हर अग्निकांड के बाद वही कहानी... मौतों का हिसाब, जिम्मेदारों को माफी

Lucknow Fire Action: अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई कितनी असरदार? न्यूजट्रैक की पड़ताल में सामने आई पुरानी तस्वीर

Ashutosh Tripathi
Published on: 1 July 2026 1:10 PM IST
हर अग्निकांड के बाद वही कहानी... मौतों का हिसाब, जिम्मेदारों को माफी
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Lucknow Fire: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 से अधिक लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद राजधानी एक बार फिर शोक में डूब गई है। लेकिन इस हादसे ने सिर्फ एक इमारत को नहीं जलाया, बल्कि व्यवस्था की उस पुरानी तस्वीर को भी सामने ला दिया है, जिसमें हर बड़े हादसे के बाद जांच होती है, रिपोर्ट तैयार होती है, दोषी चिन्हित होते हैं, लेकिन कार्रवाई की आग कभी जिम्मेदारों तक नहीं पहुंचती।

न्यूजट्रैक के पत्रकार आशुतोष त्रिपाठी की विशेष पड़ताल ने प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवाल खड़े किए हैं। अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दिए। रिपोर्टों के आधार पर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और कर्मचारियों के निलंबन जैसे फैसले भी लिए गए। हालांकि सवाल यह है कि क्या अलीगंज की घटना पहली ऐसी घटना है, जिसके बाद इतनी सख्त कार्रवाई हुई? जवाब है- नहीं।

इससे पहले भी प्रदेश में कई बड़े अग्निकांडों के बाद जांच समितियां बनीं, अधिकारियों को निलंबित किया गया और दोषियों पर कार्रवाई के बड़े दावे किए गए। लेकिन समय बीतने के साथ अधिकांश मामलों में कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई। कई स्थानों पर न तो अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही स्थायी रूप से तय हो सकी। कई मामलों में निलंबित अधिकारी भी बाद में अपनी सेवाओं में लौट आए। इन घटनाओं का सबसे बड़ा नुकसान उन परिवारों को उठाना पड़ा, जिन्होंने हादसों में अपने प्रियजनों को खोया या भारी आर्थिक और मानसिक क्षति झेली।

न्यूजट्रैक की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए, अलीगंज से पहले हुए बड़े अग्निकांडों में क्या कार्रवाई हुई, किन-किन अधिकारियों पर गाज गिरी और समय बीतने के बाद उन मामलों का आखिर क्या हुआ।

एसएसजे इंटरनेशनल और विराट होटल में गई थी 8 लोगों की जान

लखनऊ में पिछले आठ वर्षों के दौरान हुए बड़े अग्निकांड इस सवाल को और गहरा करते हैं। वर्ष 2018 में चारबाग स्थित एसएसजे इंटरनेशनल और विराट होटल में लगी भीषण आग में आठ लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही की ओर इशारा किया, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ गया। न किसी अधिकारी को जेल जाना पड़ा और न ही किसी पर ऐसी कार्रवाई हुई जो भविष्य के लिए नजीर बन सके।

Photo: Social Media


लेवाना अग्निकांड में 4 लोगों की हुई थी मौत

इसके बाद लेवाना सुइट होटल अग्निकांड हुआ, जिसमें चार युवाओं की दर्दनाक मौत हुई। जांच में भवन निर्माण, फायर सेफ्टी और संचालन में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई अधिकारियों के नाम कार्रवाई के लिए शासन को भेजे गए, लेकिन वर्षों बाद भी अधिकांश जिम्मेदार किसी कठोर दंड से बच निकले। सवाल यह है कि जब हर जांच में लापरवाही साबित होती है, तो आखिर सजा किसे मिलती है?

Photo: Newstrack (Ashutosh Tripathi)


2016 में जारी हुए से ध्वस्तीकरण के आदेश

अब अलीगंज अग्निकांड में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जिस भवन में यह हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि कुछ ही समय बाद यह आदेश निरस्त कर दिया गया और भवन जस का तस खड़ा रहा। आज वही इमारत कई परिवारों के लिए अपनों की अंतिम याद बन चुकी है।

हर हादसे के बाद प्रशासन की ओर से जांच, मुआवजे और सख्त कार्रवाई के दावे किए जाते हैं। कुछ दिनों तक बयान, बैठकें और निरीक्षण चलते हैं, लेकिन समय बीतते ही फाइलें अलमारियों में बंद हो जाती हैं। पीड़ित परिवार न्याय का इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि जिम्मेदार फिर किसी नई फाइल, नई कुर्सी या नए विभाग के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाते नजर आते हैं।

Photo: Newstrack (Ashutosh Tripathi)


अलीगंज की त्रासदी ने एक बार फिर व्यवस्था के सामने वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया है, क्या इस बार भी हादसे की राख ठंडी पड़ने के साथ जवाबदेही भी खत्म हो जाएगी, या फिर पहली बार ऐसा होगा जब जांच रिपोर्ट सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी और लापरवाही की कीमत वास्तव में जिम्मेदारों को चुकानी पड़ेगी? आखिर कब तक हर अग्निकांड के बाद सिर्फ इमारतें जलेंगी और जवाबदेही धुएं में उड़ती रहेगी? हमने इस मसले पर अधिकारियों से बात करने के कोशिश की तो उन्होंने फोन कॉल का जवाब ही नहीं दिया।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

Chief Photojournalist Mail ID - tripathiashutosh88@gmail.comtripathiashutosh88@gmail.com

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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