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Kanpur Lucknow Expressway: 80 से ज्यादा गड्ढे! ₹4,700 करोड़ की परियोजना पर उठे गंभीर सवाल
Kanpur Lucknow Expressway Explained: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण लागत, सड़क की गुणवत्ता, गड्ढों-धंसाव, PNC इंफ्राटेक पर कार्रवाई और CBI रिश्वत मामले की पूरी पड़ताल पढ़िए।
Kanpur Lucknow Expressway Explained in Hindi
Kanpur Lucknow Expressway Explained in Hindi: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को राज्य की औद्योगिक राजधानी कानपुर से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-6 (NE-6 / कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे) को एक महात्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था। लेकिन समय सीमा, लागत, सड़क की गुणवत्ता और इसे बनाने वाली कंपनी के इतिहास की पड़ताल करें, तो यह प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों और उसकी कड़वी हकीकत का एक बेजोड़ उदाहरण बनकर सामने आता है।
प्रोजेक्ट का वित्तीय और तकनीकी लेखा-जोखा
6-लेन के इस एक्सप्रेसवे को कुल 62.76 किलोमीटर की लंबाई में तैयार किया गया है। भारी-भरकम बजट और आधुनिक तकनीकों के दावों के साथ तैयार इस एक्सप्रेसवे का वित्तीय गणित इस प्रकार है—
कुल अनुमानित प्रोजेक्ट लागत: लगभग ₹4,700 करोड़ (भूमि अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और सिविल निर्माण सहित)।
केवल सिविल निर्माण लागत (PNC Bid Value): ₹2,665.96 करोड़।
प्रति किलोमीटर औसत लागत:
केवल सिविल निर्माण के आधार पर: ~₹42.48 करोड़ प्रति किलोमीटर
कुल प्रोजेक्ट लागत (भूमि अधिग्रहण सहित): ~₹74.88 करोड़ प्रति किलोमीटर
इस एक्सप्रेसवे को दो प्रमुख पैकेजों में बांटा गया था—
पैकेज 1 (अमौसी से बनी - 17.50 किमी): इसमें 3.375 किमी का विशाल एलिवेटेड स्ट्रेच शामिल है।
पैकेज 2 (बनी से आजाद चौराहा, कानपुर - 45.26 किमी): यह एक पूरी तरह से नया ग्रीनफील्ड रूट है।
कौन है निर्माता? पीएनसी इंफ्राटेक की प्रोफाइल और ट्रैक रिकॉर्ड
सितंबर 2021 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की निविदा प्रक्रिया में देश की 13 बड़ी कंपनियों को पछाड़कर पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड (PNC Infratech Limited) ने हाइब्रिड एंयूटी मॉडल (HAM) के तहत दोनों पैकेजों (पैकेज 1 और पैकेज 2) का ठेका हासिल किया।
कंपनी प्रोफाइल: 1999 में स्थापित और आगरा के जैन परिवार (प्रदीप कुमार जैन, नवीन कुमार जैन आदि) द्वारा संचालित यह कंपनी मई 2015 से शेयर बाजार (BSE: 539150 / NSE: PNCINFRA) में लिस्टेड है।
राजनीतिक जुड़ाव: कंपनी के बोर्ड में कोई भी निदेशक सांसद (MP) या सक्रिय राजनीति में नहीं है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में कंपनी की पकड़ हमेशा मजबूत मानी जाती रही है।
अन्य प्रमुख काम: पीएनसी इंफ्राटेक ने इससे पहले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (पैकेज 5 और 6), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के कई बड़े सेक्शन का निर्माण कार्य निष्पादित किया है।
उद्घाटन/परीक्षण के साथ ही खुली पोल: 80 से अधिक गड्ढे और धंसाव
लाखों वाहन चालकों को राहत देने के दावे के बीच जैसे ही सड़क पर आवाजाही और परीक्षण शुरू हुआ, निर्माण गुणवत्ता की कलई खुल गई—
अल्पकालिक सड़क टिकाऊपन: एक्सप्रेसवे पर 300 से 350 मीटर के हिस्से में गहरा धंसाव देखने को मिला और 80 से अधिक स्थानों पर दरारें व गड्ढे उभर आएNHAI की सख्त कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने इस रूट पर टोल वसूली को निलंबित कर दिया और मरम्मत का संपूर्ण खर्च (लगभग ₹3 करोड़) कंपनी पर ही डाल दिया।
कार्रवाई व जांच: पीएनसी इंफ्राटेक पर परफॉरमेंस सिक्योरिटी का 2% जुर्माना ठोंका गया, कंपनी को 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित कर ब्लैकलिस्ट करने का कारण बताओ नोटिस जारी हुआ और इसके प्रोजेक्ट मैनेजरों को बर्खास्त कर दिया गया। सड़क के नमूनों की तकनीकी जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) को जिम्मेदारी सौंपी गई।
रिश्वतखोरी कांड और CBI का शिकंजा: कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल
कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के विवाद के बीच पीएनसी इंफ्राटेक का नाम एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में भी उछला, जिसने इसके कॉर्पोरेट गवर्नेंस की धज्जियां उड़ा दीं—
₹10 लाख का रिश्वत कांड: जून 2024 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NHAI के जनरल मैनेजर पुरुषोत्तम लाल चौधरी को पीएनसी इंफ्राटेक के कर्मचारियों से ₹10 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
छापेमारी और चार्जशीट: सीबीआई ने पीएनसी इंफ्राटेक के आगरा कॉर्पोरेट ऑफिस, दिल्ली रजिस्टर्ड ऑफिस और प्रबंध निदेशक (MD) योगेश कुमार जैन के आवास पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि यह रिश्वत फाइनल एनओसी (NOC) प्राप्त करने और करोड़ों रुपये के लंबित बिल पास कराने के लिए दी जा रही थी। इस मामले में सीबीआई चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है।
निवेशकों को झटका: सीबीआई कार्रवाई की खबर सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में पीएनसी इंफ्राटेक का स्टॉक 10% से ज्यादा टूट गया, जिससे आम निवेशकों का भारी नुकसान हुआ।
लगभग ₹75 करोड़ प्रति किलोमीटर (कुल लागत) की दर से बना कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के उस पहलू को उजागर करता है जहां सार्वजनिक धन का बड़ा हिस्सा खर्च होने के बावजूद निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं। एक तरफ जहां पीएनसी इंफ्राटेक भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोपों के कारण सीबीआई जांच और ब्लैकलिस्टिंग के मुहाने पर खड़ी है, वहीं दूसरी तरफ लाखों यात्री अभी भी एक सुरक्षित और गड्ढा-मुक्त एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने का इंतजार कर रहे हैं।


