Lucknow News: लखनऊ में सेब हुआ आधा, नींबू पहुंचा ₹250 किलो; लहसुन-अदरक भी महंगे

Lucknow News: लखनऊ में कश्मीर से नई फसल आने के बाद सेब के थोक भाव में बड़ी गिरावट आई है। नींबू ₹250, लहसुन ₹225 और अदरक ₹200 किलो तक पहुंचा, जबकि भिंडी, लौकी और तोरई सस्ती हुईं।

Newstrack Network
Published on: 25 Sept 2026 11:55 PM IST
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Lucknow News (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। राजधानी के फल-सब्जी बाजार में इस सप्ताह कीमतों की तस्वीर उलट गई है। कुछ दिन पहले तक महंगाई के कारण आम खरीदार की पहुंच से दूर होता जा रहा सेब कश्मीर से नई फसल की आवक शुरू होते ही लगभग आधे भाव पर आ गया है, जबकि सामान्यतः सेब से काफी सस्ता रहने वाला नींबू अब उससे करीब दोगुने से ढाई गुने भाव पर बिक रहा है। लखनऊ के फुटकर बाजार में अच्छी किस्म का सेब, जो एक सप्ताह पहले ₹200 प्रति किलो से ऊपर तक पहुंच गया था, अब करीब ₹100 प्रति किलो से मिल रहा है। इसके उलट नींबू का भाव ₹180-190 से बढ़कर कई फुटकर बाजारों में ₹220-250 प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी इस समय एक किलो नींबू की कीमत दो से ढाई किलो सामान्य सेब के बराबर हो गई है। सब्जियों में भिंडी, लौकी और तोरई की कीमतों में करीब ₹20 प्रति किलो की गिरावट से कुछ राहत मिली है, लेकिन रसोई में लगभग रोज इस्तेमाल होने वाला अदरक और लहसुन महंगा हो गया है।

लखनऊ की मंडियों में दिखाई दे रहा यह उतार-चढ़ाव केवल स्थानीय मांग का परिणाम नहीं है। इसके पीछे सितंबर की बारिश, अलग-अलग उत्पादक राज्यों से माल की आपूर्ति, स्थानीय सब्जियों की तुड़ाई और कश्मीर में सेब का नया मौसम शुरू होने जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। बारिश के दौरान खेतों में तुड़ाई और सड़क मार्ग से ढुलाई प्रभावित होने के कारण कई फल-सब्जियों की आवक कम हुई थी। अब बारिश का दबाव घटने से स्थानीय सब्जियों की आपूर्ति सुधरी है, इसलिए भिंडी, लौकी और तोरई जैसी सब्जियां सस्ती हुई हैं। लेकिन नींबू, अदरक और लहसुन जैसे उत्पादों के लिए लखनऊ काफी हद तक दूसरे राज्यों की आपूर्ति पर निर्भर है, इसलिए उनमें तत्काल वैसी राहत नहीं दिखाई दे रही।

सात दिन में सेब के थोक भाव में 30 से 60 रुपये किलो तक गिरावट

सबसे बड़ा बदलाव सेब में आया है। नवीन मंडी के कारोबारियों के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले अच्छी गुणवत्ता का सेब थोक बाजार में ₹90-100 प्रति किलो तक बिक रहा था। अब कश्मीर से नई फसल आने के बाद अलग-अलग गुणवत्ता और किस्म का सेब करीब ₹40 से ₹70 प्रति किलो के बीच उपलब्ध हो रहा है। इस हिसाब से ऊपरी थोक भाव ₹100 से ₹70 पर आने में लगभग 30 प्रतिशत गिरा है, जबकि कुछ श्रेणियों में ₹90 से ₹40 तक आने पर गिरावट 55 प्रतिशत से भी अधिक बैठती है।

फुटकर बाजार में इसका असर कुछ अंतराल से पहुंचा है। जो सेब एक सप्ताह पहले ₹200 या उससे अधिक में बेचा जा रहा था, वह अब कई बाजारों में करीब ₹100 प्रति किलो में उपलब्ध है। हालांकि हर सेब को एक ही भाव से नहीं जोड़ा जा सकता। आकार, किस्म, रंग, ग्रेड, पैकिंग और गुणवत्ता के अनुसार एक ही मंडी में भाव में बड़ा अंतर हो सकता है।

