Jio News: जियो ने UP-उत्तराखंड में बदला टेलीकॉम बाजार, एक दशक में जोड़े 7 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स

Jio News: जियो ने एक दशक में यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट में 7.10 करोड़ यूजर्स जोड़े। जून 2026 तक दोनों क्षेत्रों में जियो की 39.8% हिस्सेदारी रही और 38 लाख+ परिसर जुड़े हैं।

Newstrack Network
Published on: 31 Aug 2026 10:43 PM IST
Jio transforms telecom market in UP-Uttarakhand, adding over 7 crore users in a decade
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जियो ने UP-उत्तराखंड में बदला टेलीकॉम बाजार, एक दशक में जोड़े 7 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स (Photo- Social Media)

Lucknow News: रिलायंस जियो ने उत्तर प्रदेश ईस्ट और उत्तर प्रदेश वेस्ट सर्विस एरिया में अपने कमर्शियल लॉन्च के बाद पहले ही दशक में वायरलेस मोबाइल बाजार में बड़ा बदलाव किया है। उत्तर प्रदेश वेस्ट सर्विस एरिया में उत्तराखंड भी शामिल है। जियो 5 सितंबर 2026 को अपने कमर्शियल ऑपरेशन के दस साल पूरे करने जा रहा है।

अगस्त 2016 में जियो के पास कोई मोबाइल सब्सक्राइबर नहीं था। सितंबर 2016 में कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के पहले ही महीने में दोनों सर्विस एरिया में जियो के कुल 17.4 लाख मोबाइल यूज़र्स हो गए थे। जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 7.10 करोड़ पहुंच गई। यानी करीब एक दशक में जियो ने 6.92 करोड़ मोबाइल यूज़र्स की नेट बढ़ोतरी दर्ज की और 46.2 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट हासिल की।

जियो पिछले दशक में यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट दोनों सर्विस एरिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला टेलीकॉम ऑपरेटर बनकर उभरा है। जून 2026 तक दोनों सर्विस एरिया को अलग-अलग और संयुक्त रूप से देखें तो जियो सबसे बड़ा ऑपरेटर है।



दोनों सर्विस एरिया में सबसे बड़ा ऑपरेटर

जून 2026 तक यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट में कुल 17.85 करोड़ वायरलेस मोबाइल कनेक्शन थे। इनमें जियो की हिस्सेदारी करीब 39.8 प्रतिशत है। जियो के पास यूपी ईस्ट में 4.48 करोड़ और यूपी वेस्ट में उत्तराखंड समेत 2.62 करोड़ मोबाइल यूज़र्स हैं।

नेट मोबाइल सब्सक्राइबर जोड़ने के मामले में भी जियो अपने पहले दशक में सबसे आगे रहा है। कंपनी के मुताबिक, दोनों सर्विस एरिया में मोबाइल यूज़र्स की संख्या में हुई यह बढ़ोतरी क्षेत्र के टेलीकॉम बाजार में जियो की तेज पकड़ को दिखाती है।

38 लाख से ज्यादा घरों और परिसरों तक पहुंचा जियो

मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ जियो ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में डिजिटल समावेशन बढ़ाने पर भी जोर दिया है। जून 2026 तक दोनों सर्विस एरिया में 38 लाख से ज्यादा घरों और व्यावसायिक परिसरों को जियो फाइबर और जियो एयर फाइबर सेवाओं से जोड़ा गया है।

यूपी ईस्ट सर्विस एरिया में करीब 19 लाख घरों और व्यावसायिक परिसरों तक ये सेवाएं पहुंच चुकी हैं। वहीं यूपी वेस्ट में भी 19 लाख से ज्यादा परिसरों को जोड़ा गया है। इन सेवाओं के जरिए लोगों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और होम एंटरटेनमेंट की सुविधा मिल रही है। जियो का दावा है कि वह इस क्षेत्र के होम ब्रॉडबैंड सेगमेंट में मार्केट लीडर है।

