Lucknow News: सरकार ने दिए थे घर, अब अवैध होने की चर्चा! जानिए डालीबाग फ्लैट विवाद की पूरी कहानी

Lucknow Dalibagh Flat Dispute: लखनऊ के डालीबाग में मुख्तार अंसारी की कब्जामुक्त जमीन पर बने 72 सरकारी फ्लैटों को लेकर विवाद क्यों खड़ा हुआ? जानिए LDA और सिंचाई विभाग ने क्या सफाई दी।

Jyotsana Singh
Published on: 19 Jun 2026 5:30 PM IST
Dalibagh Flat Dispute 2026: LDA Sardar Vallabhbhai Patel Housing Scheme built on Mukhtar Ansari land in Lucknow
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Lucknow Dalibagh Flat Dispute 2026

Lucknow Dalibagh Flat Dispute: लखनऊ के पॉश इलाके डालीबाग में मुख्तार अंसारी की कब्जामुक्त जमीन पर गरीब परिवारों के लिए बनाई गई सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय योजना अचानक विवादों में आ गई है। सिंचाई विभाग की ओर से एक नोटिस लगाए जाने के बाद यह खबर फैल गई कि सरकार द्वारा आवंटित 72 फ्लैट अवैध हैं और उन्हें खाली कराया जा सकता है। खबर फैलते ही आवंटियों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। जबकि कुछ देर बाद में सिंचाई विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण दोनों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आवास योजना के फ्लैटों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और परियोजना पूरी तरह वैध है।

एक नोटिस से शुरू हुआ पूरा विवाद

गुरुवार को डालीबाग क्षेत्र में एक फ्लैट की दीवार पर सिंचाई विभाग का नोटिस चस्पा मिलने के बाद मामला चर्चा में आ गया। नोटिस में विभागीय भूमि पर अवैध कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हो गई कि सरदार पटेल आवासीय योजना के फ्लैट भी विवाद में आ गए हैं। नोटिस की तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और कई आवंटियों ने अपने फ्लैटों के भविष्य को लेकर चिंता जताई।

मुख्तार अंसारी के कब्जे वाली जमीन पर बनी है योजना

सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय योजना उस जमीन पर विकसित की गई है जिस पर कभी माफिया मुख्तार अंसारी का कब्जा बताया जाता था। प्रशासन ने कार्रवाई कर करीब 2,314 वर्गमीटर भूमि को कब्जामुक्त कराया था।

इसके बाद LDA ने यहां गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए आधुनिक आवासीय परियोजना तैयार की। परियोजना के तहत ग्राउंड प्लस थ्री संरचना वाले तीन ब्लॉक बनाए गए, जिनमें कुल 72 फ्लैट विकसित किए गए हैं।

क्या-क्या सुविधाएं दी गई हैं?

योजना के तहत प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 36.65 वर्गमीटर रखा गया है। फ्लैट की कीमत करीब 10.70 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। परियोजना में स्वच्छ पेयजल, बिजली, सुरक्षा व्यवस्था और दोपहिया वाहनों की पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डालीबाग की प्राइम लोकेशन पर स्थित होने के कारण यह परियोजना काफी चर्चा में रही थी। यहां से हजरतगंज, 1090 चौराहा, नरही, सिकंदरबाग और बालू अड्डा जैसे प्रमुख स्थान कुछ ही मिनटों की दूरी पर हैं।

8 हजार लोगों ने किया था आवेदन

LDA ने अक्टूबर 2025 में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। एक महीने के भीतर लगभग 8 हजार लोगों ने फ्लैट पाने के लिए आवेदन किया। जांच के बाद पात्र आवेदकों का चयन किया गया और लॉटरी के माध्यम से 72 लाभार्थियों को फ्लैट आवंटित किए गए। 4 नवंबर 2025 को सरदार पटेल जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं लाभार्थियों को आवंटन पत्र और चाबियां सौंपी थीं।

सिंचाई विभाग ने क्या कहा?

मामले के तूल पकड़ने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विभाग ने सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय योजना के फ्लैटों को लेकर कोई नोटिस जारी नहीं किया है। विभाग के अनुसार नोटिस केवल हैदर कैनाल बांध के किनारे बने अवैध निर्माणों और झुग्गी-झोपड़ियों के लिए जारी किए गए थे। आवासीय योजना के फ्लैटों को लेकर कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि फ्लैटों को खाली कराने संबंधी खबरें भ्रामक हैं और लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने किया विरोध

गुरुवार को सिंचाई विभाग की टीम जब इलाके में पहुंची तो स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया। कुछ स्थानों पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई भी की गई। विरोध और भ्रम की स्थिति के बीच अधिकारियों को लोगों को समझाना पड़ा कि विभाग की कार्रवाई आवासीय योजना के फ्लैटों के खिलाफ नहीं है।

LDA ने भी दिया भरोसा

LDA अधिकारियों ने कहा कि सरदार पटेल आवासीय योजना पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत विकसित की गई है। भूमि को कानूनी रूप से कब्जामुक्त कराने के बाद निर्माण कार्य कराया गया था। अधिकारियों के मुताबिक लाभार्थियों को दिए गए फ्लैटों के आवंटन में किसी प्रकार की कानूनी बाधा नहीं है और योजना के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं चल रही है।

अभी तक अधिकांश फ्लैट खाली

खास बात यह है कि आवंटन के आठ महीने बाद भी अधिकांश फ्लैटों में लोग रहने नहीं पहुंचे हैं। LDA के अनुसार सभी फ्लैट खाली मिले। 72 में से दो आवंटियों ने समय पर किस्त जमा नहीं की, जिसके कारण उनका आवंटन निरस्त कर दिया गया। इन दो फ्लैटों के लिए LDA ने दोबारा आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। इच्छुक लोग 5 जून से 20 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

क्या है पूरे विवाद की सच्चाई?

पूरा विवाद एक नोटिस के बाद पैदा हुए भ्रम का नतीजा बताया जा रहा है। सिंचाई विभाग और LDA दोनों ने साफ किया है कि गरीबों को आवंटित 72 फ्लैटों को अवैध नहीं घोषित किया गया है। विभागीय नोटिस का संबंध आवासीय योजना से नहीं बल्कि नहर किनारे बने अन्य अवैध कब्जों से था।

फिलहाल आवास योजना सुरक्षित है और लाभार्थियों को अपने फ्लैट खाली करने की कोई जरूरत नहीं है। यही वजह है कि अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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