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Jhansi: विश्व स्तनपान सप्ताह 2026: शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने पर जोर
Jhansi News: विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 के तहत झांसी में जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान, छह माह तक केवल स्तनपान और दो वर्ष तक जारी रखने के महत्व पर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों ने मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान को जरूरी बताया।
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Jhansi News: भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)तथा यूनिसेफ की अनुशंसा के अनुसार . रतनपान जन्म के 1 घंटे के अन्दर शुरु करें, प्रथम छः माह तक सिर्फ स्तनपान ।3. छः माह के बाद उचित अनुपूरक आहार शुरु करें तथा स्तनपान 2 साल या उससे अधिक तक जारी रखें। उचित आहार देने से कुपोषण, ज्यादा वजन , मोटापा तथा टाइप 2 मधुमेह, दिल की बीमारियों तथा कुछ कैंसर का खतरा कम (NCDS) हो जाता है।एक अर्न्तराष्ट्रीय शोध के अनुसार पर्याप्त स्तनपान नहीं करवाने से भारतवर्ष में प्रतिवर्ष 1 लाख शिशुओं की मृत्यु हो जाती है (डायरिया तथा न्यूमोनिया से), जिसे रोका जा सकता है। 3.7 करोड़ डायरिया के केस, 24 लाख न्यूमोनिया तथा 4.382 मोटापे के केस होते हैं।
स्तनपान न करवाने से माताओं पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। प्रतिवर्ष 7000 केस स्तन कैन्सर, 1700 अंडाशय के कैन्सर तथा 87000 टाइप 2 मधुमेह के केस होते हैं। भारत में इसके इलाज पर प्रतिवर्ष 10:605 करोड़ डालर खर्च होते हैं। इतने फायदों के बावजूद भारतवर्ष में स्तनपान की दर कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अगर 'दस कदम' मैटरनिटी अस्पतालों में लागू कर दिये जायें तो स्तनपान की दर बढ़ जायेगी। 58 शोधों के अनुसार, जो मातृत्व एवं शिशुओं की देख-भाल पर 2016 में हुये, यह दिखाते हैं कि 'दस कदम' लागू करने से निम्न फायदे होते हैं: स्तनपान जल्दी शुरु हो जाता है।केवल स्तनपान की दर बढ़ जाती है।स्तनपान लम्बे समय तक जारी रहता है।
सभी चिकित्सालयों में विश्व स्वास्थ्य असेम्बली द्वारा निर्देशित अर्न्तराष्ट्रीय दुग्ध विक्रेताओं पर लागू आई०एम०एस०The TEN STEPS to Successful Breastfeedingएक्ट का पूर्णतः पालन करना।1b सभी चिकित्सालयों द्वारा लिखित रूप से शिशु आहार नीतिका निर्धारण करके सभी स्वास्थ्यकर्मीयों एवं पालकों कोजानकारी प्रदान करना।
1. शिशु के वजन / लम्बाई के डेटा के निरन्तर आंकलन एवंप्रबन्धन की व्यवस्था करना।
2. सभी स्वास्थ्यकर्मीयों को स्तनपान सम्बन्धित ज्ञान, क्षमताएवं कौशल में प्रशिक्षित करना । प्रमुख क्लीनिकल अभ्यास
3. गर्भवती माताओं एवं उनके परिजनों के साथ स्तनपान के महत्व व प्रबन्धन की चर्चा करना।
4. जन्म के तुरन्त बाद माताओं को तुरन्त व लगातार त्वचा से त्वचा स्पर्श करवाने और स्तनपान शुरु करने हेतु प्रेरित करना।
5. स्तनपान शुरु करने, जारी रखने और समस्याओं के निवारण करने में माताओं की मदद करना।
6. अत्यंत विकट स्थिति में चिकित्सक की सलाह के बिना माँ के दूध के अलावा अन्य भोजन व पेय पदार्थ (शहद, पानी आदि) नहीं दिलवाना।
7. यह सुनिश्चित करना कि माँ और शिशु लगातार 24 घण्टे एकही कमरे में साथ-साथ रहें।
8. माताओं को शिशु के भुखे होने के इशारों को पहचानना औरउनके आधार पर निर्णय लेना सिखाना।
9. माताओं को बोतल, चुसनी आदि का प्रयोग से होने वाले'कीनुकसान की जानकारी देना।
10. व्यवस्था रखना की पालक व शिशु की फालोअप के रूप में सतत सेवायें मिलती रहें। भारत में स्तनपान प्रथाओं की स्थिति
वैश्विक और राष्ट्रीय अनुशंसाओं के अनुसार, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना, पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराना और दो साल की उम्र तक और उससे आगे भी उचित पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना आवश्यक हैराष्ट्रीय स्तर पर, स्तनपान की शीघ्र शुरुआत की दर में सुधार होकर 50.1% हो गई है, फिर भी प्रत्येक दो नवजात शिशुओं में से एक जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान से वंचित रह जाता है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में केवल स्तनपान कराने की दर में गिरावट आई है, जो NFHS-5 में 63.7% से घटकर NFHS-6 में 55.8% हो गई है।
इसके अलावा, 6-23 महीने की आयु के केवल 15.3% बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकार्य आहार प्राप्त होता है, जो पूरक आहार में लगातार मौजूद कमियों को उजागर करता है।कई राज्यों में प्रारंभिक स्तनपान में गिरावट दर्ज की गई है, उदाहरण के लिए दिल्ली और ओडिशा, जबकि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और ओडिशा में अनन्य स्तनपान में गिरावट आई है। ये निष्कर्ष स्तनपान संबंधी परामर्श को मजबूत करने, अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार करने, परिवारों को शिशु आहार के वाणिज्यिक प्रचार से बचाने, मातृत्व सुरक्षा का विस्तार करने और मजबूत सामुदायिक सहायता प्रणालियों का निर्माण करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं ताकि प्रत्येक माँ को सफलतापूर्वक स्तनपान कराने के लिए आवश्यक सहायता मिल सके।


