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Kisan Accident Scheme: किसान परिवार के लिए काम की खबर, दुर्घटना में मिलेंगे 5 लाख, बस पूरी करनी होंगी ये शर्त
Kisan Accident Scheme: यूपी की मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में पात्र किसान की दुर्घटना में मौत या दिव्यांगता पर ₹5 लाख तक सहायता मिलती है।
Kisan Accident Scheme: Farmers’ Families Can Get Up to ₹5 Lakh After Accidental Death
Kisan Accident Scheme: खेती-किसानी में जितनी ज्यादा हाड़तोड़ मेहनत हैं उतना ही इसके साथ जोखिम भी जुड़ा है। अक्सर खेत में काम करते समय हादसा हो जाए या किसी दूसरी दुर्घटना में किसान की जान चली जाए, तो परिवार पर आर्थिक संकट टूट पड़ता है। ऐसे परिवारों को सहारा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना चला रही है। इस योजना में पात्र किसान की दुर्घटना में मृत्यु या तय श्रेणी की स्थायी दिव्यांगता होने पर आर्थिक सहायता का प्रावधान है। खास बात यह है कि योजना का दायरा केवल अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों तक सीमित नहीं है। पट्टे या बटाई पर खेती करने वाले भूमिहीन कृषक भी निर्धारित शर्तों के तहत इसके पात्र हो सकते हैं।
किन किसानों को मिलता है योजना का लाभ
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 14 सितंबर 2019 से लागू है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार उत्तर प्रदेश के निवासी ऐसे कृषक इसके दायरे में आते हैं, जिनकी दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता होती है। इसमें राजस्व अभिलेख यानी खतौनी में दर्ज खातेदार और सहखातेदार शामिल हैं। इसके अलावा खातेदार या सहखातेदार के ऐसे कमाऊ सदस्य भी पात्र हो सकते हैं, जिनकी आजीविका संबंधित कृषि भूमि से होने वाली आय पर निर्भर है।
इस योजना की एक अहम बात यह है कि भूमिहीन किसान भी पूरी तरह बाहर नहीं हैं। सरकारी दिशा-निर्देशों में पट्टे पर मिली जमीन या बटाई पर खेती करने वाले ऐसे लोगों को भी कृषक की परिभाषा में शामिल किया गया है, जिनकी मुख्य आजीविका इसी कृषि कार्य से चलती है। हालांकि इसके लिए संबंधित पट्टे या बटाई से जुड़े निर्धारित दस्तावेजों से पात्रता साबित करनी होती है।
मृत्यु पर परिवार को मिलते हैं 5 लाख रुपये
किसान की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। पूर्ण शारीरिक अक्षमता या दोनों हाथ, दोनों पैर अथवा दोनों आंखों की क्षति जैसी निर्धारित गंभीर स्थितियों में भी 5 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।
दिव्यांगता की स्थिति में राशि नुकसान की गंभीरता के अनुसार तय होती है। 50 प्रतिशत से अधिक और 100 प्रतिशत से कम स्थायी दिव्यांगता पर 2.50 लाख रुपये तथा 25 प्रतिशत से अधिक और 50 प्रतिशत से कम स्थायी दिव्यांगता पर 1.25 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है। एक हाथ, एक पैर या एक आंख की क्षति भी निर्धारित सहायता श्रेणी में आती है।
सिर्फ खेत में हादसा होना जरूरी नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि योजना को केवल खेत में हुई दुर्घटना तक सीमित नहीं किया गया है। दिशा-निर्देशों के तहत दुर्घटना की कई परिस्थितियां कवर की गई हैं। इनमें सड़क या रेल दुर्घटना, डूबना, बिजली गिरना, करंट लगना, आग, बाढ़, आंधी-तूफान, पेड़ या मकान गिरने से दुर्घटना, सांप या अन्य जीव-जंतुओं के काटने अथवा हमले जैसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं। पात्रता और घटना की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर होती है।
आवेदन में देरी न करें
दुर्घटना के बाद आवेदन समय पर करना बेहद जरूरी है। मूल दिशा-निर्देशों में दुर्घटना की तारीख से 45 दिनों के भीतर आवेदन देने का प्रावधान था। बाद में आवेदन की समय-सीमा को लेकर राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मई 2025 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक तीन महीने के बाद और छह महीने तक आने वाले मामलों में जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई का प्रावधान बताया गया। इसलिए परिवार को दुर्घटना के बाद आवेदन टालना नहीं चाहिए।
कौन से दस्तावेज रखने होंगे
आवेदन के लिए घटना के मुताबिक दस्तावेज जरूरी होते हैं। इनमें खतौनी की प्रमाणित प्रति, आधार कार्ड, निवास और आयु से संबंधित प्रमाण, बैंक खाते की जानकारी, मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट या जहां पोस्टमार्टम संभव न हो वहां पंचनामा शामिल हो सकते हैं। दिव्यांगता के मामले में सक्षम चिकित्सा अधिकारी से जारी प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। पट्टेदार या बटाईदार किसान को खेती से जुड़े निर्धारित दस्तावेज भी लगाने पड़ सकते हैं।
आवेदन कहां और कैसे करें
योजना के आवेदन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से संचालित होती है। पात्र परिवार को दुर्घटना से जुड़े दस्तावेज तैयार करके संबंधित तहसील स्तर पर आवेदन करना होता है। ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवेदन मिलने के बाद संबंधित स्तर पर दस्तावेज और घटना की जांच की जाती है। स्वीकृति के बाद सहायता राशि लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आधिकारिक पोर्टल पर योजना के आवेदन और उनके निस्तारण से जुड़ा जिला और तहसीलवार रिकॉर्ड भी उपलब्ध है। सितंबर 2026 के रिकॉर्ड में योजना के तहत आवेदन और लंबित मामलों की जानकारी लगातार अपडेट होती दिखाई दे रही है।
ध्यान रखें: केवल किसान होने से सहायता स्वतः नहीं मिलती। दुर्घटना, पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है। इसलिए हादसा होने की स्थिति में परिवार को सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखते हुए निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा के भीतर आवेदन करना आवश्यक होता है।


