निजी स्कूल के कर्मचारी सीधे हाई कोर्ट में नहीं दे सकते सेवा विवाद को चुनौती? याचिका खारिज

Allahabad High Court Teacher Termination Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आजमगढ़ की शिक्षिका नूतन राय की बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान का सेवा विवाद सामान्य परिस्थितियों में अनुच्छेद 226 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है।

Newstrack Network
Published on: 3 Oct 2026 5:25 PM IST
Teacher Termination Case
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 Allahabad High Court 

Allahabad High Court Teacher Termination Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निजी ट्रस्ट की ओर से संचालित गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच सेवा संबंधी विवादों को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे संस्थानों में कर्मचारी और प्रबंधन के बीच सेवा विवाद को सामान्य परिस्थितियों में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती। आजमगढ़ की एक शिक्षिका की बर्खास्तगी से जुड़े मामले में अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का विवाद मूल रूप से निजी नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संविदात्मक सेवा संबंध से जुड़ा होता है।

शिक्षिका नूतन राय ने बर्खास्तगी को दी थी चुनौती

यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने आजमगढ़ निवासी शिक्षिका नूतन राय की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। शिक्षिका ने निजी ट्रस्ट की ओर से संचालित एक गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान से अपनी बर्खास्तगी को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने इस सेवा संबंधी विवाद को संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार के तहत उठाया था।

मामले में अदालत ने संस्थान की प्रकृति और शिक्षिका के सेवा संबंधों को ध्यान में रखते हुए याचिका की सुनवाई योग्यता पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि किसी संस्था में शिक्षण कार्य होने मात्र से वह पूरी तरह निजी और गैर-सहायता प्राप्त संस्था के प्रत्येक सेवा विवाद के मामले में अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार के दायरे में नहीं आ जाती। यानी केवल शिक्षण संस्थान होने के आधार पर उसके कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच हर सेवा विवाद को संवैधानिक रिट के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती।

बर्खास्तगी के खिलाफ दूसरे कानूनी उपायों का रास्ता बंद नहीं

हालांकि, हाई कोर्ट के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि निजी विद्यालय के किसी कर्मचारी के पास बर्खास्तगी के खिलाफ कोई कानूनी उपाय ही नहीं बचता। ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी उपाय संस्था की प्रकृति, नियुक्ति की शर्तों और संबंधित शिक्षा तथा सेवा कानूनों पर निर्भर करेंगे।

अदालत ने इस मामले में केवल यह निर्धारित किया है कि प्रस्तुत सेवा विवाद संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के रूप में सुनवाई योग्य नहीं है। इस प्रकार फैसले में रिट याचिका की सुनवाई की सीमा स्पष्ट की गई है, न कि निजी विद्यालय के कर्मचारियों के अन्य संभावित कानूनी उपायों को समाप्त किया गया है।

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