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आजम खान को जमानत, फिर भी नहीं मिली पूरी राहत! BJP प्रवक्ता ने ऐसा क्या कह दिया?
Azam Khan Bail: आजम खान और उनके बेटे को दो पैन कार्ड मामलों में जमानत मिलने के बाद भाजपा प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने निशाना साधा। जानें दोषसिद्धि पर रोक को लेकर उन्होंने क्या कहा।
BJP Reaction
Azam Khan Bail: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे से जुड़े दो पैन कार्ड मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर भाजपा प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दोनों को जमानत मिलने के बावजूद दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगी है। भाजपा प्रवक्ता ने आजम खान और उनके बेटे पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिता-पुत्र के खिलाफ मामलों की लंबी सूची है और उन्हें आगे भी अदालतों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि पिता-पुत्र के कथित घोटालों और विवादों की सूची इतनी लंबी है कि उन्हें कानूनी मामलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने गरीब जनता को लूटा और सरकारी धन का दुरुपयोग किया। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता आजम खान और उनके बेटे के राजनीतिक और कानूनी विवादों से परिचित है।
जमानत और दोषसिद्धि पर रोक अलग-अलग
भाजपा प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर की है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक हमले का आधार बनाते हुए कहा कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति दोषमुक्त हो गया है।
उन्होंने कहा, “अदालत ने इनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है। मतलब साफ है कि दोषसिद्धि फिलहाल बरकरार है।” आजम खान और उनके बेटे पर फर्जीवाड़े के मामले में निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दोनों को अपने खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
सपा नेता पर तीखी टिप्पणी
अंकुश त्रिपाठी ने अपने बयान में आजम खान और उनके बेटे के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता उन्हें अच्छी तरह जानती है और उन्हें अपने मामलों में अदालतों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों को आगे कानूनी चुनौतियों का सामना करना होगा।
गौरतलब है कि जमानत और दोषसिद्धि पर रोक दो अलग-अलग कानूनी राहतें हैं। जमानत मिलने से दोषसिद्धि अपने आप समाप्त नहीं होती। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक की मांग खारिज होने का अर्थ यह भी नहीं है कि दोषमुक्ति के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।


