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आईआईएम लखनऊ में अब पारिवारिक कारोबार संभालने की पढ़ाई, 25 लाख रुपये में दो साल का विशेष एमबीए
Lucknow: विरासत में मिले कारोबार को आधुनिक बनाने, नई पीढ़ी तैयार करने और स्थानीय व्यवसाय को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर रहेगा जोर
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Lucknow: परिवारों में पीढ़ियों से चले आ रहे कारोबार को आगे बढ़ाना अब केवल अनुभव और पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर नहीं रहेगा। देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में शामिल भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ ऐसे कारोबारी परिवारों की अगली पीढ़ी के लिए विशेष एमबीए पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जो अपने पारिवारिक व्यवसाय को आधुनिक प्रबंधन, नई तकनीक और बदलते बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना चाहते हैं। दो वर्ष के इस एमबीए इन फैमिली बिजनेस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल प्रबंधन के सिद्धांत नहीं पढ़ाए जाएंगे, बल्कि उनके अपने पारिवारिक कारोबार को अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण का आधार बनाया जाएगा। पाठ्यक्रम का संचालन आईआईएम लखनऊ के नोएडा परिसर में होगा। इसकी प्रस्तावित फीस करीब 25 लाख रुपये रखी गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को लगभग 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
आईआईएम लखनऊ की इस पहल का उद्देश्य उन युवाओं को पेशेवर प्रबंधन की शिक्षा देना है, जिन्हें आने वाले वर्षों में अपने परिवार का व्यवसाय संभालना है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे कारोबारी प्रतिष्ठान हैं, जिनकी शुरुआत पिछली पीढ़ियों ने सीमित संसाधनों के साथ की थी और जो धीरे-धीरे स्थानीय बाजार से निकलकर बड़े व्यावसायिक संस्थान बन गए। लेकिन जैसे-जैसे कारोबार का आकार बढ़ता है, उसके संचालन की चुनौतियां भी बदलने लगती हैं। वित्तीय प्रबंधन, बाजार में प्रतिस्पर्धा, कर्मचारियों की नियुक्ति, तकनीकी बदलाव, नए उत्पादों का विकास और पारिवारिक सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा जैसे प्रश्न सामने आते हैं। ऐसे में केवल पारिवारिक अनुभव पर्याप्त नहीं होता। आधुनिक प्रबंधन के सिद्धांतों और व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
प्रस्तावित कार्यक्रम में ऐसे कारोबारी परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका व्यवसाय कम से कम 20 वर्ष पुराना है और उसका वार्षिक कारोबार 20 करोड़ रुपये से अधिक है। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना है, जिनके पास पहले से संचालित व्यवसाय का अनुभव या उससे जुड़ाव हो और जो भविष्य में उसकी जिम्मेदारी संभालने वाले हों। पाठ्यक्रम में पारिवारिक कारोबार की निरंतरता बनाए रखने, अगली पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने, व्यावसायिक रणनीति तैयार करने और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर रहेगा।
आईआईएम लखनऊ के मीडिया विभाग के उप प्रबंधक शुभम वैश्य के अनुसार पारिवारिक व्यवसायों की चुनौतियां सामान्य कॉरपोरेट संस्थानों से कई मामलों में अलग होती हैं। इनमें कारोबारी फैसलों के साथ पारिवारिक संबंध, परंपराएं और अगली पीढ़ी की अपेक्षाएं भी जुड़ी रहती हैं। संस्थान ऐसे युवाओं को आधुनिक प्रबंधन की समझ देना चाहता है, जो भविष्य में इन व्यवसायों का नेतृत्व करेंगे। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि विद्यार्थी अपने पारिवारिक कारोबार की वास्तविक समस्याओं को पहचान सकें और उनके व्यावहारिक समाधान तलाश सकें।
छात्रों का अपना कारोबार बनेगा अध्ययन का विषय
इस एमबीए कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि विद्यार्थियों का अपना पारिवारिक व्यवसाय ही उनके लिए केस स्टडी यानी अध्ययन का प्रमुख आधार बनेगा। सामान्य प्रबंधन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को विभिन्न कंपनियों के उदाहरणों के माध्यम से व्यावसायिक समस्याएं समझाई जाती हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में उन्हें अपने परिवार के कारोबार का विश्लेषण करने का अवसर मिलेगा। वे यह समझने का प्रयास करेंगे कि उनके व्यवसाय की मौजूदा स्थिति क्या है, किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है, किन कारणों से विकास की गति प्रभावित हो रही है और भविष्य में विस्तार की कौन-सी संभावनाएं मौजूद हैं।
