विग उतारकर दुनिया के सामने आईं मास्टरशेफ पंकज भदौरिया, कैंसर से जंग की कहानी ने जीता महिलाओं का दिल

Lucknow News: मास्टरशेफ विजेता पंकज भदौरिया ने स्तन कैंसर से जंग के दौरान बाल झड़ने का दर्द साझा किया। विग उतारकर उन्होंने हजारों महिलाओं को आत्मविश्वास का संदेश दिया।

Newstrack Network
Published on: 1 Nov 2026 10:24 PM IST
विग उतारकर दुनिया के सामने आईं मास्टरशेफ पंकज भदौरिया, कैंसर से जंग की कहानी ने जीता महिलाओं का दिल
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फोटो-सोशल मीडिया

Lucknow News: कैंसर के इलाज के दौरान जब उनके बाल झड़ने लगे तो देश की पहली मास्टरशेफ विजेता पंकज भदौरिया भी भीतर तक टूट गई थीं। अपने घने और लंबे बालों से बेहद प्यार करने वाली पंकज के लिए कीमोथेरेपी के कारण उन्हें खो देना किसी सदमे से कम नहीं था। लेकिन उन्होंने अपनी बदली हुई शक्ल को दुनिया से छिपाने के बजाय स्वीकार करने का फैसला किया। सार्वजनिक रूप से अपनी विग उतारकर उन्होंने उन महिलाओं को संदेश दिया जो कैंसर के कारण अपने शरीर में आए बदलावों से शर्मिंदगी, भय और आत्मविश्वास की कमी महसूस करती हैं। उनकी इस पहल के बाद अनेक महिलाओं ने उनसे संपर्क किया और बताया कि पंकज का साहस देखकर उन्हें भी अपने बदले हुए रूप को स्वीकार करने की ताकत मिली है। वर्ष 2010 में मास्टरशेफ इंडिया का पहला खिताब जीतने वाली पंकज अब कैंसर के खिलाफ अपनी लड़ाई को दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा में बदल रही हैं। 

नियमित स्वास्थ्य जांच में सामने आया था शुरुआती कैंसर

पंकज भदौरिया को इस वर्ष नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान स्तन कैंसर का पता चला था। शुरुआती जांच में उन्हें डक्टल कार्सिनोमा इन सिटू (DCIS) बताया गया। इसे स्तन कैंसर की शून्य अवस्था यानी स्टेज-0 माना जाता है, जिसमें असामान्य कैंसर कोशिकाएं दूध की नलिकाओं के भीतर सीमित रहती हैं। उस समय डॉक्टरों को उम्मीद थी कि सर्जरी से उपचार पूरा हो जाएगा। लेकिन मई के आखिर में ऑपरेशन के बाद हुई विस्तृत जांच में दो मिलीमीटर का इनवेसिव HER2-पॉजिटिव कैंसर भी सामने आया। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें कीमोथेरेपी के 12 सत्र और एक वर्ष की टारगेटेड थेरेपी कराने की सलाह दी। पंकज ने 28 मई को सार्वजनिक रूप से अपनी बीमारी की जानकारी दी थी। 

कीमोथेरेपी ने शरीर को कमजोर किया, बाल झड़ने से लगा गहरा सदमा

कीमोथेरेपी के दौरान पंकज को कमजोरी, संक्रमण, त्वचा में बदलाव, दर्द और पाचन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खून की जांच से जुड़े मानकों में गिरावट भी उपचार की चुनौती बनी। विशेष रूप से दूसरे कीमोथेरेपी सत्र के बाद उनका स्वास्थ्य काफी प्रभावित हुआ। पंकज ने अगस्त में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया था कि बाल झड़ने की आशंका पहले से होने के बावजूद जब वास्तव में ऐसा हुआ तो उसे स्वीकार करना बेहद कठिन था। उन्होंने कीमोथेरेपी शुरू होने से पहले अपने लंबे बाल छोटे भी करवा लिए थे, लेकिन लगातार बाल गिरते देखना भावनात्मक रूप से तकलीफदेह रहा। परिवार और दोस्तों का सहयोग उनके लिए इस कठिन दौर में बड़ी ताकत बना। तीन महीने बाद परिवार के साथ बाहर भोजन करने जाना भी उन्हें सामान्य जीवन की ओर वापसी जैसा लगा। 

दूसरी महिलाओं के संदेशों ने बदल दिया बीमारी से लड़ने का नजरिया

पंकज के अनुसार, कैंसर के अनुभव सार्वजनिक करने का उनका उद्देश्य केवल अपनी बीमारी के बारे में बताना नहीं था। वह चाहती थीं कि ऐसी महिलाएं स्वयं को अकेला न समझें जो उपचार के कारण अपने बाल और पहले जैसी शारीरिक पहचान खो रही हैं। उनके पास कई महिलाओं के संदेश आए। कुछ ने बताया कि वे अपनी बीमारी दूसरों से छिपा रही थीं। कुछ महिलाएं सुबह आईने में अपना चेहरा देखने से भी डरती थीं। लेकिन पंकज को बिना विग के सामने आते देखकर उन्होंने स्वयं को स्वीकार करना शुरू किया। पंकज अब कीमोथेरेपी का चरण पूरा करने के बाद धीरे-धीरे अपने पेशेवर कामकाज की ओर लौट रही हैं। उनका अनुभव कैंसर के उपचार में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की अहमियत भी सामने लाता है। 

क्या है HER2-पॉजिटिव स्तन कैंसर और क्यों जरूरी है समय पर जांच?

HER2-पॉजिटिव स्तन कैंसर में कैंसर कोशिकाओं पर HER2 नामक प्रोटीन की मात्रा सामान्य से अधिक होती है, जिससे कोशिकाएं तेजी से बढ़ सकती हैं। हालांकि आधुनिक टारगेटेड दवाओं ने इस प्रकार के कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन में गांठ, आकार में असामान्य बदलाव, निप्पल से रक्तयुक्त स्राव या त्वचा में असामान्य परिवर्तन होने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। कैंसर की पहचान के लिए मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और आवश्यकता पड़ने पर बायोप्सी की जाती है। जांच की उम्र और अंतराल का निर्धारण महिला के व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार किया जाता है। पंकज भदौरिया की कहानी इसी बात को रेखांकित करती है कि कैंसर से मुकाबला केवल शरीर के उपचार का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, मानसिक दृढ़ता और समय पर चिकित्सा सहायता का भी विषय है।

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