Divyastra Drone: कानपुर में बनेगा 'दिव्यास्त्र' ड्रोन का अभेद्य ढांचा! हर साल तैयार होगा 200 एयरफ्रेम, भारतीय सेना ने लगाई मुहर

Divyastra Drone Indian Army: भारतीय सेना की हवाई ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी स्वार्म ड्रोन 'दिव्यास्त्र' का निर्माण तेज हो गया है। यूपी के कानपुर में इसके 200 एयरफ्रेम हर साल बनाए जाएंगे।

Harsh Srivastava
Published on: 11 Jun 2026 2:09 PM IST (Updated on: 11 Jun 2026 2:09 PM IST)
Divyastra Drone: कानपुर में बनेगा दिव्यास्त्र ड्रोन का अभेद्य ढांचा! हर साल तैयार होगा 200 एयरफ्रेम, भारतीय सेना ने लगाई मुहर
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Divyastra Drone Indian Army: आधुनिक और भविष्य के युद्धों में ड्रोन तकनीक की बढ़ती अहमियत को देखते हुए भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारतीय सेना को और ज्यादा शक्तिशाली बनाने के लिए पूरी तरह स्वदेशी और बेहद खतरनाक ड्रोन 'दिव्यास्त्र' को तैयार किया जा रहा है। इस महापरियोजना में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर की एक प्रमुख कंपनी बहुत बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। शहर की डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स नाम की कंपनी को इस घातक ड्रोन के मुख्य ढांचे यानी एयरफ्रेम को बनाने का बड़ा जिम्मा सौंपा गया है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और तकनीक को एक नई उड़ान मिलेगी।

दो दिग्गज कंपनियों के बीच हुआ रक्षा समझौता

लखनऊ डिफेंस कॉरिडोर की नामी कंपनी कावा यूएवी (होवरइट) इस अत्याधुनिक दिव्यास्त्र ड्रोन का निर्माण कर रही है। इस ड्रोन को समय पर और विश्व स्तरीय मजबूती के साथ तैयार करने के लिए उन्होंने कानपुर की डेटम एडवांस्ड कंपनी के साथ एक लंबे समय का बड़ा करार किया है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत कानपुर के पनकी में स्थित कारखाने में हर साल कम से कम दो सौ एयरफ्रेम का निर्माण किया जाएगा। दोनों कंपनियों के प्रमुखों ने पिछले दिनों प्रयागराज में आयोजित एक बड़े रक्षा सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद अब कारखाने में तेजी से काम शुरू हो चुका है।

क्या है दिव्यास्त्र ड्रोन और कितनी घातक है इसकी मारक क्षमता

दिव्यास्त्र मुख्य रूप से एक स्वार्म ड्रोन तकनीक पर काम करने वाला घातक हथियार है, जो आसमान में एक साथ बड़े झुंड में रहकर दुश्मन पर हमला करने की अद्भुत क्षमता रखता है। इसके पहले वर्जन का दायरा करीब पांच सौ किलोमीटर तक का है। वहीं, इसका दूसरा और सबसे आधुनिक वर्जन 'दिव्यास्त्र एमके-2' बेहद एडवांस इंजीनियरिंग से लैस है। यह ड्रोन लगातार आठ से बारह घंटे तक हवा में रहकर दो हजार किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकता है। आम तौर पर इसकी रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, लेकिन हमले के वक्त यह 400 किलोमीटर की रफ्तार से सौ किलो तक का बारूद लेकर दुश्मन का नामोनिशान मिटा सकता है।

राजस्थान के तपते रेगिस्तान में हुआ परीक्षण

इस स्वदेशी ड्रोन की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों राजस्थान के जोधपुर के रेगिस्तान में इसका बेहद कड़ा परीक्षण किया गया था। वहां के तपते हुए 53 डिग्री तापमान और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली भयंकर धूलभरी आंधियों के बीच भी दिव्यास्त्र ने बेहद सफल उड़ान भरी। भारतीय सेना के उच्च अधिकारियों ने खुद इस परीक्षण का बारीकी से निरीक्षण किया और इसके शानदार नतीजों को देखकर अपनी मुहर लगाई। कानपुर में बनने वाले इसके बेहद हल्के और मजबूत ढांचे की बदौलत भारत अब रक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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