हाल ही में मामले के आठ आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।


