कानपुर में होमगार्ड भर्ती मेडिकल में वसूली का आरोप, 2 डॉक्टरों समेत 3 पर केस

Kanpur: कानपुर पुलिस लाइन में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल में फिट करने के नाम पर 15 से 50 हजार रुपये मांगने का आरोप। दो डॉक्टरों समेत तीन पर मुकदमा दर्ज।

Newstrack Network
Published on: 16 Oct 2026 10:47 PM IST
कानपुर में होमगार्ड भर्ती मेडिकल में वसूली का आरोप, 2 डॉक्टरों समेत 3 पर केस
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Kanpur: उत्तर प्रदेश में होमगार्ड भर्ती की मेडिकल परीक्षण प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। कानपुर पुलिस लाइन में बृहस्पतिवार रात मेडिकल फिटनेस प्रमाणित करने के बदले अभ्यर्थियों से 15 हजार से 50 हजार रुपये तक माँगे जाने का मामला सामने आया। आरोप है कि मेडिकल परीक्षण के लिए तैनात दो सरकारी डॉक्टर अभ्यर्थियों को फिट घोषित करने के बदले रुपये ले रहे थे और भुगतान नहीं करने वालों को अनफिट करने की धमकी दी जा रही थी। इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि पुलिस लाइन परिसर में करीब तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। एक डॉक्टर के रिश्तेदार के साथ मारपीट भी हुई। स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी। मामले में दो डॉक्टरों और उनके एक रिश्तेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस प्रकरण ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और मेडिकल परीक्षण की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी भी भर्ती में मेडिकल परीक्षण का उद्देश्य यह निर्धारित करना होता है कि अभ्यर्थी संबंधित पद के लिए निर्धारित स्वास्थ्य मानकों को पूरा करता है या नहीं। लेकिन कानपुर में अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति के बजाय पैसे देने या नहीं देने के आधार पर फिटनेस का निर्णय प्रभावित किया जा रहा था। यदि जाँच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का मामला होगा, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के चयन के अधिकार और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी होगा।

दो सरकारी डॉक्टरों पर रुपये लेकर फिट घोषित करने का आरोप

पुलिस लाइन में चल रहे मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों ने डॉ. प्रवीण अग्रवाल और डॉ. महेश त्रिवेदी पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। दोनों डॉक्टर सरकारी चिकित्सा सेवा से जुड़े बताए गए हैं।अभ्यर्थियों का आरोप है कि मेडिकल परीक्षण में फिट घोषित करने के लिए उनसे अलग-अलग रकम माँगी जा रही थी। कथित माँग 15 हजार रुपये से शुरू होकर 50 हजार रुपये तक पहुँच रही थी।

आरोप यह भी है कि जिन अभ्यर्थियों ने रुपये देने से इनकार किया, उन्हें मेडिकल परीक्षण में अनफिट घोषित करने की धमकी दी गई।अभ्यर्थियों के अनुसार, वसूली की प्रक्रिया में डॉक्टरों के रिश्तेदारों की भी भूमिका थी। आरोप है कि कुछ लोगों के माध्यम से पर्चियाँ देकर रुपये माँगे जा रहे थे।

डॉक्टर के रिश्तेदार को पकड़कर पीटा, पुलिस ने बचाया

मेडिकल परीक्षण में कथित वसूली को लेकर नाराज अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार रात पुलिस लाइन में विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान एक डॉक्टर की कार में बैठे युवक को अभ्यर्थियों ने पकड़ लिया। युवक को डॉक्टर का रिश्तेदार बताया गया है।

आरोप है कि यह युवक कथित वसूली की प्रक्रिया से जुड़ा था। गुस्साए अभ्यर्थियों ने उसके साथ मारपीट कर दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप करके उसे भीड़ से बचाया।हंगामे के दौरान अभ्यर्थियों ने अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की और परिसर में तोड़फोड का प्रयास भी किया।

स्थिति बिगड़ने पर आसपास के कई थानों से पुलिस बल बुलाया गया। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति नियंत्रित की जा सकी।हालाँकि, कथित वसूली के आरोपों के साथ युवक से मारपीट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के प्रयास की भी अलग कानूनी जाँच आवश्यक है। किसी व्यक्ति पर भ्रष्टाचार का आरोप होने से उसके साथ हिंसा करना उचित या वैध नहीं हो जाता।

जिला कमांडेंट ने ढाई से तीन लाख रुपये की वसूली की बात कही

होमगार्ड जिला कमांडेंट प्रीति शर्मा ने अभ्यर्थियों को समझाकर शांत कराने का प्रयास किया।उन्होंने कथित रूप से वसूले गए रुपये वापस कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जिला कमांडेंट ने कहा कि अभ्यर्थियों के आरोपों की पुष्टि हुई है और दोनों डॉक्टरों द्वारा लगभग ढाई से तीन लाख रुपये की वसूली किए जाने की बात सामने आई है।

यह बयान मामले को महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि आरोप केवल अभ्यर्थियों की मौखिक शिकायत तक सीमित नहीं रह गए हैं। संबंधित अधिकारी ने भी प्रारंभिक स्तर पर वसूली की बात सामने आने का उल्लेख किया है।हालाँकि, अंतिम रूप से कितनी धनराशि वसूली गई, कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए और रकम किन व्यक्तियों तक पहुँची, इसका निर्धारण पुलिस की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों से होगा।

