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Kaushambi News: तीन करोड़ की तालाबी जमीन पर कब्जे का आरोप, जांच का इंतजार
Kaushambi News: सिराथू के भड़ेसर गांव में ढाई बीघे तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग और बाउंड्री बनाने का आरोप, तीन साल से शिकायतों के बाद भी कार्रवाई लंबित है।
तीन करोड़ की तालाबी जमीन पर कब्जे का आरोप, जांच का इंतजार (Photo- Social Media)
Kaushambi News: सरकारी तालाबों पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच सिराथू तहसील के भड़ेसर गांव में ढाई बीघे तालाबी भूमि पर कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि भूमाफियाओं ने सरकारी अभिलेखों में दर्ज आराजी संख्या 924(क) तालाब को पाटकर प्लॉटिंग कर दी है। तालाब के शेष हिस्से पर भी बाउंड्री बनाकर कब्जा किए जाने का आरोप है। करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक कीमत की बताई जा रही इस जमीन को लेकर लोग तीन साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकी है।
तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग, सरकारी संपत्ति पर कब्जे का आरोप
भड़ेसर ग्राम सभा में आराजी संख्या 924(क) के तहत दर्ज ढाई बीघे का तालाब लंबे समय से समतल पड़ा हुआ था। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर कुछ भूमाफियाओं ने तालाबी भूमि पर कब्जा कर लिया। तालाब के एक हिस्से को पाटकर प्लॉटिंग कर दी गई, जबकि बाकी हिस्से में चाहरदीवारी खड़ी कर जमीन को अपने कब्जे में ले लिया गया। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला होगा।
तीन साल से शिकायत, फिर भी नहीं हिली प्रशासनिक मशीनरी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब की जमीन पर कब्जे की शिकायत तहसील और जिला स्तर के अधिकारियों से कई बार की गई। इसके बावजूद न तो जमीन को कब्जामुक्त कराया गया और न ही अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर कथित कब्जे के मामले में भी कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।
12 लाख रुपये देने का दावा, जांच के घेरे में प्रशासनिक भूमिका
मामले में उस समय और गंभीर आरोप सामने आए, जब नाम न छापने की शर्त पर भूमाफियाओं के एक कथित साथी ने दावा किया कि तालाब की जमीन पर कब्जे के एवज में एक अधिकारी को 12 लाख रुपये दिए गए हैं। हालांकि, इस कथित लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही इसकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। मामला सही पाए जाने पर संबंधित लोगों और किसी भी दोषी अधिकारी की भूमिका की जांच आवश्यक होगी।
नापजोख की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों के दबाव में जमीन की नापजोख के लिए पहुंची टीम ने भी मामले को उलझाने की कोशिश की। उनका दावा है कि भड़ेसर की आराजी संख्या 924(क) से सटी बिछौरा ग्राम सभा में स्थित तालाब को भड़ेसर की आराजी संख्या 924(क) में दर्शाकर रिपोर्ट तैयार की गई। आरोप यह भी है कि इस तरह की रिपोर्ट से अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है। हालांकि, राजस्व अभिलेखों और मौके की पैमाइश के मिलान के बिना इन आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती।
अफसरों के पास कार्रवाई का समय नहीं!
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि शिकायतों के बावजूद कब्जा हटाने की कार्रवाई लंबित बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, एसडीएम का कहना है कि समय नहीं मिल पाने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। सरकारी तालाब की जमीन पर कब्जे का आरोप हो और कार्रवाई के लिए समय का अभाव बताया जाए, तो प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सीएम तक पहुंची शिकायत, अब कार्रवाई का इंतजार
लोगों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की है। अब शिकायतकर्ताओं को उम्मीद है कि उच्चस्तरीय जांच से तालाब की वास्तविक स्थिति, कथित कब्जे और नापजोख की रिपोर्ट की सच्चाई सामने आएगी। ग्रामीणों की मांग है कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए, तालाब की भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए और यदि मिलीभगत या रिश्वत के आरोप प्रमाणित हों तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि सरकारी तालाब को कथित कब्जे से मुक्त कराने के लिए प्रशासन कब कदम उठाता है और तीन करोड़ रुपये से अधिक कीमत की बताई जा रही इस जमीन की वास्तविक स्थिति जांच में कब स्पष्ट होती है।


