Lakhimpur Kheri News: तिकुनिया हिंसा: आशीष मिश्रा को झटका, जमानत की शर्तों को मानने से SC का इनकार

Lakhimpur Kheri: सुप्रीम कोर्ट ने तिकुनिया हिंसा मामले में आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने की मांग खारिज की। अदालत ने गवाहों से जुड़े मुद्दों पर अधीनस्थ अदालत जाने को कहा।

Sharad Awasthi
Published on: 6 Aug 2026 4:17 PM IST
Tikunia violence: Ashish Mishra SC refuses to comply with bail conditions
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तिकुनिया हिंसा: आशीष मिश्रा को झटका, जमानत की शर्तों को मानने से SC का इनकार (Photo- Newstrack)

Lakhimpur Kheri News: लखीमपुर खीरी के चर्चित तिकुनिया हिंसा मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व गृह राज्य मंत्री के पुत्र आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनकी जमानत की शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया। साथ ही पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अपने पैतृक स्थान जाने की अनुमति देने की मांग भी खारिज कर दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आशीष मिश्रा की उस अर्जी पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने जमानत की शर्तों में और राहत देने तथा पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बेटियों के जन्मदिन में शामिल होने की दी गई दलील

सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मौजूदा प्रतिबंधों के कारण वह अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल इस अनुरोध पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने आवेदन खारिज कर दिया।

किसान पक्ष ने मुकदमे की सुनवाई पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान पीड़ित किसान पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुकदमे की सुनवाई के तरीके पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यवाही जल्दबाजी में चलाए जाने के कारण प्रत्यक्षदर्शियों सहित कई महत्वपूर्ण गवाहों को गवाहों की सूची से हटाया जा रहा है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि समस्या मुकदमे की सुनवाई के तरीके में है। उनका कहना था कि कई महत्वपूर्ण गवाहों को केवल इसलिए सूची से बाहर कर दिया गया क्योंकि कार्यवाही बहुत तेजी से चलाई जा रही है। उन्हें अगले ही दिन अदालत में पेश होने के लिए बुलाया जाता है और यदि वे उस दिन उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो उनका नाम गवाहों की सूची से हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वह इन चिंताओं को लेकर एक आवेदन दाखिल करना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले अधीनस्थ अदालत जाने को कहा

प्रशांत भूषण की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायतों को सबसे पहले अधीनस्थ अदालत के समक्ष उठाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि ऐसे आवेदन पर सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट क्यों विचार करे। पहले अधीनस्थ अदालत को बताया जाए कि कौन-कौन से गवाह इस मामले के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनका बयान क्यों जरूरी है।

गवाहों और दस्तावेजों का भी उठा मुद्दा

सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने यह भी बताया कि कुछ दस्तावेजों का अनुवाद किया जा रहा है। उन्होंने एक अलग मामले का भी जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

इस पर आशीष मिश्रा के वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि उस व्यक्ति को मिश्रा का समर्थक बताया जा रहा है। वहीं प्रशांत भूषण ने कहा कि जिस गवाह को कथित तौर पर धमकाया गया था, उसे बाद में गवाहों की सूची से हटा दिया गया और अब उसने मुकदमे की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मांगते हुए आवेदन दाखिल किया है।

गवाहों की अहमियत पर अधीनस्थ अदालत करेगी फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह उस आवेदन पर विचार करेगी, लेकिन यह भी दोहराया कि किन गवाहों का बयान जरूरी है और कौन से गवाह इस मामले के लिए महत्वपूर्ण हैं, इसका फैसला करने के लिए अधीनस्थ अदालत ही उचित मंच है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मुद्दों पर पहले निचली अदालत के समक्ष ही सुनवाई होनी चाहिए।

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वरिष्ठ संवाददाता, लखीमपुर खीरीLakhimpurSharadAwasthi@newstracksite.vocalwire.com
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