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‘बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते…’ अमित शाह के आते ही अखिलेश का तंज! एक लाइन में कह दी बड़ी बात
Akhilesh Yadav Post: अमित शाह के लखनऊ दौरे और बीजेपी की 2027 चुनावी तैयारी के बीच अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा- 'बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते…' जानिए इस पोस्ट के सियासी मायने।
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Akhilesh Yadav Post: लखनऊ की सियासत में आज कुछ ऐसा नजारा है कि एक तरफ बीजेपी 2027 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शायरी के अंदाज में तंज कस दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लखनऊ पहुंचकर बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में चुनावी रणनीति का खाका तैयार कर रहे हैं और इसी बीच अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा- ‘बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते…’। अब इस एक लाइन ने सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि आखिर अखिलेश के निशाने पर कौन है? क्या यह अमित शाह के दौरे पर तंज है या फिर 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी को कोई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश?
अखिलेश यादव ने यह पोस्ट 30 अक्टूबर को की। उस समय अमित शाह लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल हो चुके थे। पोस्ट में अखिलेश ने किसी नेता का नाम नहीं लिया है और न ही कोई दूसरा संदर्भ दिया है। हालांकि, पोस्ट का समय और शाह का लखनऊ दौरा एक ही राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े होने के कारण इसे बीजेपी की चुनावी तैयारियों पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
अमित शाह के लखनऊ आने के पीछे क्या है रणनीति?
अमित शाह का लखनऊ दौरा सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। बीजेपी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2027) को देखते हुए संगठन को सक्रिय करने की तैयारी तेज कर दी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शाह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद हैं। प्रदेशभर से करीब 2,850 नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है।
इस बैठक का मुख्य मकसद चुनाव से पहले संगठन की ताकत का आकलन करना और आगे की रणनीति तय करना है। इसमें बूथ प्रबंधन (Booth Management), सामाजिक समीकरण (Social Equations), कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। बीजेपी की कोशिश है कि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले संगठन की हर कड़ी को मजबूत कर लिया जाए।
MLC चुनाव के नतीजों ने बढ़ाई बीजेपी की चिंता?
अमित शाह के दौरे का समय भी काफी अहम है। हाल ही में उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजे आए हैं। इन चुनावों में बीजेपी को छह सीटों पर जीत मिली, जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें हासिल कीं। नतीजों के बाद बीजेपी के सामने अपने प्रदर्शन की समीक्षा करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने की चुनौती है, जहां पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में एमएलसी चुनाव के नतीजों पर चर्चा और संगठन की कमजोरियों को दूर करने की रणनीति महत्वपूर्ण हो सकती है। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर रहेगा कि विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी स्तर पर संगठनात्मक ढिलाई न रहे। अमित शाह का अनुभव और चुनाव प्रबंधन की उनकी शैली इस बैठक को और अहम बना रही है।
अखिलेश के तंज के पीछे 2027 का सियासी संदेश?
अखिलेश यादव की पोस्ट को सिर्फ एक शायरी मानकर नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सपा के बीच 2027 के चुनाव को लेकर मुकाबले की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। अखिलेश यादव लगातार पीडीए (PDA) के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बीजेपी की रणनीति अपने पुराने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने और नए वर्गों तक पहुंच बनाने की है।
अखिलेश की इस पोस्ट का एक राजनीतिक पहलू यह भी हो सकता है कि वह बीजेपी के बड़े चुनावी मंथन के बीच विपक्ष की मौजूदगी और अपनी राजनीतिक सक्रियता का संदेश देना चाहते हैं। हालांकि, पोस्ट में अमित शाह का नाम नहीं है, इसलिए इसे सीधे शाह पर हमला बताने के बजाय उनके दौरे के बीच आया राजनीतिक तंज कहना ज्यादा सही होगा।
2027 में किसकी बिछेगी सियासी बिसात?
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी और समाजवादी पार्टी, दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई होगा। बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रही है, जबकि सपा सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के बेहतर प्रदर्शन और हालिया एमएलसी चुनाव में सीटें बढ़ने से पार्टी को अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने का मौका मिला है।
दूसरी तरफ बीजेपी के सामने सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने, संगठन में तालमेल बनाए रखने और विपक्ष के सवालों का जवाब देने की चुनौती है। अमित शाह का लखनऊ दौरा इसी बड़ी चुनावी तैयारी का हिस्सा है।


