Kuldeep Sengar Rape Case: कुलदीप सेंगर की बढ़ीं मुश्किलें! SC ने रद्द किया HC का आदेश, जेल से नहीं मिलेगी राहत

Kuldeep Sengar Rape Case: उन्नाव रेप मामले में फंसे कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। SC ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की सजा निलंबित की गई थी।

Priya Singh Bisen
Published on: 15 May 2026 12:56 PM IST (Updated on: 15 May 2026 12:56 PM IST)
Kuldeep Sengar Rape Case
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Kuldeep Sengar Rape Case

Kuldeep Sengar Rape Case: उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सर्वोच्च न्यायालय से तगड़ा झटका लगा है। आज 15 मई 2026 यानी शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की सजा को निलंबित किया गया था। अदालत के अब इस निर्णय के बाद अब कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेगा। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।

SC का HC को बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को आदेश दिया है कि वह मुख्य अपील पर जल्द सुनवाई करें और प्रयास करे कि दो महीने के अंदर ही इस मामले में फैसला सुनाया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि अगर मुख्य अपील पर शीघ्र सुनवाई संभव नहीं हो पाती है, तो हाईकोर्ट सजा निलंबन की अर्जी पर नए सिरे से फैसला कर सकता है।

क्या कहा गया मामले की सुनवाई में ?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस मामले से जुड़ी CBI की अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। वहीं सेंगर की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील देते हुए कहा कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी और इस से जुड़े मेडिकल रिपोर्ट भी सेंगर के पक्ष में है।

हरिहरन ने अदालत में कहा कि AIIMS बोर्ड की रिपोर्ट सहित कई दस्तावेज सेंगर के पक्ष में हैं, इसके बावजूद वह लंबे वक़्त से जेल में बंद हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देते हुए कहा कि सेंगर को IPC की धारा 376(1) के तहत उम्रकैद की सजा मिली हुई है और यह बेहद गंभीर अपराध है।

अदालत में उठाया गया ये मुद्दा

सुनवाई के दौरान अदालत में यह मुद्दा भी उठा कि क्या किसी विधायक को POCSO कानून के अंतर्गत “पब्लिक सर्वेंट” माना जा सकता है। इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि POCSO कानून बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाया गया है और इसकी व्याख्या उसी भावना के अनुरूप होनी चाहिए।

क्या कहा CJI ने ?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत में कहा कि विधायक जैसे जनप्रतिनिधि प्रभावशाली स्थिति में होते हैं और उनके प्रभाव को किसी भी हाल में अनदेखा नहीं किया जा सकता। वहीं, CJI ने कहा कि फिलहाल SC केवल इस बात पर विचार कर रहा है कि सजा निलंबन का आदेश उचित था या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से हाईकोर्ट प्रभावित हुए बिना मामले की सुनवाई करे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट करते हुए कहा कि उसने मामले के मेरिट यानी दोषसिद्धि पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत ने यह भी साफ़ किया कि हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से मुख्य अपील और सजा निलंबन याचिका पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

बता दे, उन्नाव रेप मामला देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है, जिसमें पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग लड़की से रेप के मामले में दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है।

Priya Singh Bisen

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