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कानपुर का ‘राउडी राठौर’! पत्रकार से अधिवक्ता और पुलिस तक चलाया हंटर, थर-थर कांपते हैं अपराधी
IPS Akhil Kumar: कानपुर के पुलिस आयुक्त अखिल कुमार की शहर ही नहीं पूरे राज्य में चर्चा हो रही है। अपराधियों पर लगातार चल रहे हंटर को देखते हुए लोग उन्हें ‘राउडी राठौर’ बुलाने लगे हैं।
IPS Akhil Kumar
Kanpur Police Commissioner Akhil Kumar: कहा जाता है अगर खाकी वर्दी का अपराधियों में खौफ हो तो फिर अपराध कहीं भी खड़ा नहीं हो सकता है। कानून का भय हो तो कोई भी किसी की तरफ नजर उठा कर नहीं देख सकता और समाज भी सुरक्षित महसूस करता है। यूं तो कानून का राज बनाये रखने के लिए हर शहर में पुलिस के अधिकारी तैनात किये जाते हैं। लेकिन कुछ अफसर ऐसे भी होते हैं जो अपराधियों के जहन में ही डर उतार देते हैं।
ऐसे ही एक पुलिस अफसर कानपुर के पुलिस आयुक्त अखिल कुमार हैं। अखिल कुमार 1994 बैच यूपी कैडर के आईपीएस अफसर हैं। जिनकी इन दिनों शहर ही नहीं पूरे राज्य में चर्चा हो रही है। अपराधियों पर लगातार चल रहे हंटर को देखते हुए लोग उन्हें ‘राउडी राठौर’ बुलाने लगे हैं। ‘राउडी राठौर’ एक ऐसी छवि जो अपराध का समूल नाश कर दे और पीड़ितों को न्याय दिलाए।
अवैध कामों में लिप्त पत्रकारों को भेजा जेल
कानपुर में कुछ पत्रकार अवैध कार्यो में लिप्त थे। लेकिन उनकी पहुंच के कारण इन पत्रकारों के खिलाफ किसी ने भी एक्शन नहीं लिया। कुछ साल पहले एक हजार करोड़ की जमीन पर कब्जा करने के आरोप को लेकर पीड़ितों ने एफआईआर दर्ज करायी। एफआईआर दर्ज होने के बाद जो कार्यवाही हुई। जिसने एक नजीर कायम कर दी।
पुलिस आयुक्त अखिल कुमार के शहर में आते ही न सिर्फ इन पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ बल्कि गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भी भेज दिया गया। इसके बाद शहर में इस तरह के कई पत्रकारों के नाम सामने आने लगे। किसी पर जमीन कब्जाने तो किसी पर रंगदारी मांगने का आरोप लगा। सभी मामलों में कार्यवाही हुई और आरोपियों को जेल का रास्ता दिखा दिया गया। पुलिस आयुक्त की इस कार्यवाही के बाद शहर की गली-गली में चर्चा होने लगी।
पत्रकार के बाद अधिवक्ता-पुलिस भी आए रडार पर
शहर में जमीन कब्जाने और रंगदारी के खिलाफ पत्रकारों पर हुई कार्यवाही के बाद यह सुगबुगाहट सामने आयी कि यह सब कुछ अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों के गठजोड़ के बिना तो संभव ही नहीं है। इसके बाद अधिवक्ताओं की कुंडली खंगाली जाने लगी। जिसमें एक बड़ा नाम सामने आया दीनू उपाध्याय का।
दीनू और उसके साथियों पर जमीनों पर कब्जा करने, रंगदारी मांगने और मारपीट करने के आरोप लगे थे। इसके बाद एक दिन बड़ी कार्रवाई हुई और मुकदमा लिखा गया और दीनू उपाध्याय को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। इस कार्यवाही के बाद तो पुलिस आयुक्त अखिल कुमार का शहर में डंका बजने लगा और अपराधियों के हाथ-पैर कांपने लगे। सभी को यह लगने लगा कि पत्रकारों और अधिवक्ता के खिलाफ एक्शन हो रहा है तो फिर इसमें शामिल कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।
शुरू हुआ ‘ऑपरेशन महाकाल’
दो बड़ी कार्यवाही के बाद अचानक पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने ‘ऑपरेशन महाकाल’ लॉन्च कर दिया। इस ऑपरेशन के बाद सभी को यह भरोसा हो गया कि अब कुछ जरूर बड़ा होने वाला है। इसके बाद शहर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के बाद कई पुलिसकर्मियों का बीपी लो होने लगा। क्योंकि कई सीनियर पुलिस अफसरों के अखिलेश दुबे के साथ सांठगांठ थे। पत्रकारों और अधिवक्ताओं के बाद अखिल कुमार ने खुद के महकमे पर भी रहम नहीं किया। अखिलेश दुबे का साथ देने वाले कई सीओ और एसओ के खिलाफ जांच के आदेश दे दिये गये। इसके साथ ही मुकदमा भी दर्ज हुआ। इस मामले की छानबीन अभी भी चल रही है।
ट्रांसफर बना चर्चा का विषय
शहर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे की गिरफ्तारी के बाद एक दिन अचानक यह सामने आया कि पुलिस आयुक्त अखिल कुमार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले जाएंगे। केंद्र ने उनकी तैनाती सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिजीटल इंडिया कॉर्पोरेशन में बतौर प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर दी है। सभी को लगा कि कुछ ही दिनों में अखिल कुमार की शहर से विदाई हो जाएगी। लेकिन अखिल कुमार अभी भी शहर में तैनात हैं।


