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KGMU को फरवरी में मिल सकता है 500 बेड का नया ट्रामा सेंटर, एक ही परिसर में हो जाएंगे 950 बेड
KGMU लखनऊ में 500 बेड के ट्रामा सेंटर फेज-2 की तैयारी कर रहा है। ₹300 करोड़ की परियोजना में ICU, OT, न्यूरोसर्जरी और अन्य सुविधाएं होंगी।
Lucknow: सड़क दुर्घटना के बाद गंभीर हालत में KGMU पहुंचने वाले मरीजों के लिए अगले साल से इलाज की तस्वीर बदल सकती है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी अपने मौजूदा ट्रामा सेंटर के साथ 500 बेड का ट्रामा सेंटर फेज-2 शुरू करने की तैयारी कर रही है। नए भवन का निर्माण जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है और KGMU प्रशासन फरवरी के अंतिम सप्ताह तक यहां मरीजों की भर्ती शुरू करने की तैयारी में है। ऐसा हुआ तो मौजूदा 450 बेड और नए 500 बेड को मिलाकर KGMU के ट्रामा परिसर की क्षमता 950 बेड तक पहुंच जाएगी। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि दुर्घटना के मरीजों के लिए नए भवन में अलग व्यवस्था की जा सकेगी और पुराने ट्रामा सेंटर की क्षमता दूसरे अत्यंत गंभीर रोगियों के उपचार में इस्तेमाल की जा सकेगी।
KGMU का मौजूदा ट्रामा सेंटर 2003 में शुरू हुआ था। चार मंजिला इस केंद्र में करीब 450 बेड हैं, लेकिन यहां आने वाले मरीजों की संख्या इसकी क्षमता पर लगातार दबाव डालती है। विश्वविद्यालय के मुताबिक ट्रामा सेंटर में प्रतिदिन करीब 650 से 700 गंभीर मरीज पहुंचते हैं। इनमें सड़क दुर्घटनाओं के अलावा सिर की गंभीर चोट, हड्डियों की जटिल चोट, burns, neurological emergencies और दूसरे गंभीर मामलों के मरीज शामिल होते हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से रेफर होकर आने वाले मरीज भी KGMU पहुंचते हैं। यही कारण है कि नया ट्रामा सेंटर केवल 500 अतिरिक्त बेड जोड़ने की परियोजना नहीं है, बल्कि emergency care के अलग-अलग स्तरों को व्यवस्थित करने का प्रयास भी है।
करीब ₹300 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था ground floor पर प्रस्तावित 80 बेड की casualty होगी। गंभीर घायल मरीज के अस्पताल पहुंचते ही जिन सुविधाओं की सबसे पहले जरूरत पड़ती है, उन्हें एक-दूसरे के नजदीक रखने की योजना है। इसी हिस्से में CT scan, MRI, ultrasound और X-ray जैसी radiodiagnostic सुविधाओं के साथ operation theatre की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अलावा PRO room, resident और faculty rooms तथा HRF store भी होगा। इसका उद्देश्य यह है कि गंभीर मरीज को जांच, प्रारंभिक उपचार और जरूरत पड़ने पर surgery के लिए अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने में समय न गंवाना पड़े।
नए भवन का पहला तल मुख्य रूप से surgery के लिए महत्वपूर्ण होगा। यहां 12 modular operation theatres के साथ 60 बेड का post-operative ward बनाया जा रहा है। यानी एक साथ बड़ी संख्या में emergency operations करने और operation के बाद मरीजों को निगरानी में रखने की क्षमता बढ़ेगी। ट्रामा चिकित्सा में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बड़ी सड़क दुर्घटना या दूसरी आपदा के समय कई गंभीर मरीज एक साथ अस्पताल पहुंच सकते हैं। मौजूदा व्यवस्था में operation theatre और postoperative beds की सीमित उपलब्धता कई बार पूरे emergency flow को प्रभावित करती है।
दूसरे तल पर 80 बेड का Trauma Surgery Ward और तीसरे तल पर 80 बेड का Neurosurgery Ward प्रस्तावित है। सिर और मस्तिष्क की चोट सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु और गंभीर विकलांगता का बड़ा कारण होती है, इसलिए dedicated neurosurgery beds ट्रामा सेंटर की महत्वपूर्ण जरूरत हैं। चौथे तल पर 60 बेड Orthopaedics और 20 बेड Pediatric Orthopaedics के लिए होंगे। इससे वयस्कों के साथ दुर्घटनाओं में घायल बच्चों के लिए भी अलग विशेषज्ञ व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।
