Kushinagar News: गन्ने के साथ प्याज की सहफसली खेती से बढ़ेगी आय, कीट नियंत्रण में भी मिलेगी मदद

Kushinagar News: बसंतकालीन गन्ने के साथ प्याज की सहफसली खेती से 135-140 दिन में 75-85 कुंतल उत्पादन संभव, कीट नियंत्रण में भी लाभ; डेढ़ लाख तक अतिरिक्त आय का दावा।

Mohan Suryavanshi
Published on: 22 Feb 2026 4:46 PM IST
Farmer removing onion nursery
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प्याज की नर्सरी की निकालते किसान (Photo- Newstrack)

Kushinagar News: कुशीनगर ।बसंतकालीन गन्ने के साथ प्याज की सहफसली खेती कर किसान 135 से 140 दिनों में अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। एक एकड़ गन्ने के साथ 75 से 85 कुंतल तक प्याज का उत्पादन संभव है। मई माह तक प्याज की फसल तैयार हो जाती है। यह जानकारी गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के पूर्व सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने न्यूज़ट्रैक को एक विशेष बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि प्याज का उपयोग हर परिवार में सलाद, मसाला और सब्जी के रूप में होता है। औषधीय गुणों से भरपूर प्याज में फास्फोरस, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट एवं विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

प्रमुख किस्में और प्रजातियां

प्याज की प्रमुख किस्मों में पूसा रेड, एन-53, अर्का प्रगति, एग्रीफाउंड लाइट रेड, पूसा माधवी और अर्का कल्याण शामिल हैं। वहीं गन्ने की उन्नत प्रजातियों में को.शा. 13235, को. 0118, को.लख. 14201, को.से. 8452, को.शा. 17231, 18231, को.से. 17451 और को.लख. 16470 प्रमुख हैं। ये प्रजातियां गन्ना शोध संस्थान एवं चीनी मिलों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही हैं।

अनुसंधान केंद्रों का किया अध्ययन

ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि प्याज की वैज्ञानिक खेती और शोध तकनीकों की जानकारी के लिए उन्होंने महाराष्ट्र स्थित प्याज अनुसंधान संस्थान, राजगुरूनगर (पुणे) तथा नासिक प्याज अनुसंधान केंद्र का भ्रमण कर वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में प्याज-गन्ना की सहफसली खेती से किसान समृद्ध हो रहे हैं और वहां से प्याज उत्तर प्रदेश भी आ रही है। ऐसे करें खेत की तैयारी अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 70-80 कुंतल सड़ी गोबर खाद डालें। 5 किग्रा ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें।

गन्ने की बुवाई 120 सेमी दूरी पर नाली बनाकर करें।

गन्ने की दो लाइनों के बीच प्याज के लिए अलग से 50 किग्रा डीएपी, 20 किग्रा यूरिया, 30 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 5 किग्रा सोटा सल्फर (80 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी) मिलाएं।

एक किग्रा ह्यूमिक एसिड (98 प्रतिशत) का प्रयोग लाभकारी रहेगा।

रोपाई की विधि

गन्ने की दो लाइनों के बीच प्याज की चार लाइनों की रोपाई करें। लाइन से लाइन की दूरी 15 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें। बेहतर होगा कि पौध नर्सरी से तैयार की जाए। यदि पौध उपलब्ध न हो तो बाजार से खरीदी जा सकती है। तरकुलवा क्षेत्र के ग्राम सबवट कैथवलिया में किसान जयसिंह कुशवाहा के यहां प्याज की नर्सरी उपलब्ध है।

कीट नियंत्रण में सहायक

ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि प्याज में ‘एलाइल प्रोपाइल डाई सल्फाइड’ नामक उड़नशील तेल पाया जाता है। यही तत्व गन्ने में लगने वाले अंकुर बेधक पिहिका कीट को नियंत्रित करने में सहायक होता है। प्याज की सिंचाई का लाभ भी गन्ने को मिलता है, जिससे गन्ने की उपज लगभग 400 कुंतल प्रति एकड़ तक हो सकती है।

डेढ़ लाख तक अतिरिक्त आय

वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर 75 से 85 कुंतल प्याज का उत्पादन संभव है। यदि 15 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री होती है तो एक से सवा लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। इससे गन्ने की उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सहफसली खेती अपनाकर किसान कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते हैं।

Mohan Suryavanshi
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