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Kannauj में AIMIM का प्रदर्शन, मस्जिदों के ध्वस्तीकरण पर जताया विरोध
Kannauj News: कन्नौज में AIMIM कार्यकर्ताओं ने मस्जिदों के ध्वस्तीकरण का विरोध करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा और मामले की जांच की मांग की।
Kannauj में AIMIM का प्रदर्शन, मस्जिदों के ध्वस्तीकरण पर जताया विरोध (Photo- Newstrack)
Kannauj News: कन्नौज में आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के बैनर तले मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिद के कथित ध्वस्तीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन पर मुस्लिम समाज को निशाना बनाने और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया। इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया और पूरे मामले की हाईकोर्ट से जांच कराने की मांग की गई।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के विरोध में प्रदर्शन
कन्नौज में आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के बैनर तले मुस्लिम समाज के लोगों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मस्जिदों के विध्वंस के जरिए मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार किया जाए और किसी भी नागरिक के साथ पक्षपात न हो।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश सभी धर्मों और समुदायों का है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को संविधान के मुताबिक काम करना चाहिए और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा
प्रदर्शन के दौरान एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष इशरत जमाॅं खान ने कहा कि एक मस्जिद को असमायिक तरीके से ध्वस्त किए जाने के खिलाफ वह राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से देने आए हैं। उन्होंने इस मामले की हाईकोर्ट द्वारा जांच कराए जाने की मांग की। उनका कहना था कि पूरे मामले में जो अधिकारी वास्तव में दोषी हैं, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए और असंवैधानिक तरीके से की गई कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
इशरत जमा खान ने आरोप लगाया कि जिस मस्जिद को ध्वस्त किया गया, वह करीब 11 साल पुरानी थी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद मस्जिद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट को वक्फ की जमीन उपलब्ध कराई थी, ताकि वहां संपत्ति का निर्माण कर कलेक्ट्रेट का काम शुरू किया जा सके। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसी स्थान पर कलेक्ट्रेट का काम शुरू होने के बाद मस्जिद को ही ध्वस्त कर दिया गया।
मुस्लिम समाज को निशाना बनाने का लगाया आरोप
इशरत जमा खान ने आरोप लगाया कि शासन और प्रशासन असंवैधानिक तरीके से मुस्लिम समाज को विशेष रूप से निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में प्रदर्शन किया गया है और सरकार तथा प्रशासन को ऐसी कार्रवाई बंद करने की चेतावनी दी गई है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज भी भारत का मूल निवासी है और देश की आजादी में उनके पूर्वजों ने भी अपना खून बहाया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी को भी उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि देश संविधान के अनुसार चलेगा, असंवैधानिक तरीके से नहीं।
सात बिंदुओं में रखी गई मांगें
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में सात बिंदुओं के जरिए अपनी मांगें रखीं। इसमें मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले की हाईकोर्ट से जांच कराने, कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग शामिल बताई गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार करने और संविधान के अनुरूप नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।


