Lucknow News: दांत-मसूड़ों की बीमारी से फेफड़ों पर खतरा, केजीएमयू शोध में हुआ खुलासा

Lucknow News: केजीएमयू के अध्ययन में पायरिया और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के बीच सीधा संबंध सामने आया, दोनों बीमारियों में सूजन से जुड़े बायोमार्कर बढ़े मिले।

Newstrack Network
Published on: 25 Aug 2026 5:43 PM IST
Threat to Lungs from Dental-Gum Disease, KGMU Research Reveals
X

दांत-मसूड़ों की बीमारी से फेफड़ों पर खतरा, केजीएमयू शोध में हुआ खुलासा (Photo- Social Media)

Lucknow News दांतों और मसूड़ों की पुरानी बीमारी सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह फेफड़ों जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हालिया शोध में मसूड़ों की पुरानी बीमारी 'क्रॉनिक पीरियोडोंटाइटिस' (पायरिया) और फेफड़ों की गंभीर समस्या 'इंटरस्टिशियल लंग डिजीज' (ILD) के बीच सीधा और गहरा संबंध सामने आया है। वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल 'मोनाल्डी आर्काइव्स फॉर चेस्ट डिजीज' में यह अध्ययन ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है।

केजीएमयू का संयुक्त अध्ययन: 75 लोगों पर हुई जांच

यह महत्वपूर्ण अध्ययन केजीएमयू के पीरियोडोंटोलॉजी विभाग, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग और सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अध्ययन में शामिल 75 प्रतिभागियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था:

25 पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति

25 क्रॉनिक पीरियोडोंटाइटिस (पायरिया) से पीड़ित मरीज

25 इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) से ग्रसित मरीज

विशेषज्ञों ने सभी मरीजों के मसूड़ों में प्लाक, सूजन, मसूड़ों की पॉकेट की गहराई और दांतों से मसूड़ों के जुड़ाव की स्थिति की जांच की। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में दोनों बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में ये सभी मानक काफी खराब और गंभीर पाए गए।

लार और खून में मिले खतरनाक इंफ्लेमेटरी बायोमार्कर

शोध के दौरान मरीजों की लार और खून के नमूनों का विस्तृत प्रयोगशाला विश्लेषण किया गया। इसमें कोशिकाओं के बाहरी ढांचे (एक्स्ट्रासेल्यूलर मैट्रिक्स) को नुकसान पहुंचाने वाले दो प्रमुख बायोमार्कर—एमएमपी-7 (MMP-7) और एमएमपी-8 (MMP-8)—का स्तर पायरिया और आईएलडी दोनों तरह के मरीजों में सामान्य से बहुत अधिक पाया गया। हालांकि, तीसरे बायोमार्कर 'टीआईएमपी-1' (TIMP-1) के स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। इन बायोमार्कर की उच्च सक्रियता दर्शाती है कि दोनों ही स्थितियों में शरीर के भीतर ऊतकों को नुकसान पहुंचाने वाली सूजन बहुत तेज थी।

इस शोध टीम में प्रमुख रूप से डॉ. प्रेरणा एस. हिरकाने, डॉ. उमेश प्रताप वर्मा, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. पवित्र रस्तोगी, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव और डॉ. अंजनी कुमार पाठक शामिल रहे।

मुंह की बीमारी कैसे बनती है फेफड़ों के लिए आफत?

केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रोफेसर और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार वर्मा के अनुसार, मुंह और फेफड़ों के बीच यह संबंध मुख्य रूप से दो रास्तों से बनता है:

श्वास नली से बैक्टीरिया का प्रवेश: मसूड़ों और दांतों की सड़न में मौजूद हानिकारक रोगाणु सांस लेने के दौरान श्वास नली के रास्ते सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं।

सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन): मसूड़ों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन से निकलने वाले हानिकारक रसायन खून के प्रवाह के जरिए पूरे शरीर में फैलते हैं और फेफड़ों के नाजुक ऊतकों को डैमेज करना शुरू कर देते हैं।

दोनों बीमारियों के लक्षण और नुकसान

क्रॉनिक पीरियोडोंटाइटिस (पायरिया): यह मसूड़ों और दांतों की पुरानी व गंभीर बीमारी है। यह दांतों को मजबूती देने वाली हड्डियों और सहयोगी ऊतकों को धीरे-धीरे गला देती है, जिससे मसूड़ों से खून आना, मवाद पड़ना और अंततः दांत ढीले होकर गिरने लगते हैं।

इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD): यह फेफड़ों की गंभीर बीमारी है जिसमें फेफड़ों के ऊतकों में सूजन आ जाती है और उन पर स्थायी निशान (फाइब्रोसिस/स्कारिंग) पड़ने लगते हैं। इसके कारण फेफड़े सख्त और भारी हो जाते हैं, जिससे खून में ऑक्सीजन घुलने की प्रक्रिया बाधित होती है। मरीज को सूखी खांसी, सांस फूलना, सीने में भारीपन और अत्यधिक कमजोरी का सामना करना पड़ता है।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story