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लखनऊ के द्वारिका टावर में आग से लाखों का सामान जलकर राख, लाइब्रेरी में मची चीख-पुकार
Lucknow: लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित द्वारिका टावर के कपड़ा गोदाम में आग से लाखों का सामान जल गया। लाइब्रेरी में मौजूद 20 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
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Lucknow: लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित द्वारिका टावर में रविवार को आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इमारत के द्वितीय तल पर बने कपड़ों के गोदाम में आग लगने से लाखों रुपये का सामान जल गया। इस दौरान प्रथम तल पर स्थित लाइब्रेरी में पढ़ रहे करीब 20 छात्र-छात्राएं धुएं के बीच फंस गए। सूचना पर पहुंची दमकल टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला और आग पर काबू पाया। राहत की बात रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
शॉर्ट सर्किट से गोदाम में लगी आग
द्वारिका टावर के द्वितीय तल पर ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के कपड़ों का गोदाम है। रविवार को यहां शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। देखते ही देखते आग फैलने लगी और इमारत में धुआं भर गया। सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने के साथ ही इमारत में मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की।
टावर के प्रथम तल पर संचालित नारायण लाइब्रेरी में उस समय करीब 20 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे थे। धुआं भरने के कारण वे घबरा गए और परिसर में चीख-पुकार मच गई। दमकलकर्मियों ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, गोदाम में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया।
इमारत में नहीं मिले आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम
अग्निशमन अधिकारी सुशील कुमार के मुताबिक, द्वारिका टावर में आने-जाने के लिए केवल एक रास्ता था। शुरुआती जांच में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं मिले। उन्होंने बताया कि इस संबंध में नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, द्वारिका टावर के मालिक शुभम अग्रवाल हैं। वहीं, कपड़ों का गोदाम और लाइब्रेरी संचालित करने वाली सेजल त्रिपाठी ने इमारत के दोनों तल किराये पर लिए हैं। आग लगने की घटना के बाद इमारत में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अलीगंज अग्निकांड के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जून में लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक इमारत में आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद अग्निशमन विभाग, विद्युत निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सुरक्षा मानकों को लेकर कार्रवाई तेज की थी। इसके बावजूद द्वारिका टावर में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात शुरुआती जांच में सामने आई है।
इस घटना ने एक बार फिर व्यावसायिक इमारतों, गोदामों और लाइब्रेरी जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को उजागर किया है। समय पर दमकलकर्मियों के पहुंचने और छात्रों को सुरक्षित निकालने से बड़ा हादसा टल गया। अब देखना होगा कि अग्निशमन विभाग जांच के बाद टावर प्रबंधन के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।