पिछड़े और दूरदराज इलाकों में भी बढ़ाया नेटवर्क

जियो ने प्रदेश के सुदूरवर्ती और पिछड़े इलाकों में भी अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। बाँदा, श्रावस्ती, चित्रकूट, सोनभद्र और ओबरा जैसे इलाकों में कंपनी ने सघन टावर लगाए हैं। इससे इन क्षेत्रों की बड़ी आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के साथ देश की मुख्यधारा और डिजिटल क्रांति से जुड़ने में मदद मिली है।

सस्ता डेटा और फ्री कॉलिंग बनी बड़ी वजह

जियो की तेज सफलता के पीछे किफायती डेटा और फ्री कॉलिंग की रणनीति को बड़ी वजह माना गया है। जियो के लॉन्च से पहले कॉल रेट और डेटा चार्ज मोबाइल ग्राहकों के लिए बड़ी चिंता थे। कंपनी ने किफायती डेटा और फ्री कॉलिंग की रणनीति के साथ बाजार में प्रवेश किया, जिसके बाद मोबाइल इंटरनेट के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव देखने को मिला।



जियो के मुताबिक, जून 2026 तक पूरे देश में उसके करीब 53.33 करोड़ ग्राहक हैं। इनमें 28.5 करोड़ 5जी ग्राहक शामिल हैं।

एक दशक पहले भारतीय ग्राहक मोबाइल डेटा का इस्तेमाल मेगाबाइट के हिसाब से काफी सोच-समझकर करते थे। आज देश में डेटा की खपत काफी बढ़ चुकी है। इस बदलाव में कनेक्टिविटी को सस्ता बनाने के साथ टेक्नोलॉजी, डिवाइसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में किए गए निवेश की भी बड़ी भूमिका रही है।

एक जीबी डेटा की कीमत करीब 97 प्रतिशत घटी

2016 में भारत में प्रति सब्सक्राइबर औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत 0.2 जीबी से भी कम थी। उस समय एक जीबी डेटा की कीमत करीब 228 रुपये थी। देश में एक करोड़ से भी कम लोगों की पहुंच 4जी नेटवर्क तक थी और औसत डाउनलोड स्पीड करीब 2.5 एमबीपीएस थी।

जियो के आने के बाद टेलीकॉम बाजार में बड़ा बदलाव आया। एक दशक बाद एक जीबी डेटा की कीमत करीब 7.9 रुपये रह गई है, जो 2016 के मुकाबले करीब 97 प्रतिशत कम है। देशभर में एक्टिव 4जी और 5जी सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर करीब 93.8 करोड़ हो गई है।

जियो के नेटवर्क पर एक औसत सब्सक्राइबर अब हर महीने 43.7 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले एक दशक में मोबाइल इंटरनेट के इस्तेमाल का तरीका किस तरह बदला है।



स्वदेशी तकनीक और 5जी नेटवर्क पर जोर

टेलीकॉम नेटवर्क की पिछली पीढ़ियां काफी हद तक इम्पोर्टेड प्रोप्राइटरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर आधारित थीं। इसके चलते ऑपरेटरों को इक्विपमेंट के साथ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और रोडमैप के लिए भी विदेशी वेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता था।

इसके उलट जियो एंड-टू-एंड, क्लाउड-नेटिव स्टैंडअलोन 5जी नेटवर्क विकसित करने में लगातार निवेश कर रहा है। कंपनी का कहना है कि यह नेटवर्क भारत के अलग-अलग इलाकों और यहां के टेरेन के हिसाब से ज्यादा उपयुक्त है।

इस तरह एक दशक में जियो की कहानी सिर्फ मोबाइल ग्राहकों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रही। किफायती डेटा और कॉलिंग से शुरू हुआ बदलाव अब बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी नेटवर्क और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड तक पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी जियो के मोबाइल और ब्रॉडबैंड विस्तार ने बड़ी संख्या में लोगों को डिजिटल कनेक्टिविटी से जोड़ा है।

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