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कानपुर नगर निगम में ‘कमीशनखोरी’ का खुलासा: 40% अधिकारी, 20% ठेकेदार और महज 40% में हो रहे विकास कार्य
Kanpur Nagar Nigam: कानपुर नगर निगम में विकास बजट में कथित कमीशनखोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में ठेकेदारों के बयान और कमीशन सूची के आधार पर SIT जांच की तैयारी है।
Kanpur News
Kanpur Nagar Nigam: कानपुर नगर निगम में बुनियादी ढांचा विकास और जनसुविधाओं के नाम पर आने वाले बजट में बंदरबांट का बड़ा सिंडिकेट सामने आया है। गिरफ्तार भ्रष्ट ठेकेदारों से पूछताछ और पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत कुल बजट का मात्र 40 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तविक धरातल पर खर्च होता है। शेष 60 प्रतिशत बजट नगर निगम के अधिकारियों, बाबुओं, इंजीनियरों, पार्षदों और ठेकेदारों के कमीशन की भेंट चढ़ जाता है।
यही वजह है कि शहर में करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़कें चंद महीनों में ही गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं और अधूरे पड़े नाले आम जनता की जान के लिए आफत बने हुए हैं।
कमीशन के खेल का गणित: 100 रुपये में से जमीन पर 40 रुपये
पुलिस हिरासत में आए ठेकेदार रज्जन बाजपेई और संदीप जैन ने पूछताछ में निगम के अंदरूनी कमीशन तंत्र की परतें खोली हैं:
40% अफसरों-बाबुओं का हिस्सा: शासन से विकास कार्यों के लिए जारी होने वाली कुल राशि में से 40 प्रतिशत हिस्सा सीधे नगर निगम के तंत्र में बंट जाता है। इसमें लेखाकार (Accountant), क्लर्क, जूनियर इंजीनियर (JE), एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (XEN), बड़े प्रशासनिक अधिकारी और कुछ स्थानीय पार्षदों के बीच 1% से लेकर 8% तक की तय हिस्सेदारी होती है।
20% ठेकेदार का शुद्ध मुनाफा/कमीशन: टेंडर लेने वाले ठेकेदार इस 40% कट को बांटने के बाद करीब 20% का अपना निजी मार्जिन सुरक्षित करते हैं।
बचे 40% में घटिया निर्माण: अंतिम रूप से साइट पर केवल 40% पूंजी ही पहुंचती है, जिसके कारण ठेकेदार घटिया सामग्री (कम तारकोल, खराब सीमेंट व बालू) का इस्तेमाल करते हैं।
पुलिस के हाथ लगी 'कमीशन सूची', SIT को सौंपी जाएगी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच टीम के हाथ एक अत्यंत गोपनीय सूची (कमीशन डायरी) लगी है:
नाम और पद के आगे तय प्रतिशत: इस सूची में नगर निगम के बाबुओं से लेकर उच्चाधिकारियों के नाम और उनके आगे उनका तय कमीशन प्रतिशत स्पष्ट रूप से दर्ज है।
एसआईटी करेगी जांच: यह सूची विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी जा रही है। सूची में दर्ज तथ्यों की पुष्टि होते ही नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरफ्तारी और निलंबन की गाज गिरना तय है।
रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों की फर्में चला रहे बाबू और इंजीनियर
कार्रवाई के बाद नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की नई शिकायतें सामने आने लगी हैं:
अधिकारियों के निजी सिंडिकेट: पुलिस को मिली नई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम के कई क्लर्क और इंजीनियर अपने परिजनों व रिश्तेदारों के नाम पर मुखौटा कंपनियां (Shell/Contracting Firms) बनाकर खुद ही नगर निगम के टेंडर हथिया रहे हैं।
जांच अधिकारी नियुक्त: इन सभी नई शिकायतों और बेनामी कंपनियों की गहन जांच के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने स्टाफ ऑफिसर (एडीसीपी) योगेश कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
बलिया: छात्रों की गोपनीय चिट्ठी से उजागर हुआ था मध्याह्न भोजन का 14 लाख का गबन
इसी बीच बलिया जिले के बांसडीह तहसील स्थित ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में बच्चों के राशन में धांधली का मामला भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा में है:
बच्चों की गुहार: कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों ने प्रधानाध्यापक के डर से बिना अपना नाम लिखे डीएम मंगला प्रसाद सिंह को गोपनीय डाक भेजी थी, जिसमें उन्होंने दो साल से मध्याह्न भोजन (MDM) न मिलने की शिकायत की थी।
14 लाख की हेराफेरी: प्रशासनिक जांच में पुष्टि हुई कि प्रतिदिन कागजों पर 200 बच्चों को भोजन कराया दिखाकर करीब 14 लाख रुपये का गबन किया गया। रिपोर्ट के आधार पर दोषी प्रधानाध्यापक और संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


