UP News: 4200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अब जलनिकासी की परीक्षा, सर्विस लेन बनी तालाब

UP News: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर तेज बारिश के बाद सर्विस लेन और आसपास के हिस्सों में जलभराव हुआ। पिलर 192 के पास ड्रेनेज पाइप टूटने से भी सड़क पर पानी गिरा।

Newstrack Network
Published on: 28 Sept 2026 12:55 AM IST
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UP News (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। उद्घाटन के ढाई महीने के भीतर सड़क धंसने, दरारें पड़ने और एलिवेटेड हिस्से से कंक्रीट गिरने जैसी घटनाओं के कारण सवालों में घिर चुके करीब 4,200 करोड़ रुपये के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अब बारिश ने जलनिकासी व्यवस्था की कमियां सामने ला दी हैं। शुक्रवार रात और शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद सरोजनीनगर में एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के कई हिस्सों में पानी भर गया, सरोजनीनगर थाना परिसर और पास का हनुमान मंदिर जलभराव से प्रभावित हुआ, जबकि बंथरा के जुनाबगंज चौराहे के पास पिलर संख्या 192 पर एलिवेटेड रोड का जलनिकासी पाइप टूट गया। इससे ऊपर जमा पानी सीधे नीचे सड़क पर तेज धार के रूप में गिरने लगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक अचानक वाहनों के शीशे पर पानी पड़ने से दृश्यता प्रभावित हुई और दुर्घटना का खतरा पैदा हुआ। यह घटनाक्रम इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि 63 किलोमीटर लंबे इस नए एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पहले ही कार्यदायी संस्था और निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। 26 जुलाई को करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क खिसकने के बाद एनएचएआई ने तकनीकी जांच कराई थी और पांच अगस्त को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था कि परियोजना के क्रियान्वयन और निगरानी में कमियां सामने आई हैं।

बारिश के दौरान सबसे स्पष्ट समस्या सरोजनीनगर थाने के आसपास दिखाई दी। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पानी निकालने के लिए नाले बनाए गए हैं, लेकिन मौके पर सामने आई स्थिति के मुताबिक सड़क से पानी नाले में पहुंचाने वाले कई निकास छेद सड़क की सतह के मुकाबले ऊंचे हैं। नतीजा यह हुआ कि पानी निकास बिंदु तक पहुंचने के बजाय सड़क और आसपास के निचले हिस्सों में जमा होने लगा। सरोजनीनगर थाने के पास पानी नाले में जाने के बजाय थाना परिसर और उससे सटे हनुमान मंदिर के आसपास भर गया। थाना परिसर और बरामदे तक पानी पहुंचने से पुलिसकर्मियों के साथ शिकायत लेकर आने वाले लोगों को भी पानी से होकर गुजरना पड़ा। यही समस्या बंथरा बाजार, कटी-बगिया और बनी के आसपास भी दिखाई दी, जहां एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के नीचे चलने वाले पुराने लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बारिश के दौरान जलभराव ने यातायात को प्रभावित किया।

पिलर 192 पर टूटा ड्रेनेज पाइप, ऊपर से नीचे सड़क पर गिरती रही पानी की तेज धार

जुनाबगंज चौराहे के पास समस्या अलग और संभावित रूप से अधिक खतरनाक थी। एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के पिलर संख्या 192 के पास लगाया गया जलनिकासी पाइप शुक्रवार रात तेज बारिश के दौरान टूट गया। इसके बाद शनिवार सुबह एलिवेटेड हिस्से पर जमा पानी पाइप के निर्धारित निकास से नीचे जाने के बजाय तेज धार के रूप में नीचे चल रही सड़क पर गिरने लगा। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना एनएचएआई के टोल फ्री नंबर और पीएनसी की पेट्रोलिंग टीम को दी। मौके पर पहुंची टीम ने क्रेन और नया पाइप लाकर मरम्मत कराने की बात कही। शनिवार रात प्रकाशित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार एनएचएआई ने टूटे ड्रेनेज पाइपों की मरम्मत का काम शुरू करा दिया है।

