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Lucknow Double Murder: सीतापुर के वकील से निकला हथियार कनेक्शन, लॉक iPhone पर टिकी पुलिस की जांच
Lucknow Double Murder में पुलिस तीन हथियारों के स्रोत की जांच कर रही है। सीतापुर के वकील से संपर्क और लॉक iPhone जांच के अहम सुराग बने हैं।
Lucknow Double Murder Case: विभूतिखंड क्षेत्र में बैंक अधिकारी मानस बाजपेयी द्वारा अपनी पत्नी दिव्या और बहन तूलिका की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुदकुशी किए जाने के सनसनीखेज मामले में पुलिस की जांच अब उसके लॉक आईफोन पर टिक गई है। पुलिस का मानना है कि फोन का लॉक खुलने के बाद अवैध असलहा खरीदने के स्रोत, घटना से पहले हुई बातचीत और उसकी मानसिक स्थिति से जुड़े कई अहम साक्ष्य सामने आ सकते हैं। सुरक्षा कारणों से पुलिस तकनीकी छेड़छाड़ से बच रही है, क्योंकि जबरन लॉक तोड़ने पर फोन का डेटा हमेशा के लिए मिटने का खतरा है। ऐसे में पासवर्ड की जानकारी के लिए मानस के करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क साधा जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि मानस के पास दो मोबाइल थे, जिनमें उसका निजी आईफोन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और वारदात के दिन की मोबाइल लोकेशन की पड़ताल पूरी कर ली है। इससे पता चला है कि घटना से चंद घंटे पहले उसने किन-किन लोगों से बात की थी। अब उन सभी नंबरों पर संपर्क कर पूछताछ की सूची तैयार की जा रही है। मौके से व्हाट्सएप स्टेटस पर डाले गए संदेश के अलावा कोई लिखित सुसाइड नोट नहीं मिला है। यदि दोनों पक्षों की ओर से कोई औपचारिक तहरीर नहीं आती है, तो पुलिस आर्म्स एक्ट के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए विधिक कार्रवाई आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।
सीतापुर के अधिवक्ता ने उपलब्ध कराए थे अवैध हथियार
शुरुआती तफ्तीश में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल हथियार मानस को सीतापुर के एक अधिवक्ता ने उपलब्ध कराए थे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की जानकीपुरम शाखा में कार्यरत मानस की उस वकील से बैंक के काम के सिलसिले में मुलाकात हुई थी, जो बाद में गहरी दोस्ती में बदल गई। मानस के विधिक मामलों की पैरवी भी वही अधिवक्ता कर रहा था। घटना के बाद से उक्त वकील भूमिगत हो गया है। पुलिस कॉल डिटेल के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि वकील ने खुद हथियार लाकर दिए थे या फिर किसी हथियार तस्कर से मानस की सांठगांठ कराई थी।
उधर, मानस के मामा अवधेश शुक्ला ने बताया कि मानस बेहद डरपोक स्वभाव का था और रात में घर से अकेले निकलने में भी घबराता था। परिवार के पास कभी कोई लाइसेंसी असलहा नहीं रहा, ऐसे में उसके पास तीन हथियार कहां से और कैसे पहुंचे, यह बात पूरे परिवार और रिश्तेदारों की समझ से परे है।
पारिवारिक त्रासदियां, वैवाहिक कलह और वसीयत का पेंच
पुलिस जांच में मानस के पारिवारिक तनाव की कई परतें खुली हैं। पिता की हार्ट अटैक और मां की कैंसर से मौत के बाद उसकी बहन तूलिका गहरे अवसाद में चली गई थी, जिसकी पूरी देखरेख मानस ही करता था। जनवरी में पत्नी दिव्या से गर्भपात और अन्य पारिवारिक विवादों के चलते तीन अलग-अलग मुकदमे शुरू हो गए थे। हालांकि, मार्च में मानस ने सुलह कर साथ रहने की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन 18 अगस्त की कोर्ट तारीख के बाद स्थितियां और बिगड़ गईं। अवसाद और अंतर्कलह के इस लंबे दौर ने अंततः इस भयावह घटना का रूप ले लिया।
मानस के मामा ने स्पष्ट किया है कि हुसड़िया स्थित पैतृक मकान और बैंक खातों की संपत्ति को लेकर उनकी कोई व्यक्तिगत दावेदारी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट जिसे भी संपत्ति का जिम्मा सौंपेगी, उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी; यदि यह जिम्मेदारी उन्हें मिली तो वे पूरी संपत्ति किसी मंदिर या धर्मार्थ ट्रस्ट को दान कर देंगे। पुलिस अब मानस की किसी संभावित वसीयत और कानूनी वारिसों के दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है।


