Kanpur News: कानपुर बना डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब, यूपी की रक्षा ताकत को मिली नई धार

Kanpur News: उत्तर प्रदेश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार मिल रही है। कानपुर में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस 250 एकड़ में विस्तार की तैयारी कर रही है और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना है।

Newstrack Network
Published on: 11 Aug 2026 10:56 PM IST
Kanpur News: कानपुर बना डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब, यूपी की रक्षा ताकत को मिली नई धार
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कानपुर, 11 अगस्त। उत्तर प्रदेश डिफेंस सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहा है और कानपुर देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्रों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर में गोला-बारूद, छोटे हथियारों और आर्टिलरी से जुड़े उत्पादों का निर्माण तेजी से विस्तार पा रहा है। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं से क्षेत्र में निवेश, रोजगार और रक्षा उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की कानपुर स्थित एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में आयोजित विशेष दौरे के दौरान कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने विस्तार योजनाओं और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक कानपुर में करीब 250 एकड़ में नई सुविधा के विस्तार का प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी पहले ही कानपुर में करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है और आने वाले वर्षों में करीब 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश की योजना है।

30 करोड़ राउंड तक बढ़ेगा सालाना उत्पादन



कानपुर स्थित एम्युनिशन फैसिलिटी में फिलहाल विभिन्न श्रेणियों की करीब 15 करोड़ राउंड गोलियों का सालाना उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी इस क्षमता को वर्ष के अंत तक बढ़ाकर करीब 30 करोड़ राउंड करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करना है।

फैसिलिटी में छोटे हथियारों के लिए स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन के साथ टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला लार्ज-कैलिबर एम्युनिशन भी तैयार किया जा रहा है। मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन के उत्पादन की भी तैयारी है, जिसका इस्तेमाल ऑटोकैनन और संबंधित हथियार प्रणालियों में किया जाता है। कंपनी के अनुसार इसका उत्पादन 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है।

2027 तक 40 लाख ग्रेनेड उत्पादन का लक्ष्य

कंपनी ने ग्रेनेड उत्पादन क्षमता बढ़ाने की भी योजना बनाई है। इसके तहत 2027 तक सालाना 40 लाख यूनिट ग्रेनेड उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। इसके बाद 2029 तक अतिरिक्त 40 लाख यूनिट की क्षमता बढ़ाने की योजना है। इससे घरेलू स्तर पर रक्षा सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

करीब 2,000 लोगों को मिल रहा रोजगार

कानपुर स्थित इस सेंटर में फिलहाल करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी काम कर रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद प्रत्यक्ष रोजगार के साथ लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। इससे कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आत्मनिर्भरता पर जोर



अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में घरेलू स्तर पर गोला-बारूद और अन्य रक्षा सामग्री की पर्याप्त उत्पादन क्षमता महत्वपूर्ण है।

आधुनिक हथियारों और एआई तकनीक पर जोर

कानपुर की यूनिट में स्वदेशी रक्षा उत्पादों और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर भी काम हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार यहां विकसित अभय राइफल 5.56 एमएम और 9 एमएम, दोनों प्रकार के गोला-बारूद का इस्तेमाल करने में सक्षम है। वहीं प्रहार लाइट मशीन गन को भी भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है।

उत्पादन प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निरीक्षण तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इसके जरिए एम्युनिशन केस की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप जांच को अधिक स्वचालित और सटीक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

नाटो मानकों के अनुरूप निर्माण

अधिकारियों के मुताबिक कानपुर फैसिलिटी में तैयार किए जा रहे गोला-बारूद और आर्टिलरी सिस्टम नाटो मानकों के अनुरूप हैं। इससे हथियार प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और लगातार एक समान प्रदर्शन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। कंपनी के अनुसार उसके एम्युनिशन उत्पादों की मांग मित्र देशों से भी सामने आ रही है।

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विस्तार के साथ कानपुर में बढ़ता निवेश और उत्पादन क्षमता राज्य की रक्षा विनिर्माण क्षमता को नई पहचान दे रहा है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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