पाइप टूटने की घटना को अकेली तकनीकी खराबी मानना इसलिए मुश्किल है क्योंकि ठीक एक दिन पहले 25 सितंबर को एलिवेटेड हिस्से में बारिश के दौरान अलग-अलग जगहों से पानी रिसने की तस्वीरें भी सामने आई थीं। बंथरा क्षेत्र में एलिवेटेड संरचना के दो पिलरों के ऊपरी हिस्से के पास से पानी नीचे बहता दिखाई दिया था। यानी मौजूदा बारिश ने जलनिकासी व्यवस्था के दो अलग-अलग सवाल खड़े किए हैं, पहला एलिवेटेड हिस्से का पानी निर्धारित पाइपों से सुरक्षित रूप से नीचे पहुंच रहा है या नहीं और दूसरा जमीन पर बनी सर्विस रोड तथा पुराने हाईवे का पानी नालों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त ढाल और निकास पा रहा है या नहीं। इन दोनों समस्याओं की प्रकृति अलग है और केवल टूटा पाइप बदल देने से सर्विस रोड के जलभराव का समाधान नहीं होगा।

जुलाई में सड़क खिसकी, सितंबर में एलिवेटेड स्लैब से कंक्रीट गिरा, अब ड्रेनेज पर सवाल

जलभराव की ताजा समस्या को एक्सप्रेसवे के पिछले ढाई महीने के घटनाक्रम से अलग करके नहीं देखा जा सकता। 63 किलोमीटर लंबे छह लेन के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। परियोजना की लागत करीब 4,200 करोड़ रुपये बताई गई और दावा था कि लखनऊ-कानपुर की यात्रा लगभग 35 से 40 मिनट में पूरी हो सकेगी। कुल 63 किलोमीटर में करीब 17.52 किलोमीटर एलिवेटेड हिस्सा पुराने लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के ऊपर बनाया गया है, जबकि करीब 45.48 किलोमीटर ग्रीनफील्ड हिस्सा है।

लेकिन उद्घाटन के सिर्फ 13 दिन बाद 26 जुलाई को किलोमीटर 64 के पास करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क खिसकने की समस्या सामने आई। एनएचएआई ने पांच अगस्त को आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की और निर्माण एजेंसी, स्वतंत्र इंजीनियर तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी। इसके बाद टोल वसूली रोक दी गई और तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों को लगाया गया। एनएचएआई की कार्रवाई केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रही। सितंबर में पीएनसी इंफ्राटेक को सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई से संबंधित नई परियोजनाओं की निविदाओं में भाग लेने से तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी सामने आई। यह अनुबंध की शर्तों के तहत अधिकतम अवधि का प्रतिबंध बताया गया।

इसी बीच 13 सितंबर की रात बंथरा में आजाद गेस्ट हाउस के पास एलिवेटेड रोड के नीचे से करीब ढाई मीटर क्षेत्र में कंक्रीट टूटकर गिर गया। इसके बाद कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन बंद करनी पड़ी और एनएचएआई ने पीएनसी को नोटिस जारी किया। बाद में प्रभावित हिस्से का बड़ा भाग हटाकर नई स्लैब डाली गई और उच्च ग्रेड कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया। 19 सितंबर तक करीब 18 मीटर हिस्से की मरम्मत पूरी किए जाने की जानकारी दी गई थी। ऐसे में अब जलनिकासी पाइप टूटने और सर्विस रोड पर पानी जमा होने की घटनाओं ने परियोजना के एक और तकनीकी पहलू को जांच के दायरे में ला दिया है।

आईआईटी खड़गपुर की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार, करीब 80 नमूनों की हुई जांच

