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Kaushambi News: बसोहनी में तालाबों पर काम के बिना 97 मजदूरों की हाजिरी, भुगतान पर सवाल
Kaushambi News: कौशाम्बी के बसोहनी गांव में तेली और ककराही तालाब पर काम नजर नहीं आया, जबकि पोर्टल पर 97 मजदूरों की हाजिरी दर्ज है। मस्टर रोल और भुगतान की जांच की मांग उठी है।
बसोहनी में तालाबों पर काम के बिना 97 मजदूरों की हाजिरी, भुगतान पर सवाल (Photo- Newstrack)
Kaushambi News: कौशाम्बी के सिराथू विकासखंड की ग्राम पंचायत बसोहनी में विकसित भारत गारंटी रोजगार योजना के तहत तालाबों की खुदाई के नाम पर दर्ज मजदूरों की उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। गांव के तेली तालाब और ककराही तालाब के कार्यों में पोर्टल पर प्रतिदिन 97 मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, मौके की स्थिति इससे अलग बताई जा रही है। दोनों तालाब पानी से भरे हुए हैं और न तो खुदाई होती दिखाई दे रही है और न ही मजदूर काम करते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने तालाबों पर मजदूरों को काम करते नहीं देखा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मौके पर काम नहीं हो रहा तो प्रतिदिन 97 मजदूरों की हाजिरी किस आधार पर दर्ज की जा रही है।
मस्टर रोल में 85 मजदूरों के नाम, 97 की हाजिरी का मामला
पोर्टल पर तेली तालाब का कार्य कोड 269972 और ककराही तालाब का कार्य कोड 269971 दर्ज है। तेली तालाब के मस्टर रोल संख्या 2149 से 2153 तक 46 मजदूरों के नाम दर्ज हैं। वहीं ककराही तालाब के मस्टर रोल संख्या 2088, 2090, 2091, 2092 और 2114 में 39 मजदूरों की प्रविष्टियां हैं। इस तरह कुल 85 मजदूरों के नाम सामने आते हैं, जबकि पोर्टल पर 97 मजदूरों की हाजिरी का मामला है। शेष 12 मजदूरों की उपस्थिति का मिलान भी जांच का विषय है।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि मस्टर रोल में दर्ज करीब 80 प्रतिशत मजदूर अपने निजी व्यवसाय और दूसरे कामों में व्यस्त रहते हैं। यदि यह दावा सही है तो जॉब कार्ड, मजदूरों के बयान और दैनिक उपस्थिति अभिलेखों की जांच जरूरी हो जाती है।
बिना काम के एमबी कैसे तैयार होगी
योजना के नियमों के मुताबिक कार्यस्थल पर अधिकृत व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने और वास्तविक कार्य के तकनीकी माप के आधार पर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था है। मस्टर रोल बंद होने के तीन दिन के भीतर कार्य की माप लेकर उसे डिजिटल प्रणाली में दर्ज करने का प्रावधान है।
ऐसे में खंड विकास अधिकारी से सवाल है कि जब दोनों तालाब पानी से भरे हैं और मौके पर खुदाई या अन्य कार्य दिखाई नहीं दे रहा तो तकनीकी सहायक या अभियंता किस काम की माप लेकर एमबी तैयार करेंगे। क्या मजदूरों की उपस्थिति बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन से दर्ज हुई है और किस अधिकारी ने इसका सत्यापन किया है। बिना वास्तविक काम के माप पुस्तिका में कार्य की मात्रा कैसे दर्ज होगी और भुगतान किस आधार पर किया जाएगा।
तीन महीने में 26 लाख रुपये से अधिक मजदूरी का गणित
दर्ज 97 मजदूरों को प्रतिदिन 300 रुपये की दर से मजदूरी देने पर कुल 29,100 रुपये प्रतिदिन का हिसाब बनता है। इसी आधार पर लगातार 90 दिनों की मजदूरी 26 लाख 19 हजार रुपये होगी। हालांकि, यह केवल गणितीय अनुमान है। वास्तव में कितना भुगतान हुआ है, इसकी पुष्टि भुगतान अभिलेखों से ही हो सकती है।
जिलाधिकारी से स्थलीय जांच कराने की मांग
मामले में जिलाधिकारी से दोनों तालाबों का स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही मस्टर रोल, जॉब कार्ड, बायोमेट्रिक उपस्थिति, कार्यस्थल की तस्वीरें, डिजिटल माप पुस्तिका और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग उठाई गई है। जनता बोर्ड और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से कार्यों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
यदि जांच में फर्जी उपस्थिति या बिना काम के भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, खंड विकास अधिकारी का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।