पांचवें तल को सबसे गंभीर मरीजों की intensive care के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां Critical Care Medicine के 40 ICU और 20 HDU beds प्रस्तावित हैं। ICU और High Dependency Unit के बीच अलग-अलग स्तर की critical care उपलब्ध होने से ऐसे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार रखा जा सकेगा जिन्हें ventilator, लगातार monitoring या अधिक intensive medical support की आवश्यकता होती है। ट्रामा सेंटर में केवल सामान्य beds की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता; ICU, operation theatre, imaging और specialist teams की क्षमता उसी अनुपात में बढ़नी जरूरी होती है। इस लिहाज से नए भवन में critical care के लिए 60 beds का प्रावधान महत्वपूर्ण है।
छठे तल पर कई छोटी लेकिन ट्रामा चिकित्सा के लिए आवश्यक specialties को एक साथ रखा जाएगा। यहां Plastic Surgery, Vascular Surgery, Oral and Maxillofacial Surgery, ENT और Ophthalmology के लिए दस-दस बेड प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त दस बेड निराश्रित मरीजों के लिए रखे जाने की योजना है। गंभीर दुर्घटना में केवल हड्डी या सिर की चोट नहीं होती; चेहरे, आंख, जबड़े, रक्त वाहिकाओं और soft tissues की जटिल चोटें भी एक साथ हो सकती हैं। ऐसे मरीज को कई विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। अलग-अलग specialties को एक ही trauma complex में उपलब्ध कराने से multidisciplinary treatment में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।
भवन के ऊपरी हिस्से में प्रशासनिक और शैक्षणिक सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। उपलब्ध योजना के अनुसार सातवें तल पर कार्यालय, lounge, seminar hall, biomedical engineering office, pharmacy sub-store, equipment store और electrical तथा अन्य stores बनाए जाएंगे। हालांकि उपलब्ध विवरण में भवन के तलों की संख्या को लेकर एक विसंगति है—एक ओर इसे दो basement समेत सात तल का भवन बताया गया है, जबकि सुविधाओं की सूची Ground Floor के बाद First से Seventh Floor तक जाती है। इसलिए भवन की अंतिम स्वीकृत संरचना निर्माण पूरा होने पर ही स्पष्ट रूप से बताई जा सकेगी।
KGMU के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार तैयारी फरवरी 2027 के अंतिम सप्ताह तक ट्रामा सेंटर फेज-2 का संचालन शुरू करने की है। इसे अभी निश्चित उद्घाटन तारीख के बजाय लक्ष्य के रूप में देखना अधिक उचित होगा, क्योंकि भवन तैयार होने के बाद केवल beds लगा देने से अस्पताल चालू नहीं होता। operation theatres, CT-MRI जैसी मशीनों, oxygen और medical gas pipelines, ICU equipment, infection-control व्यवस्था, fire safety, बिजली backup के साथ doctors, nurses, technicians और support staff की तैनाती भी करनी होगी। 500 बेड के नए ट्रामा सेंटर का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भवन के साथ पर्याप्त मानव संसाधन और उपकरण भी समय पर उपलब्ध होते हैं या नहीं।
नया ट्रामा सेंटर पूरी क्षमता से शुरू हुआ तो KGMU के लिए इसका अर्थ केवल 450 से 950 बेड हो जाना नहीं होगा। मौजूदा ट्रामा सेंटर पर मरीजों का दबाव कम किया जा सकेगा, दुर्घटना के मरीजों के लिए dedicated व्यवस्था बनेगी और neurosurgery, orthopaedics, trauma surgery तथा critical care को अधिक जगह मिलेगी। उत्तर प्रदेश के दूर-दराज जिलों से गंभीर मरीजों को लेकर लखनऊ आने वाले परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यही होगा कि अस्पताल पहुंचने के बाद बेड, जांच, operation theatre और ICU के इंतजार में लगने वाला महत्वपूर्ण समय कम हो। ट्रामा चिकित्सा में कई बार यही शुरुआती समय मरीज के जीवन और मृत्यु के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर बन जाता है।


