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Jhansi News: महिलाओं और छात्राओं ने दिखाई उद्यमिता की राह, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं
Jhansi News: चिरगांव के जरियाई गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं एलईडी बल्ब बना रही हैं, वहीं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की छात्राएं पारंपरिक कला को स्वरोजगार से जोड़ रही हैं।
महिलाओं और छात्राओं ने दिखाई उद्यमिता की राह, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं (Photo- Newstrack)
Jhansi News: झांसी में महिलाओं और छात्राओं ने अपने हुनर और रचनात्मक सोच के दम पर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई में महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं एलईडी बल्ब बनाकर अपनी पहचान बना रही हैं, वहीं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की छात्राएं पारंपरिक कला और क्राफ्ट को उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। दोनों ही पहल महिलाओं और युवाओं के हुनर को रोजगार और स्वरोजगार का माध्यम बनाने की मिसाल पेश कर रही हैं।
महिला स्वयं सहायता समूह एलईडी बल्ब बनाकर बढ़ा रहा आमदनी
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई का जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ रहा है। समूह की महिलाएं करीब डेढ़ साल से एलईडी बल्ब बनाने का काम कर रही हैं। इन बल्बों की बिक्री ग्राम पंचायत के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी की जाती है।
समूह की अध्यक्ष अंजना हैं और इसमें गांव की कुल दस महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाओं ने एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरू करने के लिए दस हजार रुपये की धनराशि जुटाई थी। इसके साथ ही समूह को लोन भी उपलब्ध कराया गया। महिलाओं को एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिलाया गया, जिसके बाद उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाया।
डिमांड के हिसाब से तैयार करती हैं एलईडी बल्ब
समूह की अध्यक्ष अंजना ने बताया कि महिलाओं को रॉ मैटेरियल उपलब्ध कराने में आजीविका मिशन की ओर से मदद की जाती है। समूह की महिलाएं जरूरत और मांग के अनुसार एलईडी बल्ब तैयार करती हैं और उनकी बिक्री भी खुद करती हैं। आजीविका मिशन और प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित प्रदर्शनियों और मेलों में समूह को स्टॉल लगाने का अवसर दिया जाता है। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री करने और उन्हें अधिक लोगों तक पहुंचाने का मौका मिलता है।
छात्राओं ने पारंपरिक कला को उद्यमिता से जोड़ा
दूसरी ओर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बैंकिंग, अर्थशास्त्र एवं वित्त विभाग की छात्राएं आस्था अग्रवाल और रिया कुमारी भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा के जरिए उद्यमिता की नई राह तलाश रही हैं। दोनों छात्राओं ने पारंपरिक कला और क्राफ्ट को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की है। दीपावली के अवसर पर उन्होंने बुंदेलखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और त्योहारों की परंपराओं को दर्शाते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय को हस्तनिर्मित बंधनवार और क्ले आर्ट भेंट की। इन कलाकृतियों के माध्यम से छात्राओं ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया।
कुलपति ने छात्राओं को स्टार्टअप के लिए किया प्रोत्साहित
कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने छात्राओं की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के रचनात्मक प्रयास युवाओं में नवाचार और स्वरोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने छात्राओं को अपने हुनर को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
विभागाध्यक्ष डॉ. शंभूनाथ सिंह ने बताया कि वाणिज्य की छात्राएं होने के बावजूद आस्था और रिया अपनी कला एवं क्राफ्ट के जरिए विभाग को नई पहचान दिला रही हैं। उनका प्रयास बताता है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इस तरह झांसी में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और विश्वविद्यालय की छात्राएं अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