एक्सप्रेसवे की शुरुआती खराबियों का कारण जानने के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम ने अगस्त के पहले सप्ताह में प्रभावित हिस्सों का निरीक्षण किया था। टीम ने सड़क और उसकी निचली परतों से करीब 80 नमूने लेकर प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे। 22 सितंबर तक एनएचएआई को इसकी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट नहीं मिली थी। जांच का उद्देश्य केवल खराब हिस्से की मरम्मत बताना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि इतनी नई सड़क में खिसकाव और दूसरी खराबियां आखिर क्यों सामने आईं तथा स्थायी समाधान क्या होना चाहिए। एलिवेटेड हिस्से में सितंबर में कंक्रीट गिरने के बाद वहां अलग से नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट कराने का निर्णय भी लिया गया, जिसमें संरचना को तोड़े बिना उसकी मजबूती और आंतरिक स्थिति की जांच की जाती है।

ताजा जलभराव के मामले में अभी ऐसी किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच का परिणाम उपलब्ध नहीं है जिससे निश्चित रूप से कहा जा सके कि निकास छेदों की ऊंचाई डिजाइन की गलती है, निर्माण संबंधी कमी है या आसपास की सड़क और मिट्टी के स्तर में बदलाव के कारण पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है। मौके की स्थिति जरूर यह सवाल उठाती है कि यदि नाला मौजूद है लेकिन सड़क का पानी उसमें प्रवेश ही नहीं कर पा रहा, तो जलनिकासी व्यवस्था अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर रही। इसी तरह एलिवेटेड हिस्से का ड्रेनेज पाइप टूटना केवल असुविधा का मामला नहीं है, क्योंकि ऊंचाई से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे चल रहे यातायात पर गिरना दृश्यता और वाहन नियंत्रण दोनों को प्रभावित कर सकता है।

नई सड़क पर लगातार खराबियों के बाद एनएचएआई पहले ही कर चुका है सख्त कार्रवाई

इस एक्सप्रेसवे के मामले में गुणवत्ता को लेकर सवाल केवल स्थानीय शिकायतों तक सीमित नहीं हैं। पांच अगस्त को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में एनएचएआई ने स्वीकार किया था कि परियोजना में समस्या सामने आने के बाद रियायतग्राही, स्वतंत्र इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इसके बाद पीएनसी इंफ्राटेक पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया और टोल वसूली भी निलंबित रखी गई। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार एनएचएआई ने टोल राजस्व के नुकसान के लिए कंपनी से प्रतिदिन करीब 42 लाख रुपये की भरपाई की मांग भी की।

इस पृष्ठभूमि में सरोजनीनगर, बंथरा, जुनाबगंज, कटी-बगिया और बनी में सामने आई जलनिकासी की समस्या सामान्य मानसूनी जलभराव से अधिक महत्व रखती है। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार और जुलाई में ही यातायात के लिए खोले गए उच्च गति वाले मार्ग से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि उसकी सड़क सतह के साथ जलनिकासी और एलिवेटेड संरचना की ड्रेनेज प्रणाली भी भारी बारिश को ध्यान में रखकर काम करे। अभी टूटे पाइप की मरम्मत शुरू हो गई है, लेकिन बड़ा सवाल सर्विस रोड और पुराने हाईवे के उन हिस्सों का है जहां पानी नाले मौजूद होने के बावजूद सड़क पर जमा हो रहा है। एक्सप्रेसवे पर पहले सड़क खिसकने और एलिवेटेड हिस्से से कंक्रीट गिरने के बाद तकनीकी जांच चल ही रही है, अब लगातार बारिश ने यह संकेत दिया है कि इस जांच और सुधार की प्रक्रिया में पूरे ड्रेनेज नेटवर्क, सड़क की ढाल, नालों के इनलेट और एलिवेटेड हिस्से के प्रत्येक जलनिकासी पाइप की भी तकनीकी जांच जरूरी है, क्योंकि किसी उच्च गति वाले एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता केवल उसकी सड़क की मजबूती से नहीं, बारिश के पानी को सुरक्षित और तेजी से बाहर निकालने की क्षमता से भी तय होती है।

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