इसके लिए पाठ्यक्रम में छह विशेष फैमिली बिजनेस लैब की व्यवस्था प्रस्तावित है। इन प्रयोगात्मक शिक्षण गतिविधियों को अलग-अलग सेमेस्टर से जोड़ा जाएगा। पहले सेमेस्टर में विद्यार्थियों को अपने पारिवारिक कारोबार से संबंधित समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान सुझाने का कार्य दिया जाएगा। इसमें व्यवसाय की वर्तमान संरचना, बाजार की स्थिति, ग्राहकों की आवश्यकताओं और प्रबंधन से जुड़ी कठिनाइयों का अध्ययन किया जा सकेगा। इस अभ्यास का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक उत्तर देने के बजाय वास्तविक व्यावसायिक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने के लिए तैयार करना है।
दूसरे सेमेस्टर में विद्यार्थियों को आईआईएम लखनऊ के नोएडा परिसर में स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर का सहयोग भी मिलेगा। यहां उन्हें अनुभवी विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और व्यावसायिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। किसी नए उत्पाद को बाजार में उतारने, कारोबार का विस्तार करने, आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने और संबंधित नियामकीय प्रक्रियाओं को समझने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थी यह सीख सकेंगे कि किसी पारिवारिक व्यवसाय को नई दिशा देने के लिए केवल अच्छा विचार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए वित्तीय योजना, कानूनी अनुपालन और बाजार की व्यावहारिक समझ भी आवश्यक है।
पाठ्यक्रम में पारिवारिक कारोबार के नेतृत्व हस्तांतरण पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की योजना है। कई परिवारों में कारोबार की स्थापना करने वाली पीढ़ी और उसे संभालने वाली नई पीढ़ी की सोच में अंतर होता है। पुरानी पीढ़ी अनुभव, स्थापित कारोबारी संबंधों और परंपरागत तरीकों को महत्व देती है, जबकि नई पीढ़ी तकनीक, नए बाजार, डिजिटल माध्यमों और नवाचार को अपनाना चाहती है। ऐसे में दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना व्यवसाय की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रबंधन की शिक्षा इस प्रक्रिया में जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण, पेशेवर कार्यप्रणाली और दीर्घकालिक रणनीति विकसित करने में सहायक हो सकती है।
स्थानीय कारोबार को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी
आईआईएम लखनऊ के इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक अनुभव प्राप्त करने का विकल्प भी रखा गया है। इंटरनेशनल इमर्सन नामक इस सुविधा के अंतर्गत विद्यार्थी विदेश के शैक्षणिक संस्थानों में जाकर अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन्हें दूसरे देशों की कारोबारी व्यवस्थाओं, प्रबंधन पद्धतियों और बाजार की परिस्थितियों से परिचित कराना है। इससे वे यह समझ सकेंगे कि किसी स्थानीय या क्षेत्रीय व्यवसाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने के लिए किन बदलावों की आवश्यकता होती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण की यह सुविधा वैकल्पिक होगी। इसके लिए लगभग 10 लाख रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इस प्रकार सामान्य दो वर्षीय कार्यक्रम की प्रस्तावित फीस लगभग 25 लाख रुपये होगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण चुनने पर कुल शैक्षणिक खर्च लगभग 35 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। विद्यार्थियों को आवेदन से पहले यह भी स्पष्ट करना होगा कि निर्धारित शुल्क में आवास, भोजन, यात्रा और अन्य व्यय शामिल हैं या अलग से देय होंगे। इन मदों का अंतिम विवरण संस्थान की आधिकारिक प्रवेश सूचना से स्पष्ट होगा।
60 सीटें प्रस्तावित, स्नातक में 50 प्रतिशत अंक जरूरी
एमबीए इन फैमिली बिजनेस कार्यक्रम के लिए लगभग 60 सीटें प्रस्तावित हैं। प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। इसके समकक्ष सीए, सीएस या आईसीडब्ल्यूए जैसी व्यावसायिक योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों को भी पात्रता के दायरे में रखा गया है।
