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लखनऊ में पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर पर दर्ज हुई FIR, धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप
लखनऊ में रिटायर्ड आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी वकील नूतन ठाकुर पर फर्जी दस्तावेज़ और जाली हलफनामों से सरकारी विभागों को गुमराह करने के गंभीर आरोप, FIR दर्ज।
उत्तर प्रदेश की सियासी हलचलों के बीच सत्ता व सत्ता पक्ष के नेताओं के खिलाफ ताबड़तोड़ बयानबाजी व विरोध करने वाले पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर व उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के खिलाफ अब धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में लखनऊ के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। दर्ज मुकदमे में बताया गया है कि साल 1999 में नूतन ठाकुर ने फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल करते हुए देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट आवंटित कराया था। इस पूरे मामले में देवरिया के तत्कालीन एसपी रहे अमिताभ ठाकुर पर अपनी पत्नी की मदद करने व पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। केस में कूटरचना, बेनामी संपत्ति, सरकारी विभागों को धोखा देने और आर्थिक अपराध तक की बातें सामने आई हैं, जिससे यह मामला बेहद संगीन बन गया है।
तालकटोरा थाने में दर्ज हुई FIR, कई धाराओं में केस
आपको बता दें कि इन्हीं आरोपों के बीच तालकटोरा थाने में दर्ज हुई एफआईआर में अमिताभ और नूतन ठाकुर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 34 और 120-B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया कि नूतन ठाकुर ने 1999 में फर्जी नाम नूतन देवी पत्नी अभिजात ठाकुर, ग्राम खैरा, जिला सीतामढ़ी, बिहार” के नाम से जिला उद्योग केंद्र देवरिया से औद्योगिक प्लाट का आवंटन कराया। इस दौरान फर्जी आवेदन पत्र, शपथ पत्र और ट्रेजरी चालान समेत कई दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। बाद में वही प्लाट उनके वास्तविक नाम से बेच दिया गया, जिससे विभाग और सरकार को लंबे समय तक गुमराह रखा गया।
आरोप- पद का दुरुपयोग करके सरकारी विभागों को गुमराह करने का खेला गया खेल
दर्ज हुई FIR में साफ तौर पर कहा गया है कि तत्कालीन एसपी देवरिया रहते हुए अमिताभ ठाकुर ने इस पूरे मामले में सहयोग और संरक्षण दिया। उद्योग विभाग के अधिकारियों को प्रभाव में लेकर नूतन ठाकुर को प्लाट का आवंटन कराया गया। नूतन ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 'नूतन इंडस्ट्रीज' नाम की फर्म का पंजीकरण भी कराया और स्थानीय कारोबारियों व सरकारी विभागों को भ्रमित किया। इस दौरान कई कूटरचित पहचान पत्र और शपथ पत्र तैयार किए गए। आरोप यह भी है कि यह पूरा प्रकरण सिर्फ एक प्लाट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे आगे बेनामी संपत्तियों और काले धन की लेन-देन की भी संभावना जताई गई है।
आर्थिक अपराध और बेनामी संपत्ति की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने अपनी तहरीर के साथ कई दस्तावेज और प्रमाण भी संलग्न किए हैं। आरोप है कि फर्जी नाम से संपत्ति लेकर बाद में वास्तविक नाम से बेचने की कार्रवाई बेनामी संपत्ति (निषेध) अधिनियम और आयकर कानून का उल्लंघन है। इस खेल से सरकार को राजस्व हानि भी हुई। साथ ही आयकर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग की संभावना से इनकार नहीं किया गया। यही वजह है कि मामले की जांच CBCID, SIT या CBI से कराने की मांग की गई है। साथ ही संलिप्त विभागीय अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, पेंशन रोकने और संपत्ति जब्त करने तक की सिफारिश की गई है।
राजनीतिक और कानूनी हलचल, बड़ा असर संभव
आपको बता दें कि पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर पहले भी विवादों में रहे हैं और उन्हें 2021 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। अब इस नए मामले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर हमेशा सक्रिय रहने वाली नूतन ठाकुर अब खुद गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो अगर जांच एजेंसियां आरोपों की पुष्टि करती हैं तो ठाकुर दंपत्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है। इस केस ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी है, क्योंकि इसकी प्रतियां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और प्रधानमंत्री तक भेजी गई हैं। आने वाले दिनों में यह प्रकरण उत्तर प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।