कश्मीर की मंडियों के ताजा सरकारी स्रोत आधारित आंकड़े भी सितंबर के अंतिम हिस्से में नई फसल की व्यापक उपलब्धता की पुष्टि करते हैं। 22 सितंबर को श्रीनगर की परिमपोरा मंडी में अकेले लगभग 984 टन सेब की आवक दर्ज हुई और विभिन्न गुणवत्ता वाले सेब का भाव ₹3,125 से ₹12,000 प्रति क्विंटल के व्यापक दायरे में था। इसी तारीख को हंदवाड़ा-कुपवाड़ा में ‘डिलीशियस’ सेब ₹5,000 से ₹7,500 प्रति क्विंटल और गंदरबल में ₹7,000 से ₹9,000 प्रति क्विंटल के बीच दर्ज हुआ। इससे साफ है कि कश्मीर में फसल बाजार में उतर चुकी है, हालांकि कश्मीर की मंडी का भाव और लखनऊ का थोक या फुटकर भाव परिवहन, छंटाई, खराबा, पैकिंग और कारोबारी मार्जिन के कारण एक जैसा होना जरूरी नहीं है।

शिमला के बाद कश्मीर की आवक ने बदला बाजार

लखनऊ में पहले प्रमुख रूप से हिमाचल प्रदेश, खासकर शिमला क्षेत्र का सेब आ रहा था। अब कश्मीर का माल पहुंचने लगा है। फल कारोबार में सितंबर-अक्टूबर का समय महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी अवधि में जम्मू-कश्मीर की बड़ी सेब फसल बाजार में आती है। आपूर्ति का आधार बढ़ते ही खरीदारों के पास अलग-अलग ग्रेड और भाव का माल उपलब्ध होने लगता है और थोक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

24 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के सोपोर बाजार में उपलब्ध सरकारी मंडी आंकड़ों में अलग-अलग ग्रेड के सेब लगभग ₹4,700 से ₹6,100 प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किए गए। इसका अर्थ करीब ₹47 से ₹61 प्रति किलो का उत्पादक-मंडी स्तर का भाव है। यह लखनऊ के कारोबारियों द्वारा बताए जा रहे ₹40-70 प्रति किलो के थोक दायरे से मोटे तौर पर मेल खाता है, हालांकि दोनों बाजारों की किस्म और ग्रेड समान मानकर सीधी तुलना नहीं की जानी चाहिए।

नींबू की उलटी कहानी, ₹250 किलो तक पहुंचा फुटकर भाव

जहां सेब की बढ़ती आपूर्ति ने उसका भाव नीचे ला दिया है, वहीं नींबू की कहानी ठीक उलटी है। फुटकर बाजार में नींबू ₹180-190 प्रति किलो से बढ़कर ₹220 से ₹250 प्रति किलो तक बिकने की सूचना है। यदि ₹190 से ₹250 का ऊपरी भाव लिया जाए तो एक सप्ताह में वृद्धि करीब 31.6 प्रतिशत बैठती है। ₹180 से ₹220 की तुलना में भी वृद्धि करीब 22 प्रतिशत है।

लेकिन नींबू के मामले में थोक और फुटकर भाव का अंतर असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देता है और इसे अलग से समझना जरूरी है। 24 सितंबर के एगमार्कनेट आधारित लखनऊ एपीएमसी आंकड़ों में नींबू का दर्ज भाव करीब ₹13,797 प्रति क्विंटल, यानी लगभग ₹138 प्रति किलो था, जबकि उसी दिन बंथरा बाजार में दर्ज भाव केवल ₹3,000 प्रति क्विंटल दिखाई देता है। यह बड़ा अंतर बताता है कि नींबू के सरकारी मंडी आंकड़ों में बाजार, किस्म, गुणवत्ता और रिपोर्टिंग के आधार पर काफी भिन्नता हो सकती है। इसलिए ₹220-250 का आंकड़ा लखनऊ के फुटकर बाजार का ऊपरी भाव माना जाना चाहिए, पूरे शहर का एक समान सरकारी औसत नहीं।