प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा आयोजित किए जाने की योजना है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यदि आवेदनों की संख्या कम रहती है तो सीधे साक्षात्कार के माध्यम से चयन का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। अंतिम प्रवेश प्रक्रिया, आवेदन की तारीख, परीक्षा का स्वरूप और अन्य आवश्यक शर्तें संस्थान की आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट होंगी। कारोबारी परिवार की पृष्ठभूमि, व्यवसाय की अवधि और वार्षिक कारोबार से संबंधित प्रमाणपत्रों की आवश्यकता के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रवेश सूचना से ही मिल सकेगी।
पारिवारिक कारोबार के सामने नेतृत्व और बदलाव की चुनौती
भारत में पारिवारिक व्यवसायों की भूमिका केवल बड़े औद्योगिक घरानों तक सीमित नहीं है। व्यापार, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, परिवहन, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण और खुदरा कारोबार सहित अनेक क्षेत्रों में ऐसे प्रतिष्ठान सक्रिय हैं जिनकी बुनियाद एक परिवार ने रखी और बाद की पीढ़ियों ने उनका विस्तार किया। इनमें से कई व्यवसाय लंबे समय तक संस्थापक की व्यक्तिगत निगरानी और पारिवारिक संबंधों के आधार पर चलते हैं। लेकिन कारोबार बढ़ने पर औपचारिक प्रबंधन व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन, प्रशिक्षित कर्मचारियों और पेशेवर निर्णय प्रक्रिया की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
पारिवारिक व्यवसायों की एक चुनौती यह भी होती है कि स्वामित्व और प्रबंधन हमेशा एक ही चीज नहीं होते। किसी व्यक्ति का परिवार का सदस्य होना उसे स्वतः सक्षम प्रबंधक नहीं बना देता। इसी प्रकार बाहरी पेशेवरों को जिम्मेदारी सौंपना भी कई बार आसान नहीं होता। कारोबार के विस्तार के लिए पारिवारिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक हो सकता है। आईआईएम लखनऊ का प्रस्तावित कार्यक्रम ऐसे प्रश्नों को व्यवस्थित ढंग से समझने और उनसे निपटने की क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान कर सकता है।
बदलते बाजार में डिजिटल तकनीक, ऑनलाइन बिक्री, आपूर्ति शृंखला, वित्तीय जोखिम और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताएं भी पारिवारिक कारोबारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। कोई व्यवसाय अपने क्षेत्र में वर्षों से सफल रहा हो, फिर भी नए प्रतिस्पर्धियों और तकनीकी बदलावों के कारण उसे अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। ऐसे में अगली पीढ़ी के नेतृत्वकर्ताओं को केवल पुराने कारोबार को बनाए रखने के बजाय उसके भविष्य की योजना भी तैयार करनी होगी।
कार्यक्रम की चेयरपर्सन प्रो. गरिमा मित्तल के अनुसार इस पाठ्यक्रम को पारिवारिक व्यवसायों की अगली पीढ़ी के नेतृत्वकर्ताओं को आवश्यक ज्ञान, व्यापक दृष्टिकोण और प्रबंधन क्षमताओं से सशक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी नवाचार को बढ़ावा देने और अपने व्यवसाय में दीर्घकालिक मूल्य सृजन करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।
आईआईएम लखनऊ की इस पहल का महत्व इसलिए भी है कि यह प्रबंधन शिक्षा को पहले से संचालित व्यवसायों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास है। आमतौर पर एमबीए करने वाले अनेक विद्यार्थी नौकरी या नया उद्यम शुरू करने की तैयारी करते हैं, जबकि इस कार्यक्रम का केंद्र उन युवाओं को बनाया गया है जिनके सामने पहले से स्थापित व्यवसाय को संभालने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। उनकी सफलता का मूल्यांकन केवल डिग्री प्राप्त करने से नहीं, बल्कि इस बात से भी किया जा सकेगा कि वे अपने कारोबार में क्या सुधार ला पाते हैं।
पारिवारिक कारोबार की सबसे बड़ी पूंजी केवल उसकी संपत्ति, बाजार या वर्षों पुरानी पहचान नहीं होती, बल्कि वह अनुभव और भरोसा भी होता है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है। आईआईएम लखनऊ का नया कार्यक्रम इसी विरासत को आधुनिक प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में एक प्रयास है। यदि विद्यार्थी अपने पारिवारिक व्यवसाय की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनका समाधान विकसित कर सके, तो यह पाठ्यक्रम केवल प्रबंधन की डिग्री देने वाला कार्यक्रम नहीं रहेगा, बल्कि वर्षों पुराने कारोबारों को नई पीढ़ी के नेतृत्व में आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन सकता है।


