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VIDEO: अखिलेश यादव का 'सुदर्शनधारी' अवतार, हाथ में दिखा त्रिशूल-डमरू और चक्र, क्या है संदेश?
Akhilesh Yadav Viral Video: अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान अखिलेश यादव त्रिशूल, डमरू और चक्र के साथ नजर आए। जानें रामलला के दर्शन और केदारेश्वर धाम पर क्या बोले सपा प्रमुख।
अयोध्या। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का अयोध्या दौरे के दौरान एक अलग अंदाज देखने को मिला। श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में पहुंचे सपा प्रमुख हाथ में त्रिशूल, डमरू और चक्र लिए नजर आए। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। धार्मिक प्रतीकों के साथ अखिलेश के इस अंदाज को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय, समानता, प्रेम, करुणा और बंधुत्व की बात कही। उनके संबोधन में भेदभाव, महिलाओं के अपमान, युवाओं के सपनों और वंचित वर्गों पर होने वाले अत्याचार जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आए।
अयोध्या में यह कार्यक्रम पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के पैतृक आवास कृष्णापुर में आयोजित किया गया था। अखिलेश यादव ने कविता के जरिए अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी।” उनके इस बयान और त्रिशूल-चक्र वाले रूप को सपा की राजनीतिक-सामाजिक संदेश देने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
रामलला के दर्शन पर अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अयोध्या दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने राम मंदिर में दर्शन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपनी टीम के साथ रामलला के दर्शन करने आएंगे। सपा प्रमुख ने बताया कि उन्होंने पहले संकल्प लिया था कि इटावा के सैफई क्षेत्र में बन रहे केदारेश्वर धाम का निर्माण पूरा होने के बाद ही अयोध्या में रामलला के दर्शन करेंगे।
अखिलेश यादव ने पूर्व मंत्री पवन पांडेय से दर्शन के लिए तारीख तय करने को भी कहा, ताकि वह अपनी टीम के साथ राम मंदिर पहुंच सकें। उनके इस बयान को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि राम मंदिर और अयोध्या का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।
पहले भी अयोध्या आए, लेकिन नहीं किए रामलला के दर्शन
अखिलेश यादव इससे पहले भी चुनावी कार्यक्रमों के सिलसिले में अयोध्या पहुंच चुके हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अयोध्या में रोड शो किया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय क्षेत्र में सपा के चुनावी अभियान में हिस्सा लिया। जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण को लेकर भी उन्होंने कहा था कि वह समारोह के बाद दर्शन करने आएंगे।
अब श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे अखिलेश ने रामलला के दर्शन का कार्यक्रम जल्द तय करने की बात कही है। इससे उनके अगले अयोध्या दौरे को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, दर्शन की तारीख की आधिकारिक घोषणा सामने आने तक उनके कार्यक्रम को संभावित ही माना जाना चाहिए।
क्या है अखिलेश यादव का केदारेश्वर धाम प्रोजेक्ट?
इटावा के सैफई क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 50 बीघा क्षेत्र में फैले इस परिसर का शिलान्यास अखिलेश यादव ने 7 मार्च 2021 को किया था। मंदिर के मुख्य भवन की वास्तुकला उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर से प्रेरित बताई जाती है, जबकि परिसर की बनावट में तमिलनाडु के तंजावुर स्थित बृहदेश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली की झलक प्रस्तावित है।
मंदिर के निर्माण की प्रगति और उद्घाटन की तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निश्चित समयसीमा का दावा नहीं किया जा सकता। अखिलेश यादव ने इसी निर्माण को रामलला के दर्शन से जुड़े अपने संकल्प का आधार बताया है।
फिलहाल, अयोध्या में त्रिशूल और चक्र के साथ अखिलेश यादव का वीडियो, भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों पर उनका संबोधन और रामलला के दर्शन का ऐलान चर्चा में है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केदारेश्वर धाम के निर्माण की स्थिति और सपा प्रमुख के अगले कार्यक्रम के बीच राम मंदिर दर्शन की तारीख कब तय होती है।
अयोध्या दौरे से जुड़ी एक और अहम राजनीतिक अपडेट यह है कि अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 2027 का विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ने की चुनौती भी दी। उन्होंने दावा किया कि सपा ने पवन पांडेय को अयोध्या से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है और भाजपा इस सीट पर उम्मीदवार तय करने को लेकर असमंजस में है।
इस पर भाजपा नेताओं ने भी पलटवार किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर अखिलेश पर निशाना साधा, जबकि ब्रजेश पाठक ने भी उनके अयोध्या दौरे पर सवाल उठाए।
इस तरह अखिलेश का त्रिशूल-डमरू और सुदर्शन चक्र वाला अंदाज, राम मंदिर दर्शन की घोषणा और योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती, तीनों घटनाक्रम उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बहस को तेज कर रहे हैं। हालांकि, इसे सपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा मानना राजनीतिक विश्लेषण है, न कि पार्टी की ओर से घोषित कोई औपचारिक रणनीति।

