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Kaushambi News: कौशाम्बी में ग्राम पंचायत अधिकारी पर आरोपों को लेकर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
Kaushambi News: कौशाम्बी के सरसवां विकासखंड में ग्राम पंचायत अधिकारी पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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Kaushambi News: विकासखंड सरसवां में ग्राम पंचायत अधिकारी मार्तंड सिंह को देवाना, पुनवार, जाफरपुर महावां समेत कई ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी दिए जाने और एडीओ (पंचायत) का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। संबंधित पक्ष का कहना है कि महज आरोप लगाए जाने से किसी कर्मचारी को भ्रष्टाचार का दोषी नहीं माना जा सकता। यदि किसी कार्य में अनियमितता का दावा किया जा रहा है तो उसका फैसला निष्पक्ष जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही होना चाहिए।
बताया गया कि ग्राम पंचायत अधिकारी को दी गई अतिरिक्त जिम्मेदारियां विभागीय व्यवस्था और सक्षम अधिकारियों के आदेश के तहत हैं। ऐसे में जिम्मेदारी मिलने को ही भ्रष्टाचार से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है। विभागीय कार्यों में मस्टर रोल, एमबी, बिल-वाउचर, भुगतान तथा ऑनलाइन अभिलेख निर्धारित प्रक्रिया के तहत तैयार किए जाते हैं, जिनकी जांच संबंधित विभागीय अधिकारी कभी भी कर सकते हैं। ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त, 15वें वित्त आयोग और मनरेगा से कराए गए कार्यों में धांधली के आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसी अथवा सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। केवल कागजी आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी की कार्यप्रणाली और छवि पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
गौशालाओं और स्ट्रीट लाइटों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी संबंधित पक्ष ने कहा कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थलीय निरीक्षण आवश्यक है। उनका कहना है कि संबंधित ग्राम पंचायतों में किसी प्रकार की गौशाला नहीं है। कार्यस्थल पर जाकर मौके की स्थिति, स्वीकृत धनराशि, कराए गए कार्य और अभिलेखों का मिलान किया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। संबंधित पक्ष ने कहा कि वह किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हट रहे हैं। यदि सक्षम अधिकारी जांच कराते हैं तो विभागीय अभिलेख प्रस्तुत कर हर बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। उनका कहना है कि बिना जांच किसी कर्मचारी को भ्रष्टाचार का दोषी ठहराना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे उसकी सामाजिक और विभागीय छवि भी प्रभावित होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कुछ तथाकथित लोगों द्वारा निजी लाभ के लिए भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। संबंधित पक्ष का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए और निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।


