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Kushinagar News: गन्ने के रोगों को लेकर विशेषज्ञों ने किसानों को दिए बचाव और उन्नत बुवाई के सुझाव
Kushinagar News: कुशीनगर में विशेषज्ञों ने किसानों को रोगग्रस्त गन्ने की पेड़ी नहीं रखने और शरदकालीन बुवाई में उन्नत व रोगरोधी प्रजातियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
Kushinagar News
Kushinagar News: शरदकालीन गन्ने की बुवाई से पहले किसानों को खेत और बीज के चयन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रामकोला चीनी मिल क्षेत्र में किए गए फसल निरीक्षण के दौरान गन्ने की कई प्रजातियों में विल्ट, रूट रॉट और रेड रॉट जैसे रोगों का प्रकोप पाया गया। विशेषज्ञों ने किसानों से रोगग्रस्त खेतों से बीज लेने और ऐसी फसल की पेड़ी रखने से स्पष्ट रूप से बचने की अपील की है।
चीनी मिल की ओर से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एसके पांडेय के साथ 14 और 15 सितंबर को दो दिवसीय क्षेत्र भ्रमण किया गया। इस दौरान यूनिट हेड, केन हेड, डेवलपमेंट हेड और फील्ड स्टाफ ने विभिन्न क्षेत्रों में गन्ने की फसल का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान को.शा. 8279, को.शा. 8272, को.पीके 5191, को.0238 और को.5011 प्रजातियों में विल्ट, रूट रॉट तथा रेड रॉट रोग का प्रकोप सामने आया। कई खेतों में रोग के कारण गन्ने के पौधे सूखे हुए मिले। विशेषज्ञों ने को.0238 प्रजाति में रेड रॉट का प्रकोप पाए जाने पर किसानों को इसकी पेड़ी नहीं रखने की सलाह दी। वहीं, सीओ 0118 के कुछ खेतों में पत्तियों में पीलापन पाया गया, जिसे विल्ट रोग का शुरुआती लक्षण बताया गया। ऐसे खेतों से बीज लेने से भी किसानों को मना किया गया।
शरदकालीन बुवाई में उन्नत प्रजातियों को दें प्राथमिकता
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि शरदकालीन गन्ने की बुवाई में रोगग्रस्त और रोगों के प्रति संवेदनशील प्रजातियों के बजाय उन्नतशील एवं रोगरोधी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। इनमें को.0118, को.लख.14201, को.16202, को.शा.18231, को.लख.94184 और को.शा.13235 प्रमुख हैं।
भूमि और बीज का उपचार जरूरी
विशेषज्ञों ने बुवाई से पहले भूमि शोधन के लिए ट्राइकोडर्मा तथा बीज शोधन के लिए कार्बेन्डाजिम के प्रयोग की सलाह दी। किसानों से कहा गया कि बुवाई के लिए केवल कीट एवं रोगमुक्त और स्वस्थ नर्सरी प्लॉट से प्राप्त बीज का ही इस्तेमाल करें। इससे फसल की शुरुआती अवस्था में रोगों के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। क्षेत्र भ्रमण के दौरान कुछ खेतों में सफेद मक्खी का प्रकोप भी पाया गया। इसके नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों ने इमिडाक्लोप्रिड का निर्धारित मात्रा में घोल तैयार कर पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी। चीनी मिल के यूनिट हेड ने किसानों से अपील की कि वे शरदकालीन गन्ने की बुवाई में उन्नतशील एवं रोगरोधी प्रजातियों को प्राथमिकता दें। साथ ही बुवाई से पहले भूमि और बीज का उपचार अनिवार्य रूप से करें, ताकि फसल को रोगों से बचाया जा सके और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो।