लखनऊ का करीब 80 प्रतिशत नींबू कर्नाटक से आने का कारोबारी दावा

नवीन मंडी के कारोबारियों के अनुसार लखनऊ में पहुंचने वाले नींबू का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा कर्नाटक, लगभग 15 प्रतिशत महाराष्ट्र और शेष करीब पांच प्रतिशत स्थानीय अथवा आसपास की आपूर्ति से आता है। ये मंडी कारोबारियों के अनुमान हैं, आधिकारिक राज्यवार आपूर्ति आंकड़े नहीं। यदि यह वितरण मौजूदा बाजार की वास्तविक स्थिति के करीब है तो लखनऊ में नींबू के भाव का दक्षिण और पश्चिम भारत की फसल तथा परिवहन स्थिति से सीधे प्रभावित होना स्वाभाविक है।

बारिश के दौरान लंबी दूरी से आने वाले माल की ढुलाई प्रभावित होने और आवक घटने का असर फुटकर बाजार तक पहुंचा है। फल-सब्जी विक्रेता संघ, नवीन मंडी के अध्यक्ष रिंकू सोनकर का कहना है कि बारिश थमने के बाद आवक बढ़ रही है और अगले करीब एक सप्ताह में नींबू, प्याज, लहसुन तथा अदरक की आपूर्ति बेहतर होने पर कीमतों में राहत मिल सकती है। यह व्यापारियों का बाजार अनुमान है, निश्चित मूल्य पूर्वानुमान नहीं, क्योंकि आने वाले दिनों के भाव वास्तविक आवक, मौसम और मांग पर निर्भर करेंगे।

लहसुन में भी उछाल, मंडी आंकड़ों में तेजी की पुष्टि

रसोई पर दूसरा दबाव लहसुन से आया है। फुटकर में एक सप्ताह पहले ₹160-180 प्रति किलो बिक रहा लहसुन अब ₹200 से ₹225 प्रति किलो तक पहुंच गया है। ₹180 से ₹225 की तुलना करें तो वृद्धि 25 प्रतिशत है, जबकि ₹160 से ₹200 की तुलना में भी यही वृद्धि करीब 25 प्रतिशत बैठती है।

ताजा एगमार्कनेट आधारित आंकड़ों में भी लहसुन की कीमत में तेजी दिखाई देती है। 24 सितंबर को लखनऊ एपीएमसी में दर्ज लहसुन भाव लगभग ₹18,852 प्रति क्विंटल, यानी ₹188.5 प्रति किलो था। बंथरा बाजार में इसी दिन दर्ज भाव ₹26,460 प्रति क्विंटल तक दिखाई देता है। दोनों बाजारों में बड़ा अंतर गुणवत्ता और रिपोर्टिंग से जुड़ा हो सकता है, लेकिन यह आंकड़ा इतना जरूर पुष्ट करता है कि लहसुन फिलहाल अपेक्षाकृत महंगी श्रेणी में बना हुआ है।

लखनऊ में लहसुन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश से आने की बात कारोबारी बता रहे हैं। बारिश और परिवहन व्यवधान के बाद लंबी दूरी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में स्थानीय सब्जियों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। इसी कारण स्थानीय भिंडी या लौकी सस्ती होने के बावजूद लहसुन में राहत तुरंत नहीं दिखाई दे रही।

अदरक ₹200 किलो तक, लेकिन थोक और फुटकर में बड़ा अंतर

अदरक का फुटकर भाव करीब ₹150 से बढ़कर ₹200 प्रति किलो तक पहुंचने की सूचना है। यह ऊपरी स्तर पर करीब 33 प्रतिशत वृद्धि है। कारोबारियों के मुताबिक लखनऊ में अदरक मुख्य रूप से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आ रहा है।

हालांकि अदरक में भी उपलब्ध मंडी और फुटकर आंकड़ों में बड़ा अंतर है। 24 सितंबर के लखनऊ एपीएमसी रिकॉर्ड में हरे अदरक का भाव ₹6,000 प्रति क्विंटल यानी करीब ₹60 प्रति किलो दर्ज है, जबकि बंथरा में यह ₹15,000 प्रति क्विंटल यानी करीब ₹150 प्रति किलो है। इसलिए किसी एक थोक भाव को पूरे शहर का प्रतिनिधि भाव मानना उचित नहीं होगा। फुटकर बाजार में गुणवत्ता, सफाई, छंटाई, परिवहन और विक्रेता के अनुसार ₹150-200 का दायरा संभव है।