दो डॉक्टरों और एक रिश्तेदार के खिलाफ प्राथमिकी

अभ्यर्थियों के विरोध और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद डॉ. प्रवीण अग्रवाल, डॉ. महेश त्रिवेदी तथा एक रिश्तेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस को कथित अवैध वसूली के संबंध में अभ्यर्थियों के बयान दर्ज करने, भुगतान से संबंधित प्रमाण जुटाने और मेडिकल परीक्षण के अभिलेखों की पड़ताल करनी होगी।

यदि अभ्यर्थियों को रुपये देने के लिए पर्चियाँ उपलब्ध कराई गई थीं, तो उन पर्चियों का स्रोत और उद्देश्य भी जाँच का विषय होगा।इसके अतिरिक्त यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन अभ्यर्थियों को अनफिट घोषित किया गया, उनके मेडिकल परीक्षण का निर्णय निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार हुआ था या नहीं।

क्या पैसे नहीं देने वाले अभ्यर्थियों को जानबूझकर अनफिट किया गया?

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू केवल कथित रिश्वत वसूली नहीं, बल्कि मेडिकल परीक्षण के परिणामों को प्रभावित किए जाने का आरोप है।

यदि किसी योग्य अभ्यर्थी को पैसे नहीं देने के कारण अनफिट घोषित किया गया, तो वह चयन प्रक्रिया से बाहर हो सकता है। दूसरी ओर, यदि किसी अयोग्य अभ्यर्थी को पैसे लेकर फिट घोषित किया गया, तो भर्ती के निर्धारित स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन हो सकता है।

इसलिए जाँच में केवल वसूली करने वाले व्यक्तियों की पहचान करना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अवधि में तैयार की गई मेडिकल रिपोर्टों की भी समीक्षा आवश्यक हो सकती है। विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के मामलों का पुनर्परीक्षण महत्वपूर्ण होगा जिन्होंने अवैध वसूली की शिकायत की है या जिनके फिटनेस परिणामों पर विवाद है।

ऐसा पुनर्परीक्षण स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड के माध्यम से कराया जाए, तो अभ्यर्थियों की शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण में सहायता मिल सकती है।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल

सरकारी भर्ती में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता और मेडिकल परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं का उद्देश्य निर्धारित योग्यता के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन करना होता है। मेडिकल परीक्षण विशेष रूप से संवेदनशील चरण है, क्योंकि इसके निष्कर्ष का सीधा प्रभाव अभ्यर्थी की नियुक्ति पर पड़ सकता है।

ऐसे में मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की निष्पक्षता और उनके निर्णयों का स्पष्ट अभिलेखीकरण आवश्यक है। कानपुर की घटना से यह प्रश्न भी उठता है कि मेडिकल परीक्षण स्थल पर बाहरी व्यक्तियों या डॉक्टरों के रिश्तेदारों की कथित गतिविधियों की निगरानी किस प्रकार की जा रही थी।

यदि किसी व्यक्ति ने मेडिकल बोर्ड के नाम पर रुपये माँगे, तो यह भी जाँचना होगा कि उसे अभ्यर्थियों तक पहुँच कैसे मिली और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी कब हुई। इन सवालों के उत्तर भर्ती प्रक्रिया में संभावित प्रशासनिक कमियों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

अभ्यर्थियों से वसूले गए रुपये वापस होंगे या नहीं?

जिला कमांडेंट ने अभ्यर्थियों को कथित रूप से वसूली गई रकम वापस कराने का आश्वासन दिया है। लेकिन इस आश्वासन को पूरा करने के लिए सबसे पहले प्रभावित अभ्यर्थियों की पहचान और उनसे ली गई राशि का सत्यापन आवश्यक होगा। इसके लिए भुगतान संबंधी प्रमाण, अभ्यर्थियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का सहारा लिया जा सकता है।

यदि कुछ अभ्यर्थियों ने नकद भुगतान किया है और उनके पास रसीद या लिखित प्रमाण नहीं है, तो ऐसे मामलों की जाँच अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसके अतिरिक्त जिन अभ्यर्थियों के मेडिकल परिणाम कथित रूप से प्रभावित हुए हैं, उनके लिए निष्पक्ष पुनर्परीक्षण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। केवल वसूली की रकम लौटाना, यदि मेडिकल परिणामों में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा।

पुलिस जाँच के बाद स्पष्ट होगी आरोपियों की भूमिका

कानपुर पुलिस लाइन में हुई घटना ने होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।अभ्यर्थियों ने दो डॉक्टरों पर 15 से 50 हजार रुपये तक की वसूली का आरोप लगाया है। जिला कमांडेंट ने प्रारंभिक स्तर पर लगभग ढाई से तीन लाख रुपये की कथित वसूली सामने आने की बात कही है। दो डॉक्टरों और एक रिश्तेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।

अब जाँच में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि कितने अभ्यर्थियों से रुपये लिए गए, मेडिकल परीक्षण के कितने परिणाम प्रभावित हुए और कथित वसूली में किन व्यक्तियों की क्या भूमिका थी। इस प्रकरण का निष्पक्ष निस्तारण केवल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिन अभ्यर्थियों के साथ अनियमितता हुई है, यदि वह प्रमाणित होती है, तो उनके अधिकारों की रक्षा और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

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