Lucknow News: 5 साल के बच्चे की किडनी में खतरनाक ट्यूमर, SGPGIMS में जटिल सर्जरी से बची जान

Lucknow News: SGPGIMS लखनऊ में 5 साल के बच्चे की जटिल सर्जरी कर किडनी से IVC और बाईं रीनल वेन तक फैला ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला गया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 11 Aug 2026 9:58 AM IST
Lucknow News: 5 साल के बच्चे की किडनी में खतरनाक ट्यूमर, SGPGIMS में जटिल सर्जरी से बची जान
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Lucknow SGPGIMS News

Lucknow News: लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) में कानपुर के 5 साल के बच्चे की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। बच्चे की दाईं किडनी में गंभीर ट्यूमर था, जो एक प्रमुख रक्त वाहिका तक फैल गया था। डॉक्टरों ने प्रोफेसर बसंत कुमार की देखरेख में जटिल ऑपरेशन कर ट्यूमर और रक्त वाहिका में मौजूद ट्यूमर थ्रोम्बस को सफलतापूर्वक निकाल दिया। सर्जरी के बाद बच्चे की हालत ठीक रही और अब उसके आगे के इलाज के तौर पर कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की योजना बनाई गई है।

करीब एक साल से पेट में थी गांठ

बच्चे के पेट में करीब एक साल से गांठ थी। जांच में उसे दाईं किडनी का विल्म्स ट्यूमर (Wilms’ Tumor) पाया गया। यह ट्यूमर किडनी से निकलकर इन्फीरियर वेना कावा यानी आईवीसी (Inferior Vena Cava) तक फैल गया था। आईवीसी शरीर की प्रमुख नस है, जो शरीर से रक्त को वापस हृदय तक पहुंचाने का काम करती है।बच्चे का कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वहां उसे कीमोथेरेपी (Chemotherapy) के पांच चक्र दिए गए। इसके बाद जटिल सर्जरी के लिए बच्चे को एसजीपीजीआईएमएस रेफर किया गया, जहां उसे प्रोफेसर बसंत कुमार के पास लाया गया।

ट्यूमर आईवीसी से होते हुए लिवर के पीछे तक पहुंचा था

SGPGI में बच्चे की विस्तृत रेडियोलॉजिकल जांच (Radiological Evaluation) की गई। जांच में सामने आया कि ट्यूमर से बना थ्रोम्बस आईवीसी में काफी ऊपर तक पहुंच गया था। यह लिवर के पीछे स्थित रेट्रोहेपेटिक आईवीसी (Retrohepatic IVC) तक फैल चुका था। इसके अलावा ट्यूमर थ्रोम्बस बाईं किडनी की नस यानी लेफ्ट रीनल वेन (Left Renal Vein) तक भी पहुंच गया था।ऐसी स्थिति में सर्जरी काफी जटिल मानी जाती है, क्योंकि ट्यूमर के साथ रक्त वाहिका में फैले थ्रोम्बस को भी सुरक्षित तरीके से निकालना होता है।

डॉक्टरों ने किया जटिल ऑपरेशन

बच्चे की दाईं किडनी और उससे जुड़ी संरचनाओं को निकालने के लिए राइट नेफ्रोयूरेटेरेक्टॉमी (Right Nephroureterectomy) की गई। इसके साथ ही आईवीसी में फैले ट्यूमर थ्रोम्बस को निकालने के लिए आईवीसी थ्रोम्बेक्टॉमी (IVC Thrombectomy) की गई।सर्जरी के दौरान ट्यूमर थ्रोम्बस लिवर के पीछे आईवीसी में काफी ऊपर तक और बाईं रीनल वेन तक पहुंचा हुआ पाया गया। प्रोफेसर बसंत कुमार और उनकी टीम ने ट्यूमर और रक्त वाहिका में फैले थ्रोम्बस को सफलतापूर्वक निकाल दिया।सर्जरी के बाद बच्चे की हालत में कोई बड़ी जटिलता नहीं आई और उसका पोस्टऑपरेटिव रिकवरी (Postoperative Recovery) सामान्य रही।

अब आगे कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी होगी

सर्जरी के बाद बच्चे के कैंसर के इलाज को आगे भी जारी रखा जाएगा। डॉक्टरों ने उसके लिए आगे कीमोथेरेपी (Chemotherapy) और रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य कैंसर के इलाज को पूरा करना और बीमारी के दोबारा फैलने के खतरे को कम करना है।

नजरअंदाज न करें बच्चों के पेट में गांठ

SGPGIAMS के प्रोफेसर बसंत कुमार ने कहा कि बच्चे के पेट में लगातार बनी रहने वाली गांठ या सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। माता-पिता और देखभाल करने वालों को ऐसी स्थिति में समय रहते बाल सर्जन (Pediatric Surgeon) से सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान होने से ट्यूमर के बढ़ने और आसपास के अंगों तथा शरीर की प्रमुख रक्त वाहिकाओं तक उसके फैलने से पहले इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है। इस मामले में भी बच्चे के ट्यूमर के प्रमुख रक्त वाहिका तक पहुंच जाने के बावजूद प्रोफेसर बसंत कुमार और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी के जरिए इसे सफलतापूर्वक निकाल दिया।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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