भिंडी, लौकी और तोरई ने दी राहत, सात दिन में ₹20 किलो सस्ती

स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों से आने वाली सब्जियों में तस्वीर बेहतर है। एक सप्ताह पहले करीब ₹60 प्रति किलो बिक रही भिंडी, लौकी और तोरई अब कई बाजारों में करीब ₹40 प्रति किलो तक आ गई हैं। यानी सात दिन में ₹20 की कमी और लगभग 33 प्रतिशत गिरावट। इसका मुख्य कारण बारिश कम होने के बाद खेतों में तुड़ाई और स्थानीय परिवहन का सामान्य होना बताया जा रहा है।

मंडी स्तर पर भाव फुटकर से काफी नीचे हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश की दूसरी मंडियों के 24 सितंबर के सरकारी आंकड़ों में भिंडी करीब ₹18 प्रति किलो, तोरई ₹16 और लौकी ₹12 प्रति किलो तक दर्ज हुई है। इन भावों को लखनऊ का थोक भाव नहीं माना जा सकता, लेकिन वे यह संकेत देते हैं कि स्थानीय और क्षेत्रीय हरी सब्जियों की आपूर्ति सुधरने पर उत्पादक-मंडी स्तर पर कीमतें अपेक्षाकृत नीचे आई हैं।

प्याज में ₹10-15 की राहत

कुछ दिन पहले ₹70-80 प्रति किलो तक पहुंच चुकी प्याज में भी करीब ₹10 से ₹15 प्रति किलो की राहत बताई जा रही है। लखनऊ एपीएमसी के 24 सितंबर के आंकड़ों में प्याज का भाव ₹3,500 प्रति क्विंटल, यानी करीब ₹35 प्रति किलो दर्ज है, जबकि बंथरा में लगभग ₹45.9 प्रति किलो का भाव था। फुटकर बाजार में इसमें परिवहन, खराबा और विक्रेता का मार्जिन जुड़ने के बाद कीमत स्वाभाविक रूप से अधिक होती है।

इसलिए ₹70-80 से गिरावट को थोक मंडी के ₹35-46 के भाव से सीधे नहीं मिलाना चाहिए। पहला फुटकर बाजार का पिछला ऊपरी भाव है और दूसरा अलग मंडियों का वर्तमान थोक रिकॉर्ड। फिर भी दोनों संकेत इस बात से मेल खाते हैं कि प्याज की स्थिति पिछले सप्ताह की तुलना में कुछ नरम हुई है।

टमाटर ₹40-50 किलो, फिलहाल बड़ी तेजी नहीं

टमाटर फुटकर में करीब ₹40-50 प्रति किलो चल रहा है। 24 सितंबर को लखनऊ एपीएमसी में दर्ज टमाटर का भाव लगभग ₹20 प्रति किलो और बंथरा में करीब ₹35.9 प्रति किलो था। फुटकर में ₹40-50 का भाव इस थोक स्तर के संदर्भ में असामान्य नहीं दिखाई देता।

बरसात के दौरान टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों की कीमत बहुत तेजी से बदल सकती है। अधिक बारिश से खेत में नुकसान, ढुलाई में देरी और खराबे की मात्रा बढ़ने पर मंडी में उपलब्ध बिक्री योग्य माल कम हो जाता है। मौसम सामान्य होने पर यही प्रक्रिया उलट सकती है और आवक बढ़ने से कीमत तेजी से नीचे भी आ सकती है।

अनार भी सस्ता, ऊपरी थोक भाव ₹140 से ₹80 तक

सेब के अलावा अनार के थोक भाव में भी उल्लेखनीय गिरावट बताई जा रही है। कारोबारियों के अनुसार पहले अनार की अलग-अलग गुणवत्ता ₹50 से ₹140 प्रति किलो के बीच थी, जो अब करीब ₹40 से ₹80 प्रति किलो रह गई है। ऊपरी भाव ₹140 से ₹80 पर आने का अर्थ लगभग 43 प्रतिशत गिरावट है। यहां भी किस्म और गुणवत्ता का अंतर महत्वपूर्ण है, इसलिए न्यूनतम और अधिकतम भाव की तुलना को औसत बाजार गिरावट नहीं माना जाना चाहिए।

थोक में ₹40 का सेब फुटकर में ₹100 क्यों?

