UP News: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टूटी रफ्तार, मरम्मत के चलते 3 किमी डायवर्जन; सफर में लग रहा सवा घंटा

UP News: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत और 3 किमी डायवर्जन से यातायात प्रभावित है। 45-50 मिनट का सफर अब कई यात्रियों को करीब सवा घंटे में पूरा करना पड़ रहा है।

Newstrack Network
Published on: 14 Aug 2026 7:37 PM IST (Updated on: 14 Aug 2026 7:38 PM IST)
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UP News (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। जिस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को दोनों शहरों के बीच यात्रा करीब 45 मिनट में पूरी कराने के दावे के साथ खोला गया था, वहां लगातार चल रही मरम्मत ने फिलहाल हाईस्पीड सफर को धीमा कर दिया है। कानपुर से लखनऊ आने वाली दिशा में कुछ हिस्सों को पूरी तरह उखाड़कर दोबारा बनाया जा रहा है, कहीं यातायात एक लेन में समेट दिया गया है और किलोमीटर 36 के आसपास मरम्मत के कारण करीब तीन किलोमीटर का अस्थायी डायवर्जन लागू है। नतीजा यह है कि सामान्य परिस्थितियों में 45-50 मिनट के लिए डिजाइन किया गया सफर कई यात्रियों को अब करीब सवा घंटे में पूरा हो रहा है। एक्सप्रेसवे जुलाई में खुलने के समय 45 मिनट की यात्रा के दावे के साथ प्रस्तुत किया गया था।

कानपुर-लखनऊ लेन में किलोमीटर 64.4 से 64.5 के आसपास करीब 70 मीटर सड़क को दोबारा उखाड़कर बनाया जा रहा है। मरम्मत के दौरान तीन लेन के यातायात को कुछ दूरी तक एक लेन से निकाला गया। किलोमीटर 36 के आसपास भी लगभग 100 मीटर हिस्से की ऊपरी संरचना हटाकर नई लेयरिंग और डामरीकरण का काम चल रहा है, जिसके कारण पूरी लेन का हिस्सा बंद कर वाहनों को अस्थायी कट से दूसरी ओर भेजा जा रहा है।

यह वही एक्सप्रेसवे है जहां उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद सड़क धंसने और परत खराब होने की शिकायतें सामने आईं। उसके बाद NHAI ने परियोजना की गुणवत्ता की जांच, मरम्मत और निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई शुरू की। टोल भी मरम्मत अवधि में रोक दिया गया। अगस्त के पहले सप्ताह तक टोल मुक्त होने के बाद यातायात में बड़ा उछाल दर्ज हुआ था। NHAI के आंकड़ों के अनुसार पहले औसतन करीब 8,869 वाहन प्रतिदिन गुजर रहे थे, जबकि टोल हटने के बाद एक दिन में यातायात 20-22 हजार तक पहुंच गया था।

अब छोटे वाहन अधिक, भारी वाहनों पर प्रतिबंध का असर

ताजा स्थिति में बड़े व्यावसायिक वाहनों पर प्रतिबंध और मरम्मत संबंधी यातायात नियंत्रण के कारण वाहन संरचना बदली है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में छोटे वाहनों की संख्या औसतन करीब तीन हजार प्रतिदिन बढ़ी है।

इसका आर्थिक कारण साफ है। सामान्य परिस्थितियों में कार के लिए एक्सप्रेसवे का एकतरफा टोल ₹275 निर्धारित था। टोल स्थगित होने के बाद कानपुर, उन्नाव और बंथरा की ओर जाने वाले वे छोटे वाहन भी इस रास्ते को चुनने लगे जिन्हें पहले पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर कम खर्च वाला विकल्प मिलता था।

लेकिन टोल बचत के साथ अब समय का लाभ घट रहा है। मरम्मत वाले हिस्सों में वाहन को गति कम करनी पड़ती है और अचानक लेन बदलने से हाईस्पीड यात्रा की निरंतरता टूटती है।

तीन किलोमीटर डायवर्जन क्यों बड़ी समस्या

प्रवेश-नियंत्रित एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि वाहन लगभग स्थिर गति से चलता है। यदि बीच में केवल 100 मीटर सड़क खराब हो लेकिन उसे ठीक करने के लिए तीन किलोमीटर तक यातायात दूसरी लेन या अस्थायी मार्ग पर ले जाना पड़े, तो प्रभाव खराब हिस्से की वास्तविक लंबाई से कई गुना अधिक हो जाता है।

एक ही स्थान पर यातायात एक लेन में आने से पीछे वाहनों की कतार बन सकती है। खासकर जब टोल फ्री होने से वाहनों की संख्या पहले से अधिक हो, तो थोड़े समय का अवरोध पूरे कॉरिडोर की औसत यात्रा गति घटा देता है।

टोल फ्री होने का उलटा असर भी

टोल रोकना यात्रियों को वित्तीय राहत देता है, लेकिन इसका एक दिलचस्प यातायात प्रभाव भी सामने आया है। जो वाहन पहले महंगे टोल के कारण पुराने लखनऊ-कानपुर मार्ग को चुन रहे थे, वे अब एक्सप्रेसवे पर आ गए हैं। 6 अगस्त को दर्ज ट्रैफिक उछाल में यही प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई दी थी।

यानी सड़क की क्षमता का एक हिस्सा अब उन अतिरिक्त वाहनों से भर रहा है जो सामान्य टोल व्यवस्था में यहां शायद नहीं आते।

इसलिए मरम्मत पूरी होने तक एक असामान्य परिस्थिति बनी हुई है—सड़क की कुछ लेन कम उपलब्ध हैं, लेकिन टोल न होने से इस्तेमाल करने वाले वाहन अधिक हैं।

अब असली लक्ष्य केवल गड्ढा भरना नहीं

NHAI के लिए चुनौती यह नहीं है कि दिखाई दे रहे खराब हिस्सों पर नया डामर बिछा दिया जाए। पहले की जांच में सड़क की नमी, जलनिकासी, शोल्डर और नीचे की परतों को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। इसलिए जिन हिस्सों को 70 या 100 मीटर तक उखाड़कर बनाया जा रहा है वहां मरम्मत की टिकाऊ गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण होगी।

यदि केवल ऊपरी परत बदली जाए लेकिन पानी फिर नीचे पहुंच जाए तो अगली भारी बारिश के बाद वही समस्या लौट सकती है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के लिए फिलहाल सबसे बड़ी विडंबना यही है—टोल नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जिस परियोजना का सबसे बड़ा वादा समय बचाना था, मरम्मत के कारण उसी समय की बचत कम हो गई है।

अब यात्रियों के लिए वास्तविक राहत तब होगी जब सड़क की मरम्मत पूरी हो, सभी लेन एक साथ खुलें, डायवर्जन हटें और एक्सप्रेसवे लगातार ऐसी स्थिति में रहे कि 45-50 मिनट की यात्रा केवल उद्घाटन का दावा नहीं बल्कि रोजमर्रा का सामान्य अनुभव बन सके।

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