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‘राजभर चाचा न्याय करो’... 68,500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने घेरा मंत्री आवास
68500 Assistant Teacher Recruitment: यूपी में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति और आरक्षण की मांग को लेकर मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास पर प्रदर्शन किया।
68500 Assistant Teacher Recruitment
68500 Assistant Teacher Recruitment: उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 का विवाद एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। नियुक्ति और आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास का घेराव किया। बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थी मंत्री के आवास के दरवाजे पर बैठ गए और करीब आधे घंटे तक नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘राजभर चाचा न्याय करो’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की भी सूचना है।
मंत्री आवास के बाहर बैठकर की नारेबाजी
अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 में निकली 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद कई साल बीतने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार अलग-अलग स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इससे पहले सितंबर में भी अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास और भाजपा प्रदेश कार्यालय पर प्रदर्शन किया था।
सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास का रुख किया। अभ्यर्थी आवास के बाहर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि लंबे समय से लंबित मामले का सरकार को अब समाधान करना चाहिए।
(वीडियो क्रेडिट- राजन कश्यप)
राजभर ने बातचीत के लिए बुलाया
प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अभ्यर्थियों को बातचीत के लिए बुलाया। राजभर ने उनसे सभी संबंधित दस्तावेज लेकर आने को कहा। उन्होंने अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन भी दिया और कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय लेने का प्रयास किया जाएगा।
अभ्यर्थियों के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के उच्च स्तर तक पहुंचाने और नियुक्ति का रास्ता साफ कराने की मांग कर रहे हैं।
क्या है 68,500 शिक्षक भर्ती का विवाद?
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती वर्ष 2018 में आयोजित की गई थी। विवाद मुख्य रूप से आरक्षण और न्यूनतम उत्तीर्णांक में छूट से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग समेत संबंधित श्रेणियों को नियमानुसार पांच प्रतिशत की छूट का लाभ नहीं मिला।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पांच प्रतिशत छूट लागू होने पर 150 अंकों की परीक्षा में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत को उत्तीर्णांक माना जाना चाहिए। इसी आधार पर वे परिणाम संशोधित कर नई चयन सूची जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं।
(वीडियो क्रेडिट- राजन कश्यप)
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति का भी मुद्दा
इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति भी महत्वपूर्ण है। जुलाई 2026 में आयोग ने 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 में ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता अंक की छूट देने संबंधी अपनी पूर्व संस्तुति को बरकरार रखा था। आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से परिणाम संशोधित करने की सिफारिश भी की थी।
आयोग की संस्तुति के अनुसार, 150 में 60 अंक हासिल करने वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मानने और उनकी सूची उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। अब अभ्यर्थी सरकार से आयोग की संस्तुति पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
(वीडियो क्रेडिट- राजन कश्यप)
आठ साल बाद भी नियुक्ति की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब आठ साल बीत चुके हैं, लेकिन विवाद से प्रभावित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मुद्दा अभी तक पूरी तरह हल नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि पांच प्रतिशत छूट के प्रावधान को लागू किया जाता है तो पात्र अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम जारी कर नई चयन सूची तैयार की जाए और इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए।
फिलहाल, राजभर की ओर से मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने के आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उनका मामला सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचेगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार पांच प्रतिशत छूट, संशोधित परिणाम और नई चयन सूची को लेकर क्या निर्णय लेती है।