फल-सब्जियों की कीमतों में अक्सर खरीदार का सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि मंडी में कोई वस्तु ₹40-70 किलो है तो बाजार में ₹100 क्यों है। इसका एक ही उत्तर नहीं होता। मंडी से फुटकर दुकान तक माल पहुंचने में आढ़त, परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, छंटाई, खराबा, भंडारण और फुटकर विक्रेता का मार्जिन जुड़ता है। फल में खराबे और गुणवत्ता की छंटाई का असर सब्जियों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। ₹40 वाला सेब भी वही नहीं होगा जिसे कोई दुकानदार चुनकर ₹100 में बेच रहा है। ग्रेड और आकार बदलते ही कीमत बदल सकती है।

इसीलिए मंडी का न्यूनतम भाव और फुटकर बाजार का अधिकतम भाव साथ रखकर यह निष्कर्ष निकालना कि बीच का पूरा अंतर व्यापारी का लाभ है, सही नहीं होगा। वास्तविक तुलना समान किस्म, समान ग्रेड और एक ही तारीख के थोक तथा फुटकर भाव के बीच होनी चाहिए।

सितंबर का मौसम क्यों इतनी तेजी से बदल रहा भाव

मौजूदा बाजार की कहानी मूलतः दो अलग आपूर्ति चक्रों की है। स्थानीय सब्जियों के मामले में बारिश कम हुई, खेतों में तुड़ाई सुधरी और माल तेजी से बाजार पहुंचा, इसलिए भिंडी, लौकी और तोरई सस्ती हुईं। दूसरी ओर नींबू, अदरक और लहसुन की आपूर्ति काफी हद तक दूसरे राज्यों से होती है, इसलिए उनमें बारिश और लंबी दूरी की ढुलाई का असर कुछ अधिक समय तक रह सकता है।

सेब तीसरी श्रेणी में है। यहां बारिश थमने से ज्यादा महत्वपूर्ण मौसमी फसल चक्र है। कश्मीर की नई फसल बाजार में उतरते ही उपलब्धता अचानक बढ़ी है। 22 सितंबर को अकेले श्रीनगर की परिमपोरा मंडी में 984 टन सेब की दर्ज आवक इस समय आपूर्ति के आकार का संकेत देती है। कश्मीर के दूसरे बाजारों में भी सितंबर के मध्य और अंतिम हिस्से में बड़ी मात्रा में नई फसल पहुंच रही है। यही अतिरिक्त माल दिल्ली और उत्तर भारत की दूसरी बड़ी मंडियों से होते हुए लखनऊ जैसे उपभोक्ता बाजारों तक पहुंच रहा है।

एक ही सप्ताह में रसोई का गणित बदला

मौजूदा भावों को देखें तो उपभोक्ता के लिए स्थिति मिश्रित है। सेब, भिंडी, लौकी, तोरई और कुछ हद तक प्याज सस्ते हुए हैं, जबकि नींबू, अदरक और लहसुन ने रसोई का खर्च बढ़ाया है। सबसे असामान्य स्थिति नींबू और सेब की है। ₹100 किलो का सामान्य सेब और ₹220-250 किलो का नींबू मौसमी आपूर्ति के अंतर का ऐसा उदाहरण है जिसमें सामान्यतः सस्ता समझा जाने वाला फल दूसरे फल से दोगुने से अधिक महंगा हो गया है।

लखनऊ के फल-सब्जी बाजार की मौजूदा कीमतें यह भी बताती हैं कि महंगाई को केवल ‘सब्जियां महंगी हुईं’ या ‘फल सस्ते हुए’ जैसे एक वाक्य में नहीं समझा जा सकता। एक ही सप्ताह में कश्मीर की नई आवक से सेब का थोक भाव ₹90-100 से गिरकर ₹40-70 प्रति किलो तक आ गया, बारिश थमने से स्थानीय भिंडी-लौकी-तोरई करीब एक-तिहाई सस्ती हुईं, जबकि दूसरे राज्यों पर निर्भर नींबू ₹250, लहसुन ₹225 और अदरक ₹200 प्रति किलो तक पहुंच गए। अगले कुछ दिनों में बाहरी राज्यों से आपूर्ति बढ़ी तो अदरक, लहसुन और नींबू में भी नरमी आ सकती है, लेकिन फिलहाल लखनऊ के बाजार की सबसे दिलचस्प तस्वीर यही है—कश्मीर का नया सेब ₹100 किलो के आसपास और रसोई में निचोड़ा जाने वाला नींबू उससे दोगुने से भी अधिक भाव पर।

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