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Kaushambi News: गरीब कुम्हार पर मुकदमा, पराली जलाने वालों पर कार्रवाई कब?
Kaushambi News: मखाऊपुर गांव में मिट्टी के बर्तन पकाने से धुआं फैलने के आरोप में पिपरी पुलिस ने विष्णु प्रजापति पर केस दर्ज किया। परिवार ने रोजगार के लिए वैकल्पिक सुविधा मांगी।
गरीब कुम्हार पर मुकदमा, पराली जलाने वालों पर कार्रवाई कब? (Photo- Newstrack)
Kaushambi News: कौशांबी में पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक नया सवाल खड़ा हो गया है। एक तरफ खेतों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, वहीं दूसरी तरफ मिट्टी के बर्तन पकाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले गरीब कुम्हार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कानून का शिकंजा गरीब कुम्हार पर ही क्यों कस रहा है और खेतों में पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी। मामला पिपरी थाना क्षेत्र के मखाऊपुर गांव का है। यहां मिट्टी के बर्तन बनाने वाले विष्णु प्रजापति पुत्र अमृतलाल के खिलाफ 4 नवंबर 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 275/2026 दर्ज किया गया। आरोप है कि मिट्टी के कच्चे बर्तनों को आवा में पकाने के दौरान निकलने वाले धुएं से प्रदूषण फैल रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
पुश्तैनी कारोबार पर संकट, कैसे पकेंगे मिट्टी के बर्तन?
कुम्हार समाज का परंपरागत व्यवसाय मिट्टी खोदकर बर्तन बनाना, उन्हें आवा में पकाना और फिर बाजार में बेचकर परिवार का भरण-पोषण करना रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि कच्चे मिट्टी के बर्तनों को बिना पकाए तैयार कैसे किया जा सकता है। यदि आवा में बर्तन पकाने से प्रदूषण फैलने की समस्या है तो प्रशासन को कुम्हारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और उचित दिशा-निर्देश उपलब्ध कराने चाहिए। सीधे मुकदमा दर्ज करने से उनका रोजगार प्रभावित हो सकता है। गरीब परिवार के सामने पहले से ही आर्थिक चुनौतियां हैं, ऐसे में पुश्तैनी काम को लेकर कानूनी कार्रवाई उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है।
पराली जलाने वालों पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खेतों में पराली जलाने वालों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर भी है। जब पराली जलाने से प्रदूषण फैलने की शिकायतें सामने आती हैं तो जिम्मेदार विभाग कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं। क्या प्रदूषण नियंत्रण के नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं या कमजोर और गरीब व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना ही आसान रास्ता बन गया है। कानून का राज तभी सार्थक होगा, जब नियमों का पालन बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से कराया जाए।
चौकी स्तर के पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी चर्चा
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस कार्रवाई के पीछे चौकी स्तर के पुलिसकर्मियों की भूमिका अहम रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि गांव के चौकीदार के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई। वहीं, किसी राजनीतिक व्यक्ति के इशारे पर कार्रवाई होने की चर्चाएं भी हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है, ताकि किसी गरीब परिवार के साथ अन्याय न हो।
मुकदमे के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
मुकदमा दर्ज होने के बाद विष्णु प्रजापति का परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जिस कारोबार से घर का चूल्हा जलता था, उसी काम को लेकर अब कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। दीपावली के त्योहार के आसपास गरीब परिवार की खुशियों पर भी संकट के बादल छा गए हैं। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर पुश्तैनी रोजगार नहीं कर पाएंगे तो घर का खर्च कैसे चलेगा।
अब सवाल यह है कि क्या कौशांबी के पुलिस अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराकर गरीब कुम्हार को न्याय दिलाएंगे। क्या चौकी इंचार्ज और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच होगी और क्या प्रशासन कुम्हार समाज के परंपरागत रोजगार को बचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगा। या फिर गरीब कुम्हार को अदालतों के चक्कर लगाकर अपनी बेगुनाही साबित करनी पड़ेगी। जनता सरकार और प्रशासन से जवाब मांग रही है कि खेतों में पराली जलाने वालों पर कार्रवाई का क्या हुआ और मिट्टी के बर्तन पकाकर दो जून की रोटी कमाने वाले कुम्हार का अपराध आखिर इतना बड़ा कैसे हो गया।


